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महादेव सट्टा ऐप के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर रायपुर CBI कोर्ट में पेश,भारी पुलिस बल तैनात, CM साय बोले- पूछताछ में कई और चेहरे होंगे बेनकाब

ओमान से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाया गया महादेव ऐप का मुख्य आरोपी; CBI मांग सकती है कस्टोडियल रिमांड, प्रोटेक्शन मनी से लेकर राजनीतिक कनेक्शन तक जांच एजेंसियों की नजर,महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाने के बाद रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया गया। सीबीआई उससे पूछताछ के लिए रिमांड मांग सकती है।
महादेव सट्टा ऐप के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर रायपुर CBI कोर्ट में पेश,भारी पुलिस बल तैनात, CM साय बोले- पूछताछ में कई और चेहरे होंगे बेनकाब

रायपुर: महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में देशभर में चर्चित मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाए जाने के बाद मंगलवार को रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सीबीआई की टीम उसे कोर्ट लेकर पहुंची। कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। आरोपी को मुंह पर रूमाल बांधकर सुरक्षा घेरे में अदालत के सामने पेश किया गया। सीबीआई की ओर से पूछताछ के लिए न्यायिक प्रक्रिया के तहत रिमांड की मांग की गई। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी 14 दिन की रिमांड मांग सकती है। इस बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महादेव सट्टा ऐप मामले में बड़ा बयान देते हुए कहा कि सौरभ चंद्राकर मुख्य अभियुक्त है। सीबीआई की पूछताछ में कई और लोग फंसेंगे और पूरे मामले में नए खुलासे हो सकते हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद महादेव सट्टा नेटवर्क से जुड़े संभावित राजनीतिक और प्रशासनिक कनेक्शन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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कोर्ट में सौरभ की पेशी, सुरक्षा के घेरे में पहुंची CBI

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को मेडिकल परीक्षण के बाद सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया। मनोज कुमार सिंह ठाकुर की विशेष अदालत में पेशी के दौरान सीबीआई के अधिकारी और वकील अहम दस्तावेजों के साथ पहुंचे। कोर्ट परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। सौरभ को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत तक लाया गया। सीबीआई अब उससे नेटवर्क के संचालन, पैसों के लेन-देन, हवाला कनेक्शन और कथित संरक्षण देने वालों के बारे में पूछताछ करना चाहती है।

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14 दिन की रिमांड मांग सकती है CBI

सौरभ चंद्राकर की पेशी को इस मामले की जांच में अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई अदालत से 14 दिन की रिमांड मांग सकती है। जांच एजेंसी का फोकस सट्टा कारोबार के आर्थिक नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका पर रहेगा। सौरभ से यह जानने की कोशिश की जा सकती है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुटाई गई रकम किन-किन खातों में भेजी जाती थी, विदेशों में किस तरह निवेश किया जाता था और नेटवर्क को संचालित करने के लिए किन लोगों की मदद ली जाती थी। अब अदालत का आदेश और पूछताछ के दौरान सामने आने वाले तथ्य जांच की दिशा तय करेंगे।

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CM विष्णुदेव साय का बड़ा बयान, बोले- कई और लोग फंसेंगे

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सौरभ चंद्राकर को भारत लाने और सीबीआई की कार्रवाई को बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि मुख्य अभियुक्त को पकड़कर लाया गया है। सीबीआई की पूछताछ होगी तो कई और लोग फंसेंगे। मुख्यमंत्री के बयान ने महादेव सट्टा मामले में नए खुलासों की संभावना बढ़ा दी है। खासकर कथित प्रोटेक्शन मनी, आर्थिक लेन-देन और नेटवर्क को संरक्षण देने वालों की भूमिका को लेकर जांच एजेंसियों से उम्मीदें बढ़ गई हैं।

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कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर भी CM साय का हमला

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजनीतिक बयान देते हुए कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर लोकतंत्र को खतरा पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने स्वार्थ के लिए लोकतंत्र की हत्या की है। सीएम साय ने आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान गैर-कांग्रेसी नेताओं को जेल में डाला गया था। जनता द्वारा चुनी हुई सरकारों को कई बार बर्खास्त करने का काम भी कांग्रेस ने किया। उन्होंने कहा कि आज वही लोग लोकतंत्र की बात करते हैं तो यह हास्यास्पद लगता है। वोट चोरी और SIR को लेकर कांग्रेस के सवालों पर भी मुख्यमंत्री ने निशाना साधा। उनके मुताबिक, चुनाव में हारने के बाद मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाना कांग्रेस की राजनीति का हिस्सा बन गया है।

