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कटनी के सुनील ताम्रकार ने अंगदान से कई लोगों को दिया जीवन, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई

कटनी के सुनील कुमार ताम्रकार के निधन के बाद परिजनों ने उनकी इच्छा के अनुसार अंगदान किया। इंदौर में प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी गई।
कटनी के सुनील ताम्रकार ने अंगदान से कई लोगों को दिया जीवन, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई

कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी में सुनील कुमार ताम्रकार के निधन के बाद उनके परिजनों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए मरणोपरांत अंगदान का फैसला लिया। परिवार के इस निर्णय से कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने में मदद मिली। इस मानवीय पहल के सम्मान में मध्य प्रदेश शासन की ओर से सुनील ताम्रकार को राजकीय सम्मान दिया गया। नदीपार मुक्तिधाम में पुलिस बल ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम विदाई दी। इस दौरान जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, व्यापारियों और समाजसेवियों सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

इंदौर के अस्पताल में पूरी हुई अंगदान की प्रक्रिया

सुनील कुमार ताम्रकार कटनी की पुरानी बस्ती के शेर चौक क्षेत्र के निवासी थे। उनके निधन के बाद परिवार ने उनकी अंगदान की इच्छा पूरी करने का निर्णय लिया। इसके बाद अंगदान से जुड़ी जरूरी चिकित्सीय और कानूनी प्रक्रियाएं इंदौर के अस्पताल में पूरी की गईं। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने प्रत्यारोपण के योग्य अंगों को सुरक्षित निकाला। इससे गंभीर रूप से बीमार कई मरीजों को जीवनदान मिलने का रास्ता बना। प्रक्रिया पूरी होने के बाद सुनील ताम्रकार के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक कटनी स्थित उनके निवास पर लाया गया।

नदीपार मुक्तिधाम में गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदाई

सुनील ताम्रकार के अंगदान और उनके परिवार के फैसले के सम्मान में प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें राजकीय सम्मान दिया गया। कटनी के नदीपार मुक्तिधाम में पुलिस बल ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी। अंतिम यात्रा और मुक्तिधाम में नगर के जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, व्यापारी, समाजसेवी और ताम्रकार समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी और परिवार के इस निर्णय की सराहना की।

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अंगदान को लेकर जागरूकता की मिसाल बना परिवार का फैसला

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समाज में आज भी अंगदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। ऐसे में सुनील ताम्रकार के परिजनों का यह फैसला लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करने में मददगार हो सकता है। दुख की घड़ी में भी किसी दूसरे की जिंदगी बचाने के लिए आगे आना परिवार के साहस और सुनील ताम्रकार की इच्छा के प्रति सम्मान को दर्शाता है। उनका यह निर्णय कटनी में अंगदान के प्रति जागरूकता की एक मिसाल बन गया है।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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