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Pitru Paksha 2025 :आज से पितृपक्ष की शुरुआत, भाद्रपद पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण का विशेष संयोग; कौन सा श्राद्ध कब किया जाएगा?

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आज से पितृपक्ष की शुरुआत, भाद्रपद पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण का विशेष संयोग; कौन सा श्राद्ध कब किया जाएगा?
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    धर्म डेस्क। मध्य भारत और अन्य क्षेत्रों में आज से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है। इस वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह दिन पितरों की कृपा पाने और उनके लिए तर्पण, पिंडदान एवं श्राद्ध करने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

    भाद्रपद पूर्णिमा 2025: समय और महत्व

    पूर्णिमा तिथि की शुरुआत: 6 सितंबर, मध्यरात्रि 1:42 बजे

    पूर्णिमा तिथि का समापन: 7 सितंबर, रात 11:39 बजे

    स्नान-दान का शुभ मुहूर्त: सुबह 4:31 बजे से 5:16 बजे तक

    चंद्र ग्रहण का समय: रात 9:58 बजे से 8 सितंबर, 1:26 बजे तक

    भाद्रपद पूर्णिमा पर स्नान, दान और व्रत करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने के लिए घर और मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।

    पितरों के श्राद्ध का महत्व

    पूर्णिमा श्राद्ध, जिसे पार्वण श्राद्ध या प्रोष्ठपदी पूर्णिमा भी कहते हैं, उन पूर्वजों के लिए किया जाता है जिनका देहांत पूर्णिमा तिथि को हुआ हो। इस दिन किए गए तर्पण और दान से पितृदोष शांति होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।

    मुख्य अनुष्ठान:

    • सूर्योदय से पहले स्नान और साफ कपड़े पहनना।
    • जल में काला तिल, कुशा और दूध मिलाकर पितरों का तर्पण।
    • सात्विक भोजन तैयार कर पितरों को अर्पित करना।
    • ब्राह्मणों को भोजन कराना और दक्षिणा देना।
    • गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और मिठाई का दान।
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    पितृपक्ष का समय और नियम

    आरंभ: भाद्रपद पूर्णिमा से

    समापन: आश्विन अमावस्या (महालया)

    अवधि: लगभग 15 दिन

    पितृपक्ष में जल तर्पण दक्षिण दिशा की ओर करना चाहिए। हाथ में कुशा लेकर काला तिल डालना अनिवार्य है। जिस दिन किसी पूर्वज की मृत्यु हुई हो, उस दिन विशेष रूप से अन्न और वस्त्र का दान करना चाहिए।

    चंद्र ग्रहण और पितृपक्ष

    इस वर्ष की भाद्रपद पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय सूतक काल रहता है, जिसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। इसलिए पूर्णिमा का श्राद्ध और तर्पण सूतक काल से पहले करना उत्तम माना गया है।

    कौन कर सकता है श्राद्ध और तर्पण

    • घर का वरिष्ठ पुरुष सदस्य तर्पण कर सकता है।
    • यदि घर में वरिष्ठ पुरुष नहीं हैं तो कोई अन्य पुरुष सदस्य या पौत्र/नाती कर सकता है।
    • वर्तमान समय में महिलाएं भी पितृपक्ष में तर्पण और श्राद्ध कर सकती हैं, परंतु सावधानियों का पालन करना अनिवार्य है।
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    पितृपक्ष की तिथियां और श्राद्ध का दिन

    • प्रतिपदा श्राद्ध – 8 सितंबर 2025
    • द्वितीया श्राद्ध – 9 सितंबर 2025
    • तृतीया श्राद्ध – 10 सितंबर 2025
    • चतुर्थी श्राद्ध – 10 सितंबर 2025
    • पंचमी श्राद्ध – 12 सितंबर 2025
    • षष्ठी श्राद्ध – 12 सितंबर 2025
    • सप्तमी श्राद्ध – 13 सितंबर 2025
    • अष्टमी श्राद्ध – 14 सितंबर 2025
    • नवमी श्राद्ध – 15 सितंबर 2025
    • दशमी श्राद्ध – 16 सितंबर 2025
    • एकादशी श्राद्ध – 17 सितंबर 2025
    • द्वादशी श्राद्ध – 18 सितंबर 2025
    • त्रयोदशी श्राद्ध – 19 सितंबर 2025
    • चतुर्दशी श्राद्ध – 20 सितंबर 2025
    • सर्वपितृ अमावस्या – 21 सितंबर 2025

    ये भी पढ़ें: क्या जीवित व्यक्ति भी कर सकते हैं अपना श्राद्ध? जानें शास्त्रों का मत

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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