🌤️
--Bhopal, India

PlayBreaking News

kanker:8 साल से बंद मदरसा, फिर भी 80-90 युवतियां कर रहीं पढ़ाई,कांकेर में आखिर किसकी अनुमति से चल रहा ‘गुलशने जहरा ?

2017 में नाबालिग के प्रसव मामले के बाद शिक्षा विभाग ने कराया था बंद; RTI में भी मदरसा बंद होने की जानकारी, अब संचालन को लेकर उठे गंभीर सवाल,मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 में मदरसा गुलशने जहरा में अध्ययनरत एक नाबालिग युवती के प्रसव का मामला सामने आया था। इसके बाद मामले की जांच की गई और मदरसा बोर्ड तथा शिक्षा विभाग की ओर से संस्था को बंद करने के निर्देश दिए गए।
Follow on Google News
8 साल से बंद मदरसा, फिर भी 80-90 युवतियां कर रहीं पढ़ाई,कांकेर में आखिर किसकी अनुमति से चल रहा ‘गुलशने जहरा ?

कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर में शिक्षा व्यवस्था और नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। संजय नगर वार्ड में स्थित मदरसा गुलशने जहरा को शिक्षा विभाग और मदरसा बोर्ड के रिकॉर्ड में वर्ष 2017 से बंद बताया जा रहा है। इसके बावजूद यहां करीब 80 से 90 युवतियों के रहने और उर्दू, अरबी सहित अन्य विषयों की पढ़ाई करने का दावा सामने आया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभागीय रिकॉर्ड में संस्था बंद है, तो इसका संचालन आखिर किसकी अनुमति से हो रहा है?

यह भी पढ़ें: Raipur: छत्तीसगढ़ में तिरंगा यात्रा का आगाज, CM साय ने दिखाई हरी झंडी,दीपक बैज का BJP पर तीखा हमला

2017 के बाद बंद हुआ था मदरसा, अब फिर संचालन का दावा

मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 में मदरसा गुलशने जहरा में अध्ययनरत एक नाबालिग युवती के प्रसव का मामला सामने आया था। इसके बाद मामले की जांच की गई और मदरसा बोर्ड तथा शिक्षा विभाग की ओर से संस्था को बंद करने के निर्देश दिए गए। मदरसा संचालक मंडल की ओर से इस कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने की बात कही गई है। संचालक के मुताबिक मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।

/img/129/1786367125839

RTI में 2017 से बंद, फिर अंदर पढ़ाई कैसे?

मामले में सबसे बड़ा सवाल विभाग से मिली RTI की जानकारी को लेकर सामने आ रहा है। RTI में मदरसा गुलशने जहरा को वर्ष 2017 से बंद बताया गया है। दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर यहां बड़ी संख्या में युवतियों के रहने और पढ़ाई करने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना विभागीय अनुमति किसी बंद संस्था में शैक्षणिक गतिविधियां कैसे संचालित हो रही हैं?

यह भी पढ़ें: Raipur: रायपुर में 20 लाख की MDMA खेप पकड़ी, राजस्थान का युवक गिरफ्तार तेलघानी नाका ओवरब्रिज के नीचे 106.19 ग्राम MDMA बरामद

80-90 युवतियों के रहने का दावा, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार मदरसा परिसर में करीब 80 से 90 युवतियां रहकर शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इनमें नाबालिग छात्राएं भी शामिल होने की बात कही जा रही है। यदि यहां वास्तव में नाबालिग छात्राओं के रहने की व्यवस्था है, तो उनकी सुरक्षा, आवासीय व्यवस्था, निगरानी और अन्य आवश्यक मानकों को लेकर प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। खास बात यह है कि इसी संस्था में वर्ष 2017 में नाबालिग युवती के प्रसव का गंभीर मामला सामने आ चुका है। ऐसे में वर्तमान संचालन की जानकारी प्रशासन और पुलिस को है या नहीं, यह भी जांच का विषय है।