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प्रत्यर्पण के बाद CBI की कार्रवाई पर वकील ने उठाए सवाल

सौरभ चंद्राकर को भारत लाए जाने से पहले दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान उसके वकील ने ओमान की अदालत के आदेश का हवाला देते हुए सीबीआई की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। वकील की दलील थी कि भारत की ओर से ओमान को भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामले को मंजूरी मिली थी, जबकि सीबीआई के मामले को मंजूरी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि प्रत्यर्पण की शर्तों के अनुसार आरोपी पर उन्हीं मामलों में कार्रवाई हो सकती है, जिनके आधार पर उसे भारत लाया गया है। इसी आधार पर सीबीआई की ओर से रिमांड लेने की कार्रवाई को चुनौती दी गई।

CBI ने कहा- रायपुर की विशेष अदालत करेगी फैसला

सीबीआई की ओर से अदालत में कहा गया कि आरोपी के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत पहले ही ओपन एंडेड गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी थी। ओमान सरकार से मिली जानकारी और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर उसे भारत लाया गया है। जांच एजेंसी का कहना था कि ईडी और सीबीआई के मामले एक-दूसरे से जुड़े हैं। दिल्ली की अदालत के सामने फिलहाल ट्रांजिट रिमांड का सवाल था, जबकि प्रत्यर्पण की शर्तों और आगे की कार्रवाई से जुड़े कानूनी पहलुओं पर रायपुर की विशेष अदालत फैसला कर सकती है।

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6 हजार करोड़ का सट्टा घोटाला, कई राज्यों तक फैला नेटवर्क

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप का मामला करीब 6 हजार करोड़ रुपये के कथित सट्टा कारोबार से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों ने मिलकर महादेव बुक ऐप को प्रमोट किया था। आरोप है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म, वेबसाइट और पैनल बनाए गए थे। इन पैनलों के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और दूसरे खेलों पर ऑनलाइन दांव लगाया जाता था। नेटवर्क को फ्रेंचाइजी मॉडल की तरह संचालित करने का आरोप है। देश के अलग-अलग हिस्सों में पैनल और ब्रांच बनाकर लोगों को सट्टेबाजी से जोड़ा जाता था।

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बैंक खातों से लेकर हवाला तक, ऐसे चलता था पैसों का खेल

जांच एजेंसियों के अनुसार, सट्टेबाजी से प्राप्त रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद कई स्तरों पर लेन-देन कर पैसों को छिपाने और विदेशों तक पहुंचाने का आरोप है। सीबीआई की जांच में कथित तौर पर हवाला नेटवर्क के इस्तेमाल और सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत देकर कारोबार को निर्बाध चलाने की बात भी सामने आई है। अब सौरभ से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि इस पूरे नेटवर्क में आर्थिक लेन-देन की जिम्मेदारी किन लोगों के पास थी और विदेशों में पैसों का प्रबंधन किस तरह किया जाता था।

2022 की FIR से शुरू हुई जांच, 13 मामले CBI को सौंपे गए

महादेव सट्टा ऐप मामले की जांच छत्तीसगढ़ में दर्ज एफआईआर से आगे बढ़ी। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले से संबंधित 13 एफआईआर की जांच सीबीआई को सौंपी थीं। सीबीआई के मुताबिक, इन मामलों में सट्टेबाजी नेटवर्क के संचालन, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और कथित भ्रष्टाचार की जांच की जा रही है। इनमें से दो मामलों में चार्जशीट दाखिल किए जाने की जानकारी दी गई है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा है। ईडी ने सौरभ चंद्राकर और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल करने के साथ कई संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई भी की है।

