चुनाव से पहले इटली में बुर्का-नकाब पर बैन, मेलोनी का बड़ा ऐलान, जानें क्या है वजह?

इटली में अगले आम चुनाव से पहले बुर्का और नकाब को लेकर राजनीति गरमा गई है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही सरकार कक्षाओं में विदेशी छात्रों की संख्या को सीमित करने की योजना पर भी काम कर रही है।मेलोनी ने रविवार, 20 सितंबर को यह जानकारी दी। इटली में अगला आम चुनाव 2027 में प्रस्तावित है और उससे पहले सरकार के इस कदम को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
स्कूलों में बुर्का-नकाब पर क्यों आया फैसला?
मेलोनी सरकार का प्रस्ताव स्कूलों में चेहरे को पूरी तरह ढकने वाले बुर्का और नकाब से जुड़ा है। इससे पहले इटली में धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से चेहरे को ढकने की अनुमति से जुड़ी व्यवस्था मौजूद रही है। हालांकि, पहचान की जरूरत पड़ने पर चेहरा दिखाना जरूरी होता है। यानी किसी महिला की पहचान की पुष्टि करनी हो तो उसे बुर्का या नकाब हटाना पड़ सकता है। अब मेलोनी सरकार स्कूलों में ही बुर्का और नकाब पर रोक लगाने का प्रस्ताव लेकर आई है।
चुनाव से पहले क्यों अहम है ये मुद्दा?
मेलोनी की यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब इटली में अगले आम चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। मार्च 2026 में न्यायिक सुधार को लेकर हुए जनमत संग्रह में सरकार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला था। इसके बाद मेलोनी सरकार ने आगामी चुनाव की तैयारियों पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। बुर्का और नकाब का मुद्दा उनके दक्षिणपंथी राजनीतिक आधार से जुड़े मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा इटली में अप्रवासन भी लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है।
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इटली में अप्रवासी छात्र भी बड़ा मुद्दा
2022 के इटली चुनाव के दौरान अप्रवासन को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उस चुनाव में करीब 26 फीसदी मतदाताओं ने अप्रवासन को महत्वपूर्ण मुद्दा माना था। वहीं, इटली में मुस्लिम आबादी करीब 3 फीसदी बताई जाती है। अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इटली के स्कूलों में करीब 20 फीसदी बच्चे अप्रवासी पृष्ठभूमि से आते हैं। ऐसे में स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने का प्रस्ताव भी सरकार की नई नीति का अहम हिस्सा बन गया है।
दुनिया के कई देशों में बुर्का पर रोक
बुर्का और नकाब को लेकर अलग-अलग देशों में अलग-अलग नियम हैं। यूरोप के कई देशों ने सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे को ढकने पर प्रतिबंध लगाए हैं। इन देशों में फ्रांस, पुर्तगाल, स्विट्जरलैंड, बेल्जियम, बुल्गारिया, नीदरलैंड और डेनमार्क जैसे देश शामिल हैं। एशिया में भी कुछ देशों ने बुर्का या चेहरे को ढकने पर पाबंदियां लगाई हैं। इनमें चीन, श्रीलंका, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान का नाम लिया जाता है। अफ्रीका के भी कई देशों में चेहरे को ढकने को लेकर प्रतिबंध लागू हैं। हालांकि, इन देशों में नियम और प्रतिबंधों की प्रकृति एक-दूसरे से अलग है।
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अब आगे क्या होगा?
मेलोनी सरकार के प्रस्ताव के बाद इटली में बुर्का और नकाब को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। एक तरफ सरकार इसे स्कूलों से जुड़े नियम और पहचान के सवाल से जोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर यह मुद्दा अप्रवासन और चुनावी राजनीति से भी जुड़ गया है। अब देखना होगा कि प्रस्ताव को आगे बढ़ाते हुए सरकार किस तरह के नियम लागू करती है और 2027 के चुनाव से पहले यह मुद्दा इटली की राजनीति में कितना महत्वपूर्ण बनता है।




















