इंदौर सराफा में मिलावट के नए तरीके से हड़कंप: भारी धातुओं का पाउडर मिलाकर बढ़ा रहे वजन, कसौटी और एसिड टेस्ट भी फेल

इंदौर। सोने की शुद्धता को लेकर सराफा बाजार में एक नई और गंभीर चुनौती सामने आई है। अब मिलावट करने वाले ऐसे तरीके अपना रहे हैं, जिनसे असली और नकली सोने के बीच अंतर करना सामान्य जांच में बेहद मुश्किल हो गया है। सोने में रुथेनियम, इरिडियम और ऑस्मियम जैसी भारी धातुओं का बारीक पाउडर मिलाकर उसका वजन बढ़ाया जा रहा है। बाजार में इस मिलावटी सामग्री को गोल्ड पाउडर के नाम से बताया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि मिलावट के बावजूद सोना देखने में बिल्कुल असली जैसा दिखाई देता है। सामान्य एसिड टेस्ट और कसौटी पर भी इसकी गड़बड़ी पकड़ में नहीं आती।
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इंदौर के सराफा बाजार में यह मामला तब सामने आया, जब गहने बनाने वाले कुछ कारीगरों ने सोने की गुणवत्ता को लेकर व्यापारियों से शिकायत की। कारीगरों के मुताबिक, सोना गलाने और गहने तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान वास्तविक सोने की मात्रा उम्मीद से कम निकल रही थी। शुरुआत में इसकी वजह समझ नहीं आई, लेकिन जांच के दौरान भारी धातुओं की मिलावट की आशंका सामने आई। इसके बाद सराफा कारोबारियों में चिंता बढ़ गई।मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर चांदी-सोना-जवाहरात व्यापारी एसोसिएशन ने सोमवार शाम आपात बैठक बुलाई। इसमें बुलियन व्यापारियों और दलालों को सोने की शुद्धता की जांच और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
रुथेनियम, इरिडियम और ऑस्मियम से बढ़ा रहे सोने का वजन
सराफा कारोबारियों के अनुसार, पिछले दो से तीन वर्षों में सोने में भारी धातुओं की मिलावट की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसमें मुख्य रूप से रुथेनियम, इरिडियम और ऑस्मियम जैसी धातुओं का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। इन धातुओं का घनत्व सोने से अधिक होता है। ऐसे में थोड़ी मात्रा मिलाने पर भी मिश्रण का वजन बढ़ जाता है।मिलावट करने वाले इस तरीके से सोने की शक्ल और वजन को ऐसा बनाए रखते हैं कि सामान्य कारोबारी जांच में आसानी से संदेह नहीं होता। कसौटी पर घिसने या एसिड टेस्ट करने पर भी कई बार इसकी वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाती। पुरानी कैरेट जांच मशीनों से भी इस तरह की मिलावट पकड़ना मुश्किल हो रहा है।
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महाराष्ट्र और बंगाल के रास्ते बाजारों तक पहुंच रहा गोल्ड पाउडर
कारोबारियों के मुताबिक, इस तरह का संदिग्ध गोल्ड पाउडर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के रास्ते अलग-अलग बाजारों तक पहुंच रहा है। आशंका जताई जा रही है कि इसे चीन में तैयार किया जा रहा है। इसकी कीमत शुद्ध सोने के मुकाबले करीब 10 प्रतिशत कम बताई जा रही है। कम कीमत और अधिक वजन के लालच में इसका इस्तेमाल किए जाने की आशंका है।
इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन कारोबारियों और कारीगरों को हो सकता है, जो बिना अत्याधुनिक जांच के सोने की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। गहने तैयार होने के बाद जब सोने को गलाया जाता है, तब वास्तविक सोने की मात्रा कम निकलने से आर्थिक नुकसान सामने आता है।
अब आधुनिक मशीनों से ही पकड़ में आएगी मिलावट
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की मिलावट की पहचान के लिए सामान्य जांच के बजाय आधुनिक तकनीक की जरूरत है। एक्स-रे फ्लोरेसेंस (XRF) और इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी जैसी तकनीकों से सोने में मौजूद अन्य धातुओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है। कारोबारियों को सलाह दी गई है कि वे केवल बाहरी चमक, वजन या सामान्य एसिड टेस्ट के आधार पर सोने की शुद्धता का भरोसा न करें।
99.50 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने के कारोबार पर जोर
इंदौर चांदी-सोना-जवाहरात व्यापारी एसोसिएशन ने बैठक के बाद सोने की गुणवत्ता को लेकर सख्त रुख अपनाया है। एसोसिएशन ने बुलियन कारोबारियों और दलालों को 99.50 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने के कारोबार को ही मान्यता देने का निर्णय लिया है।सराफा व्यापारी एसोसिएशन के अविनाश शास्त्री के अनुसार, कारीगरों से सोने की गुणवत्ता को लेकर कुछ मौखिक शिकायतें मिली थीं। इसके बाद बुलियन व्यापारी एसोसिएशन और दलाल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की गई। इसमें तय किया गया कि मिलावट की शिकायत मिलने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उसे व्यापार से प्रतिबंधित करने का कदम भी उठाया जा सकता है।




