116 दिन बाद ओमान से भारत लाया गया सौरभ चंद्राकर

सीबीआई की जानकारी के मुताबिक, महादेव सट्टा नेटवर्क की जांच शुरू होने के बाद सौरभ चंद्राकर विदेश में रह रहा था। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। जांच के दौरान उसके UAE से ओमान पहुंचने और कथित तौर पर फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल करने की जानकारी सामने आई। 8 जुलाई 2026 को ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद भारत सरकार की ओर से ओमान को प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक अनुरोध भेजा गया। भारतीय एजेंसियों, इंटरपोल और ओमान के अधिकारियों के बीच कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे भारत लाया गया। सीबीआई की टीम 1 नवंबर को मस्कट से उसे लेकर भारत पहुंची। इसके बाद दिल्ली की अदालत से ट्रांजिट रिमांड मिलने पर उसे रायपुर लाया गया।

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फर्जी पासपोर्ट से पहचान छिपाने का आरोप

सौरभ चंद्राकर की विदेश में गिरफ्तारी के बाद उसकी कथित फर्जी पहचान को लेकर भी चर्चा हुई थी। मीडिया रिपोर्टों में उसके पास कथित इंडोनेशियाई पासपोर्ट होने की जानकारी सामने आई थी। बताया गया था कि पासपोर्ट में उसकी तस्वीर मौजूद थी, लेकिन नाम ‘अजंता मेंडिस’ दर्ज था। जन्मतिथि भी अन्य दस्तावेजों से अलग बताई गई थी। हालांकि, इन दस्तावेजों से जुड़े आरोपों और उनकी प्रमाणिकता का अंतिम निर्धारण जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

ओमान में सौरभ ने जताई थी जान का खतरा होने की आशंका

भारत लाए जाने से पहले ओमान में हिरासत के दौरान सौरभ चंद्राकर ने भारत की जेल में अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई थी। उसने अपने परिवार की सुरक्षा की मांग भी की थी। उसका दावा था कि महादेव सट्टा नेटवर्क से जुड़े प्रभावशाली लोग उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उसने जांच के दौरान सुरक्षा देने और बिना किसी दबाव के अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की थी। उसने नेटवर्क से जुड़े लोगों से अलग रखे जाने की मांग भी की थी, ताकि जांच एजेंसियों के सामने स्वतंत्र रूप से बयान दे सके।

राजनीतिक कनेक्शन और प्रोटेक्शन मनी पर टिकी निगाहें

महादेव सट्टा ऐप मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये के कथित अवैध कारोबार को किन लोगों का संरक्षण प्राप्त था और इस नेटवर्क से होने वाली कमाई का हिस्सा कहां-कहां पहुंचता था। सौरभ चंद्राकर के भारत आने के बाद सीबीआई और ईडी की पूछताछ में इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के बयान के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक कनेक्शन को लेकर भी मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका या संलिप्तता का निर्धारण जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और अदालत के फैसले से ही होगा।

बैज बोले- कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुई थी कार्रवाई

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने महादेव सट्टा ऐप मामले में कार्रवाई का श्रेय कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को देते हुए कहा कि सौरभ चंद्राकर के खिलाफ कार्रवाई कांग्रेस शासनकाल में ही शुरू हुई थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय 70 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई थीं। कई गिरफ्तारियां हुई थीं और सट्टा ऐप पर कार्रवाई के लिए कानून भी बनाए गए थे। इस तरह सौरभ की गिरफ्तारी के बाद जहां भाजपा इसे जांच एजेंसियों की बड़ी सफलता बता रही है, वहीं कांग्रेस ने कार्रवाई की शुरुआत अपने शासनकाल में होने का दावा किया है।

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अब आगे क्या? CBI की पूछताछ में इन सवालों पर रहेगा फोकस

महादेव सट्टा ऐप से जुड़े पैसों का वास्तविक नेटवर्क क्या था?

सट्टेबाजी से जुटाई गई रकम किन बैंक खातों में पहुंचती थी?

विदेशों में संपत्तियां और निवेश किसके नाम पर किए गए?

कथित हवाला नेटवर्क का संचालन कौन करता था?

सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों की क्या भूमिका थी?

राजनीतिक संरक्षण और कथित प्रोटेक्शन मनी के आरोपों में कितनी सच्चाई है?

रवि उप्पल और अन्य फरार आरोपियों तक पहुंचने में कौन-सी जानकारी मिल सकती है?

सबसे बड़ा सवाल: क्या सौरभ चंद्राकर की पूछताछ से महादेव सट्टा ऐप के पूरे नेटवर्क और कथित संरक्षण देने वालों के नाम सामने आएंगे?

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...

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