Jitiya Vrat 2025 :जितिया व्रत आज से शुरू, माताएं रखेंगी 24 घंटे का निर्जला व्रत, जानें पारण का समय, पूजा विधि से लेकर सबकुछ

AI जनरेटेड सारांश
धर्म डेस्क। जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत हिंदू धर्म में माताओं द्वारा अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए रखा जाता है। महिलाएं पूरे दिन और रात निर्जला व्रत करती हैं, यानी बिना पानी और अन्न के रहती हैं। यह व्रत उत्तर भारत में बड़े श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
नहाय–खाय क्या है?
नहाय-खाय जितिया व्रत का पहला दिन होता है। इसे अष्टमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत शुरू करने से पहले शुद्ध होकर भोजन करती हैं, क्योंकि अगले दिन यानी नवमी तिथि को पूरा 24 घंटे निर्जला व्रत रखा जाता है न अन्न, न जल।
जितिया व्रत की तिथि
- व्रत शुरू- 14 सितंबर 2025 (अष्टमी तिथि – नहाय-खाय)
- व्रत पारण- 15 सितंबर 2025 (नवमी तिथि)
पारण का शुभ समय
इस साल जितिया व्रत का पारण 15 सितंबर 2025 को सुबह 6:10 बजे से 8:32 बजे के बीच करना शुभ रहेगा। सूर्योदय के बाद महिलाएं पारण करती हैं।
पारण में क्या खाया जाता है?
पारण वाले दिन व्रत खोलते समय ये चीजें खाई जाती है-
- तुरई
- खीरा
- नोनी का साग
- मंडुआ की रोटी
- देसी मटर
- रागी की रोटी
- चावल
- झींगा मछली (कुछ क्षेत्रों में)
पारण कैसे करें?
- सूर्योदय के बाद सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- फिर विधिपूर्वक पूजा करें और बच्चों की भलाई की कामना करें।
- इसके बाद अरबी, तुरई, चावल, मडुआ या रागी की रोटी, नोनी का साग आदि खाकर व्रत खोलें।
- पूजा में बच्चे के लिए करधनी चढ़ाई जाती है, जिसे पारण वाले दिन पहनाया जाता है।
- व्रत पूर्ण होने के बाद जरूरतमंदों को भोजन और कपड़े का दान करना शुभ माना जाता है।
विशेष बातें
- यह व्रत निर्जला रखा जाता है।
- पारण का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है।
- बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखा जाता है।
- दान करना व्रत पूर्ण होने का एक आवश्यक हिस्सा है।





















