Aniruddh Singh
19 Jan 2026
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19 Jan 2026
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19 Jan 2026
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19 Jan 2026
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत से जुड़े कोल्ड्रिफ कफ सिरप मामले की जांच में यह खुलासा हुआ है कि तमिलनाडु फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (टीएनएफडीए) ने सालों तक नियामकीय मानकों को लागू करने में गंभीर लापरवाही बरती। यह सिरप कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मा द्वारा निर्मित किया गया था, जो पिछले एक दशक से भी अधिक समय से घटिया बुनियादी ढांचे और कई नियम उल्लंघनों के बावजूद संचालित हो रहा था। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के सूत्रों के अनुसार, राज्य नियामक ने कभी भी इस कंपनी की जानकारी केंद्र सरकार को नहीं दी, न ही इसके ऑडिट की रिपोर्ट साझा की।
श्रीसन फार्मा को टीएनएफडीए ने 2011 में दिया था लाइसेंसः जानकारी के अनुसार, श्रीसन फार्मा को टीएनएफडीए ने वर्ष 2011 में लाइसेंस प्रदान किया था, जिसके बाद कंपनी लगातार काम करती रही। हाल ही में सीडीएससीओ द्वारा की गई निरीक्षण प्रक्रिया में पाया गया कि यह यूनिट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (जीएमपी) के किसी भी मानक का पालन नहीं कर रही थी। फैक्ट्री की स्थिति बेहद खराब पाई गई, और वहां दवाइयों के उत्पादन के लिए आवश्यक सुरक्षा व स्वच्छता प्रोटोकॉल का पूर्ण अभाव था।
सीडीएसओ के एक अधिकारी ने बताया चूंकि टीएनएफडीए ने इस कंपनी की जानकारी कभी साझा नहीं की, इसलिए श्रीसन फार्मा का नाम सीडीएससीओ के किसी भी डेटाबेस में दर्ज नहीं था। नियम 84एबी के अनुसार, सभी दवा निर्माताओं को अपने स्वीकृत उत्पादों को सुगम पोर्टल पर पंजीकृत करना होता है, ताकि देशभर में एकीकृत निगरानी प्रणाली बनाई जा सके। लेकिन स्रेशन फार्मा ने ऐसा नहीं किया, और राज्य नियामक भी इस नियम को लागू कराने में विफल रहा। केंद्रीय नियामक ने अक्टूबर 2023 में तमिलनाडु के सभी दवा निर्माताओं और डीएनएफडीए को गूगल फॉर्म के माध्यम से अपने डेटा साझा करने के लिए कहा था। इस दिशा-निर्देश को हर मासिक बैठक में दोहराया गया, लेकिन स्रेशन फार्मा ने न तो पंजीकरण किया और न ही राज्य नियामक ने उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित किया।
मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत की घटनाओं के बाद टीएनएफडीए ने 1 और 2 अक्टूबर को श्रीसन फार्मा का निरीक्षण किया था, परंतु इस रिपोर्ट को सीडीएससीओ के साथ साझा नहीं किया गया। इसके बाद, 3 अक्टूबर को सीडीएससीओ ने स्वयं जोखिम-आधारित निरीक्षण किया और पाया कि कंपनी के सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) की मात्रा 48 प्रतिशत थी, जबकि अनुमेय सीमा केवल 0.1 प्रतिशत है। डीईजी एक अत्यंत विषैला रसायन है जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित होता है। सीडीएससीओ ने टीएनएफडीए से तुरंत कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द करने और आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश की। 8 अक्टूबर को मध्य प्रदेश पुलिस ने श्रीसन फार्मा के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है।
इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें दवा गुणवत्ता मानकों की समीक्षा और बच्चों में कफ सिरप के तर्कसंगत उपयोग को सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, श्रीसन फार्मा न तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के जीएमपी प्रमाणन मानकों को पूरा करता है, न ही वह संशोधित शेड्यूल एम की आवश्यकताओं के अनुरूप है, जिसे दिसंबर 2023 की अधिसूचना में अनिवार्य किया गया था। यह पूरा मामला भारत की दवा नियामक व्यवस्था में गंभीर खामियों को उजागर करता है। जहां केंद्र सरकार बच्चों की सुरक्षा के लिए दवा गुणवत्ता पर सख्ती बढ़ा रही है, वहीं राज्य स्तरीय एजेंसियों की लापरवाही और पारदर्शिता की कमी के कारण ऐसी त्रासदियां बार-बार सामने आ रही हैं।