ईरान ने रखीं शर्तें, ट्रंप ने ठुकराया प्रस्ताव... क्या फिर शुरू होगी बातचीत?

मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच शांति की उम्मीद जगी थी, लेकिन ईरान की नई शर्तों ने एक बार फिर बातचीत को मुश्किल बना दिया है। ईरान ने युद्धविराम के लिए अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, प्रतिबंधों में राहत और अपनी जमी हुई संपत्तियां जारी करने जैसी मांगें रखीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया। इसके बावजूद बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।
होर्मुज पर क्या होगा?
अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत माइक वॉल्ट्ज के मुताबिक, ईरान बातचीत शुरू होने से पहले ही ऐसी रियायतें मांग रहा था, जिन्हें अमेरिका मंजूर नहीं कर सकता। वहीं, ईरान का कहना है कि वह अपने अधिकारों की मांग कर रहा है और होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को कुछ कदम उठाने होंगे। इस बीच, ट्रंप ने ईरान के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले दोबारा शुरू करने की संभावना भी जताई है। हालांकि, उन्होंने अगले सप्ताह बातचीत फिर शुरू होने की उम्मीद भी जाहिर की। ऐसे में सवाल है कि जब दोनों देश एक-दूसरे की शर्तों को स्वीकार नहीं कर रहे, तो क्या युद्धविराम का कोई रास्ता निकल सकता है?
ईरान की क्या हैं शर्तें?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र में युद्धविराम का प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव के तहत ईरान ने अमेरिका से कुछ कदम उठाने की मांग की थी। ईरान का कहना था कि इन शर्तों पर सहमति बनने के बाद होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जा सकता है और युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत आगे बढ़ सकती है।
ईरान की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना।
- ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी करना।
- ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटाना।
- क्षेत्र में जारी युद्धविराम को बहाल करना।
ईरान के प्रस्ताव के मुताबिक, इन कदमों के बाद करीब एक सप्ताह के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को खोलने और आगे की बातचीत शुरू करने की योजना थी।
अमेरिका ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव?
अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि ईरान ने बातचीत शुरू होने से पहले ही ऐसी शर्तें रख दी थीं, जिन्हें अमेरिका स्वीकार नहीं कर सकता। उनके मुताबिक, ईरान की मांगों में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, प्रतिबंधों में राहत देना और जमी हुई संपत्तियों को जारी करना शामिल था। वॉल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को भरोसा नहीं है कि ईरान अपने वादों पर कायम रहेगा। वॉल्ट्ज ने ईरान के प्रस्ताव को ऐसी शर्तों वाला कदम बताया, जिनके बारे में तेहरान को पहले से पता था कि अमेरिका उन्हें स्वीकार नहीं करेगा। वहीं, ट्रंप ने भी प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि ईरान के नेता समझौता इसलिए करना चाहते हैं, क्योंकि वे युद्ध में बुरी तरह हार रहे हैं। यह ट्रंप का दावा है; ईरान ने अमेरिकी पक्ष के आरोपों को खारिज किया है।
अराघची ने अमेरिकी आरोपों को किया खारिज
अमेरिका की ओर से प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी राजनयिक के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन आरोपों को पुराना और अप्रमाणित बताया। अराघची के मुताबिक, ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को कुछ निश्चित कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि ईरान की शर्तें नई नहीं हैं और न ही अचानक सामने आई हैं। ईरान का कहना है कि वह अपने उन अधिकारों का सम्मान चाहता है, जिन्हें वह जायज मानता है। अराघची ने यह भी कहा कि कूटनीति के लिए हमेशा उम्मीद रहती है, लेकिन पिछले दो वर्षों में अमेरिकी प्रशासन के व्यवहार को देखते हुए ईरान के पास उसी प्रशासन के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने का कोई कारण नहीं है। हालांकि, उन्होंने बातचीत की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया। ईरान की ओर से कहा गया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है।
होर्मुज स्ट्रेट पर क्यों टिकी है पूरी दुनिया की नजर?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण इस समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलना दोनों देशों के बीच बातचीत का अहम मुद्दा बन गया है। ईरान का प्रस्ताव था कि अमेरिकी नाकाबंदी हटने और अन्य शर्तें पूरी होने के बाद इस रास्ते को खोला जा सकता है। दूसरी ओर, अमेरिका चाहता है कि बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर भी सहमति बने। यानी दोनों देशों के बीच बातचीत में सिर्फ युद्धविराम ही नहीं, बल्कि प्रतिबंध, समुद्री रास्ते और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
ट्रंप ने फिर हवाई हमलों की संभावना जताई
ईरान का प्रस्ताव खारिज करने के साथ ही ट्रंप ने ईरानी ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले दोबारा शुरू करने की संभावना पर भी बात की है। हालांकि, समाचार मंच एक्सियोस से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले सप्ताह ईरान के साथ बातचीत फिर शुरू हो सकती है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच इस सप्ताह और बातचीत हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन वह वैसा समझौता नहीं है, जिसे अमेरिका स्वीकार करना चाहता है। इससे संकेत मिलता है कि प्रस्ताव खारिज होने के बाद भी दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है। हालांकि, दोनों पक्षों की शर्तों में अंतर अभी भी काफी ज्यादा है।
क्या सोमवार से फिर शुरू हो सकती है बातचीत?
एक्सियोस ने मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत सोमवार से शुरू हो सकती है। इस बातचीत में कतर समेत क्षेत्र के कुछ देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। ये देश दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचाने और किसी समझौते की संभावना तलाशने में जुटे हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि बातचीत किस स्तर पर होगी और क्या दोनों देश अपनी शर्तों में बदलाव करने को तैयार होंगे। अमेरिका की ओर से ईरान का प्रस्ताव खारिज किए जाने के बावजूद कूटनीतिक संपर्क जारी रहने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों पक्ष युद्धविराम की दिशा में कोई सहमति बना पाते हैं या नहीं।




















