बिलासपुर संजू त्रिपाठी हत्याकांड मामले में 22 आरोपी कोर्ट से बरी, भाई कपिल त्रिपाठी को भी राहत; पुलिस हत्या की साजिश साबित करने में नाकाम

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कांग्रेस नेता संजू त्रिपाठी हत्याकांड में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को सुनाए गए फैसले में मुख्य आरोपी और मृतक के भाई कपिल त्रिपाठी को भी राहत मिल गई। पुलिस की जांच में हत्या की साजिश, उत्तर प्रदेश से शूटर बुलाने और संपत्ति विवाद को हत्या की वजह बताया गया था, लेकिन अदालत में अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ षड्यंत्र का आरोप साबित नहीं कर सका। दिनदहाड़े हुई इस सनसनीखेज हत्या के मामले में आए फैसले ने पुलिस की जांच और अभियोजन की पैरवी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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चार साल पुराने हत्याकांड में बड़ा फैसला, सभी 22 आरोपी बरी
बिलासपुर के चर्चित संजू त्रिपाठी हत्याकांड में शुक्रवार को जिला अदालत का फैसला सामने आया। अदालत ने मामले में आरोपी बनाए गए सभी 22 लोगों को बरी कर दिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता के मुताबिक, पुलिस और अभियोजन पक्ष हत्या की साजिश में आरोपियों की भूमिका को न्यायालय में प्रमाणित नहीं कर सके। इसी आधार पर आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।

संपत्ति विवाद बना था खूनी रंजिश की वजह
पुलिस की जांच में सामने आया था कि संजू त्रिपाठी और उनके भाई कपिल त्रिपाठी के बीच संपत्ति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। दोनों का नाम शहर की विवादित जमीनों के कारोबार से भी जुड़ा बताया गया था। इसी पारिवारिक और संपत्ति विवाद को पुलिस ने हत्या की मुख्य वजह मानते हुए जांच आगे बढ़ाई थी।
भाई कपिल त्रिपाठी पर लगा था हत्या की साजिश रचने का आरोप
जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया था कि संजू त्रिपाठी की हत्या की योजना उनके भाई कपिल त्रिपाठी ने बनाई थी। आरोप था कि हत्या को अंजाम देने के लिए उत्तर प्रदेश से शूटर बुलाए गए थे और उन्हें सुपारी दी गई थी। इस मामले में कपिल को मुख्य आरोपी बनाया गया था। हालांकि, अदालत के फैसले में कपिल त्रिपाठी समेत सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया गया।
फार्म हाउस में तैयार हुई थी हत्या की पूरी रणनीति
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, हत्या से पहले कपिल त्रिपाठी के फार्म हाउस में पूरी योजना बनाई गई थी। आरोप था कि हथियार और कारतूस जुटाने के बाद शूटरों तथा अन्य सहयोगियों को अलग-अलग वाहनों में रवाना किया गया। 14 दिसंबर 2022 को सभी आरोपी कथित तौर पर चार गाड़ियों में सवार होकर सकरी बाइपास की ओर निकले थे।
सकरी बाइपास पर MG हेक्टर को घेरकर बरसाई गई थीं गोलियां
पुलिस जांच में बताया गया था कि आरोपियों को संजू त्रिपाठी की सफेद रंग की MG हेक्टर कार की जानकारी दी गई थी। इसके बाद सकरी बाइपास पर उनकी गाड़ी को दूसरी कार सामने लगाकर रोकने की योजना बनाई गई। आरोप था कि कार रुकते ही दूसरी गाड़ी से उतरे हमलावरों ने संजू त्रिपाठी को चारों तरफ से घेर लिया और ड्राइवर सीट पर बैठे संजू पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। दिनदहाड़े हुई इस वारदात से पूरे बिलासपुर में सनसनी फैल गई थी।
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वारदात के बाद यूपी की ओर भागे थे हमलावर
पुलिस के अनुसार, गोलीबारी के बाद हमलावर अलग-अलग गाड़ियों में सवार होकर उत्तर प्रदेश की ओर फरार हो गए थे। जांच में दानिश अंसारी, पप्पू दाढ़ी, एजाज उर्फ सोनू और विनय द्विवेदी उर्फ गुरुजी समेत कई लोगों की भूमिका सामने आने का दावा किया गया था।
24 लोगों को बनाया गया था आरोपी, 22 को मिली राहत
इस हत्याकांड में पुलिस ने कुल 24 लोगों को आरोपी बनाया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इनमें से दो आरोपी फरार थे, जबकि बाकी आरोपियों के खिलाफ अदालत में मुकदमा चला। शुक्रवार को अदालत ने मामले में 22 आरोपियों को बरी कर दिया। इनमें मुख्य आरोपी कपिल त्रिपाठी भी शामिल है, जो पहले से जमानत पर बाहर था।
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अदालत के फैसले से पुलिस की जांच पर उठे सवाल
दिनदहाड़े हुई हत्या, संपत्ति विवाद, कथित सुपारी किलिंग और उत्तर प्रदेश के शूटरों की भूमिका जैसे गंभीर पहलुओं के बावजूद अदालत में हत्या की साजिश साबित नहीं हो सकी। इस फैसले के बाद मामले की पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।




















