झारखंड में एक छात्र नेता के अनशन ने बढ़ाई मुश्किलें, क्या हैं देवेंद्रनाथ महतो की प्रमुख मांगें?

दो जुलाई को जारी 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के बाद परीक्षा प्रक्रिया पर कई सवाल उठे। छात्रों ने कटऑफ जारी नहीं करने, ओएमआर गड़बड़ी और परिणाम पर अधिकारियों के साइन नहीं होने को लेकर विरोध शुरू किया। बढ़ते विवाद के बीच मुख्य परीक्षा रद्द कर दी गई। इसके बाद छात्र सीबीआई और ईडी से जांच कराने सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसी क्रम में छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो दो अगस्त से आमरण अनशन पर बैठे हैं और सरकार पर निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव बढ़ता जा रहा है।
जेपीएससी परीक्षा परिणाम के बाद बढ़ा विवाद
दो जुलाई को झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (जेपीएससी) की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया, जिसमें 2204 अभ्यर्थियों ने मुख्य परीक्षा के लिए पात्रता हासिल की। मुख्य परीक्षा 18 से 20 जुलाई के बीच प्रस्तावित थी, लेकिन परिणाम सामने आने के बाद कई सवाल उठने लगे। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि कैटेगरीवार कटऑफ जारी नहीं की गई। इसी दौरान एक कथित ओएमआर शीट सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें कम प्रश्न हल करने के बावजूद चयन होने का दावा किया गया। साथ ही परिणाम पर आयोग के अध्यक्ष, सचिव या सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने को लेकर भी आपत्ति जताई गई। विवाद बढ़ने पर मुख्य परीक्षा रद्द कर दी गई।
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धरने से आमरण अनशन तक पहुंचा आंदोलन
इस पूरे आंदोलन की शुरुआत 25 जुलाई को छात्र नेता और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) से जुड़े देवेंद्रनाथ महतो ने रांची के मोरहाबादी मैदान स्थित गांधी प्रतिमा के सामने धरना देकर की थी। शुरुआती दिनों में आंदोलन में सीमित संख्या में छात्र शामिल हुए, लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से इसे व्यापक समर्थन मिलने लगा। डूरंड कप मैच के कारण प्रशासन ने धरनास्थल बदलकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम परिसर कर दिया। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पहुंच रहे हैं। पहले छह अगस्त को विधानसभा घेराव की घोषणा की गई थी, लेकिन बाद में रणनीति बदलते हुए देवेंद्रनाथ महतो ने दो अगस्त से आमरण अनशन शुरू कर दिया।
छात्र राजनीति से आंदोलन तक का सफर
रांची जिले के राहे प्रखंड के कापीडीह गांव निवासी देवेंद्रनाथ महतो छात्र जीवन से ही विभिन्न छात्र हितों के मुद्दों को उठाते रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2006 में प्रथम श्रेणी से दसवीं, 2008 में विज्ञान से इंटर, 2017 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक, इसके बाद कुरमाली भाषा में स्नातकोत्तर और बीएड की पढ़ाई पूरी की। रिटायर्ड सरकारी शिक्षक विशंभर महतो के पुत्र देवेंद्र ने वर्ष 2015 में नियोजन नीति के विरोध से आंदोलन की शुरुआत की। बाद में छात्रवृत्ति, भर्ती परीक्षाओं और कथित अनियमितताओं के खिलाफ भी लगातार आवाज उठाते रहे। उनके अनुसार छात्र आंदोलनों के कारण उनके खिलाफ 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।
ये हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें
देवेंद्रनाथ महतो और आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांग है कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) द्वारा पूर्व में कराई गई सभी परीक्षाओं की भी जांच कर उन्हें रद्द किया जाए। छात्रों का आरोप है कि कंपनी से जुड़े एक अधिकारी पर भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं। इसके अलावा पूरे मामले की जांच केवल सीआईडी नहीं, बल्कि सीबीआई और ईडी से भी कराई जाए। फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर तीन महीने के भीतर न्याय सुनिश्चित करने और जेपीएससी, जेएसएससी के कथित भ्रष्ट अधिकारियों को हटाकर साफ छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति की भी मांग की जा रही है।
स्वास्थ्य पर असर, सरकार पर बढ़ रहा दबाव
आमरण अनशन के कारण देवेंद्रनाथ महतो की तबीयत पर लगातार डॉक्टर नजर बनाए हुए है। रांची सदर अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर कम हो रहा है, शुगर का स्तर घट रहा है और डिहाइड्रेशन के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं। दूसरी ओर आंदोलन को छात्रों का लगातार समर्थन मिल रहा है, जिससे सरकार पर समाधान निकालने का दबाव बढ़ता जा रहा है। आंदोलनकारी चाहते हैं कि टीडीपीएल को ब्लैकलिस्ट कर भविष्य की परीक्षाओं का जिम्मा टीसीएस जैसी विश्वसनीय कंपनियों को दिया जाए, ताकि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और छात्रों का भरोसा दोनों बहाल हो सकें।












