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सीहोर में 13 साल की मासूम से दरिंदगी, आरोपी को 20 साल की सजा; पीड़िता को मिलेगा 1 लाख रुपये मुआवजा

सीहोर के जिला मुख्यालय स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय ने 13 वर्षीय बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाले आरोपी को कड़ा सबक सिखाते हुए सलाखों के पीछे भेज दिया है। विशेष न्यायाधीश स्मृता सिंह ठाकुर की अदालत ने नाबालिग के साथ अनाचार के गंभीर मामले में आरोपी विशाल अहिरवार (18) को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
सीहोर में 13 साल की मासूम से दरिंदगी, आरोपी को 20 साल की सजा; पीड़िता को मिलेगा 1 लाख रुपये मुआवजा
रोपी को 20 साल की सजा

सीहोर। अदालत ने उस पर ₹3,000 का अर्थदंड भी लगाया है। इसके साथ ही न्याय और मानवीय संवेदना को सर्वोपरि रखते हुए अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए ₹1 लाख की क्षतिपूर्ति राशि (प्रतिकर) स्वीकृत करने का आदेश पारित किया।

​बहला-फुसलाकर मशान ले गया था दरिंदा

​अभियोजन पक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दिल दहला देने वाली घटना श्यामपुर थाना क्षेत्र की है। पीड़िता की मां, जिसके पति का छह माह पहले ही देहांत हो चुका था, मजदूरी करके अपने मासूम बच्चों का पालन-पोषण कर रही थी। 3 अप्रैल 2025 की शाम करीब सात बजे पीड़िता की मां घर में खाना बना रही थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला 18 वर्षीय आरोपी विशाल अहिरवार बालिका को बहला-फुसलाकर अपनी बाइक पर बैठाकर ले गया। आरोपी बच्ची को नाले के पास स्थित सुनसान मशान में ले गया, जहां उसने मासूम की चीखों को अनसुना कर जबरन अनाचार किया। वारदात के बाद आरोपी पीड़िता को जान से मारने की धमकी देकर मौके से फरार हो गया।

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​सहमी मासूम ने सुनाई आपबीती,24 घंटे में पकड़ाया आरोपी

​घटना के बाद बदहवास और डरी-सहमी बच्ची जब घर पहुंची, तो उसने रोते हुए पूरी आपबीती अपनी मां को बताई। परिजनों ने बिना देर किए सीधे श्यामपुर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज  किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई की और वारदात के अगले ही दिन 4 अप्रैल 2025 को आरोपी विशाल को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का नजरी नक्शा तैयार किया, स्कूल रिकॉर्ड से उम्र का सत्यापन कराया और फॉरेंसिक और डीएनए जांच के नमूने एफएसएल भोपाल भेजे।

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​अदालत में पुख्ता साक्ष्य और प्रभावी पैरवी से तय हुआ जुर्म

​मुकदमे की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक आशीष त्यागी ने शासन की ओर से प्रभावी पैरवी की। अभियोजन ने फॉरेंसिक रिपोर्ट, चिकित्सकीय परीक्षण और गवाहों के बयानों को ठोस तरीके से पेश किया। अभियोजक ने तर्क दिया कि अबोध बच्चियों के खिलाफ ऐसे जघन्य अपराध समाज की अंतरात्मा को झकझोरते हैं, इसलिए दोषी को किसी भी प्रकार की नरमी नहीं मिलनी चाहिए।

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​विभिन्न धाराओं में सुनाई गई सजा

​अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी विशाल अहिरवार को दोषी ठहराया। कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट की धारा 3(क)/4(1) और 3(क)/4(2) में 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास, बीएनएस की धारा 87 में 2 वर्ष और धारा 137(2) में 1 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अर्थदंड जमा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

सुनील शर्मा, सीहोर जिला ब्यूरो, पीपुल्स समाचार ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक भास्कर, पत...Read More

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