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विद्युत लोकपाल ने निरस्त किया बिजली कंपनी का 1.93 लाख का बिल, उपभोक्ता के पक्ष में फैसला

मध्यप्रदेश के विद्युत लोकपाल ने जबलपुर स्थित एक औद्योगिक इकाई पर बिजली कंपनी द्वारा थमाए गए लगभग 1.93 लाख रुपए के अतिरिक्त बिलों और असेसमेंट आदेशों को अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया है। साथ ही पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को उपभोक्ता द्वारा प्रकरण के दौरान जमा कराई गई राशि को आगामी बिजली बिलों में समायोजित करने के निर्देश दिए हैं।
विद्युत लोकपाल ने निरस्त किया बिजली कंपनी का 1.93 लाख का बिल, उपभोक्ता के पक्ष में फैसला
विद्युत लोकपाल ने निरस्त किया बिजली कंपनी का 1.93 लाख का बिल

जबलपुर। विद्युत लोकपाल एमएस तोमर ने अपने आदेश में 1,40,011 रुपए और 53,726 रुपए के दोनों देयकों को पूरी तरह निरस्त कर दिया। कंपनी को अपील के दौरान जमा की गई कुल राशि 70,005.50 रुपए और 53,730 रुपए का समायोजन भविष्य के बिजली देयकों में करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा याचिका व्यय के रूप में 2,000 रुपए का भुगतान करने के भी आदेश दिए गए हैं।

मीटर में पीटी मिसिंग बताकर थमाया था असेसमेंट बिल

जबलपुर के माढ़ोताल स्थित 'विश्नीकवि इंटरप्राइजेज' के प्रोप्राइटर मनीष कोडवानी के संस्थान में 8 फरवरी 2024 को पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कर्मचारियों ने निरीक्षण किया था। संस्थान का स्वीकृत भार 75 एचपी है। कंपनी का दावा था कि मीटर में पीटी मिसिंग थी और 'आर' फेस पर सही खपत दर्ज नहीं हो रही थी, जिसके आधार पर कंपनी ने पुराना मीटर बदल दिया।

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डेढ़ साल बाद 1.40 लाख रुपए का बिल जारी किया

निरीक्षण के लगभग डेढ़ साल बाद 7 जुलाई 2025 को उपभोक्ता को 1,40,011 रुपए का असेसमेंट बिल थमा दिया गया। इसके अलावा फोरम में सुनवाई के दौरान 7,080 यूनिट का 53,726 रुपए का एक और देयक जारी कर दिया गया। उपभोक्ता ने कंपनी स्तरीय फोरम में गुहार लगाई, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने पर अधिवक्ता व्हीके उपाध्याय के माध्यम से विद्युत लोकपाल, भोपाल में अपील दायर की।

सुनवाई में नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई

सुनवाई के दौरान सामने आया कि विद्युत कंपनी ने 'मध्य प्रदेश विद्युत प्रदाय संहिता 2021' और अपने ही परिपत्रों का गंभीर उल्लंघन किया है। परिसर में पहले से स्थापित 'चेक मीटर' की रीडिंग का आंकलन नहीं किया गया, जबकि नियमों के अनुसार मुख्य मीटर में खराबी की स्थिति में चेक मीटर के आधार पर गणना की जानी चाहिए थी। उपभोक्ता को मीटर की लैब टेस्टिंग या उसकी परिशुद्धता जांचने का भी कोई अवसर नहीं दिया गया।

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पंचनामा के बाद भी करीब डेढ़ साल की देरी

मामले में अत्यधिक देरी का बिंदु भी सामने आया। पंचनामा बनाने के 7 दिनों के भीतर अंतिम आदेश जारी होना चाहिए था, जबकि कंपनी ने करीब डेढ़ साल बाद उपभोक्ता को बिल थमाया। सुनवाई के दौरान इन नियमों और प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं को भी विद्युत लोकपाल के समक्ष रखा गया, जिसके बाद कंपनी द्वारा जारी दोनों देयकों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया।

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दोनों देयक निरस्त, जमा राशि होगी समायोजित

विद्युत लोकपाल ने अपने आदेश में कंपनी द्वारा जारी 1,40,011 रुपए और 53,726 रुपए के दोनों देयकों को पूरी तरह निरस्त कर दिया। लोकपाल ने निर्देश दिया कि अपील के दौरान उपभोक्ता द्वारा जमा की गई कुल राशि 70,005.50 रुपए और 53,730 रुपए का समायोजन कंपनी भविष्य के बिजली देयकों में करे। इसके साथ ही याचिका व्यय के रूप में 2,000 रुपए का भुगतान करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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