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नेत्रदान के नाम पर कॉर्निया निकालने के आरोप, SOTTO ने लायंस आई हॉस्पिटल को जारी की चेतावनी

छिंदवाड़ा के लायंस आई हॉस्पिटल में नेत्रदान के नाम पर कॉर्निया निकालने को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। SOTTO ने मांगा जवाब, RTI में क्या खुलासा हुआ?
नेत्रदान के नाम पर कॉर्निया निकालने के आरोप, SOTTO ने लायंस आई हॉस्पिटल को जारी की चेतावनी

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया स्थित लायंस आई हॉस्पिटल में नेत्रदान के नाम पर कॉर्निया निकालने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि अस्पताल में करीब 25 साल से मृत व्यक्तियों की आंखों से कॉर्निया निकालने का काम किया जा रहा था, जबकि इसके लिए जरूरी वैधानिक पंजीयन और अनुमति उपलब्ध नहीं थी। मामले में SOTTO यानी स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन ने संस्था को पत्र जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के RTI जवाब में भी संस्था के नाम पर अंग या ऊतक निकालने से संबंधित पंजीयन दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है।

PMO तक पहुंची शिकायत, CIMS की समिति ने की जांच

इस मामले की शुरुआत समाजसेवी और RTI कार्यकर्ता रिंकू रितेश चौरसिया की शिकायत से हुई। उनके मुताबिक, वर्ष 2016 में उनके मामा अशोक चौरसिया के निधन के बाद परिवार ने लायंस आई हॉस्पिटल, परासिया को नेत्रदान किया था। वर्ष 2018 में अशोक चौरसिया की पत्नी गीता चौरसिया ने यह जानना चाहा कि उनके पति की आंखों से प्राप्त कॉर्निया किस जरूरतमंद मरीज को प्रत्यारोपित किया गया। आरोप है कि अस्पताल की ओर से उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद रिंकू रितेश चौरसिया ने RTI के माध्यम से जानकारी जुटाई और विभिन्न सरकारी विभागों में शिकायतें दर्ज कराईं। मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंचा।

शिकायत क्रमांक PMOPG_D_2026_0061817 पर संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए गए। इसके बाद छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (CIMS) की पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने मामले की जांच की। शिकायतकर्ता के अनुसार, समिति ने अस्पताल की कार्यप्रणाली में अनियमितताओं की पुष्टि की है।

SOTTO ने मांगा स्पष्टीकरण, NOTTO पंजीयन के बिना काम पर रोक

मामले में SOTTO मध्य प्रदेश की ओर से जारी पत्रों के अनुसार, अस्पताल में कॉर्निया निकालने की प्रक्रिया को लेकर निर्धारित नियमों और अनुमति से जुड़े सवाल सामने आए हैं। संस्था को स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक, SOTTO ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्तर के संगठन NOTTO में जरूरी पंजीयन और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना भविष्य में कॉर्निया निकालने या प्रत्यारोपण से संबंधित गतिविधियां नहीं की जा सकतीं।

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RTI में स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में नहीं मिला पंजीयन

इस मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), छिंदवाड़ा से भी सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गई थी। 16 मार्च 2026 को जारी पत्र क्रमांक RTI/2026/7027 में विभाग ने बताया कि लायंस आई हॉस्पिटल, परासिया के नाम पर अंग या ऊतक निकालने से संबंधित कोई पंजीयन दर्ज नहीं है। इस जवाब के बाद अस्पताल की ओर से पिछले वर्षों में की गई कॉर्निया निकालने की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कितने मृत व्यक्तियों से कॉर्निया प्राप्त किए गए, उन्हें कहां रखा गया और किन मरीजों को प्रत्यारोपित किया गया, इसकी जानकारी और रिकॉर्ड की मांग की जा रही है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के पास पंजीयन का रिकॉर्ड नहीं होने का मतलब यह अपने आप साबित नहीं करता कि अस्पताल में पिछले 25 वर्षों से की गई हर प्रक्रिया अवैध थी। इसके लिए संबंधित अनुमति, पुराने रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट का पूरा परीक्षण जरूरी होगा।

जबलपुर हाईकोर्ट में PIL दायर करने की तैयारी

शिकायतकर्ता रिंकू रितेश चौरसिया का कहना है कि मामले से जुड़े दस्तावेज NOTTO, SOTTO, लोकायुक्त, मानव अधिकार आयोग और पुलिस प्रशासन को सौंपे जा चुके हैं। प्रशासनिक कार्रवाई में देरी को देखते हुए अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की तैयारी की जा रही है। चौरसिया के मुताबिक, उनका उद्देश्य नेत्रदान की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई कराना है। अब इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष, जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट और संबंधित सरकारी विभागों की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

Shyam Sahu
By Shyam Sahu

छिंदवाड़ा के वरिष्ठ पत्रकार हैं। 25 वर्षों का अनुभव अपने क्षेत्र में शासन प्रशासन की खबरें पाठकों त...

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