दूसरे राज्यों से भी छात्राएं आने का दावा

स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक मदरसा गुलशने जहरा में छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य राज्यों से भी युवतियों के आने और रहने की बात सामने आई है। यदि यह जानकारी सही है तो संस्था में रहने वाली छात्राओं की पहचान, उम्र, अभिभावकों की अनुमति, आवासीय व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी नियमों की जांच जरूरी हो जाती है।

यह भी पढ़ें: Raipur: कारीगर बनकर 60 ग्राम सोना चोरी, 7.80 लाख के माल पर किया हाथ साफ, जोधपुर से आरोपी गिरफ्तार

सरकारी अनुदान और मध्यान्ह भोजन का भी दावा

स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि वर्ष 2017 से पहले मदरसा गुलशने जहरा का बड़े स्तर पर संचालन होता था। उस समय यहां अध्ययनरत छात्राओं को मध्यान्ह भोजन मिलने और सरकारी अनुदान प्राप्त होने की बात भी कही जा रही है। हालांकि वर्तमान में किसी प्रकार की सरकारी मान्यता, अनुदान या विभागीय अनुमति है या नहीं, इसकी स्थिति संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

/img/129/1786367164995

सरकारी शिक्षक ही मदरसे के संचालक?

मामले को और गंभीर बनाने वाला सवाल यह है कि मदरसा गुलशने जहरा के संचालक मौलाना तुफैल अहमद के शासकीय स्कूल में शिक्षक होने की बात सामने आई है। यदि एक शासकीय कर्मचारी किसी ऐसी संस्था का संचालन कर रहा है, जिसे विभागीय रिकॉर्ड में वर्ष 2017 से बंद बताया गया है, तो इस पूरे मामले में विभागीय स्तर पर जांच की आवश्यकता और बढ़ जाती है।

यह भी पढ़ें: Raipur: रायपुर के स्कूल मैदान में गैंगरेप का आरोप, शराब पिलाकर महिला से दरिंदगी, 3 आरोपी गिरफ्तार, नाबालिग भी पकड़ा गया

संचालक बोले- सामाजिक स्तर पर हो रहा संचालन

मदरसा गुलशने जहरा के संचालक मौलाना तुफैल अहमद ने बताया कि वर्ष 2017 में मदरसा का रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया था और शिक्षा विभाग ने इसे बंद कराया था। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई के खिलाफ मामला हाईकोर्ट में लंबित है। उनके मुताबिक वर्तमान में मदरसा गुलशने जहरा का संचालन सामाजिक स्तर पर किया जा रहा है।

DEO बोले- जांच कराई जाएगी

मामले में जिला शिक्षा अधिकारी कांकेर रमेश कुमार निषाद ने कहा कि मदरसा गुलशने जहरा को वर्ष 2017 में बंद कराया गया था। यदि इसके बाद भी मदरसा संचालित किया जा रहा है तो मामले की जांच कराई जाएगी।उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा मदरसे का संचालन किया जा रहा है तो इसकी भी जांच होगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें: Durg Bhilai: भिलाई में वेलनेस स्पा की आड़ में देह व्यापार का खुलासा, मैनेजर-महिला दलाल समेत 9 गिरफ्तार

अब प्रशासन के सामने सबसे बड़े सवाल

जब रिकॉर्ड में मदरसा 2017 से बंद है तो वर्तमान में संचालन किसकी अनुमति से हो रहा है?

80-90 युवतियों के रहने और पढ़ने की जानकारी सही है तो प्रशासन को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी?

यहां नाबालिग छात्राएं रह रही हैं तो उनकी सुरक्षा व्यवस्था कैसी है?

दूसरे राज्यों से आने वाली छात्राओं के दस्तावेज और अभिभावकीय अनुमति की जांच हुई है या नहीं?

क्या संस्था को वर्तमान में किसी विभाग से मान्यता प्राप्त है?

क्या किसी प्रकार का सरकारी अनुदान या सुविधा वर्तमान में मिल रही है?

शासकीय शिक्षक द्वारा संस्था के संचालन की अनुमति है या नहीं?

PREM

मै People's Updates रायपुर,छग में CHIEF EDITOR के पद में कार्यरत हूँ।अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत...Read More

icon

Latest Posts