पति की मौत के बाद पत्नी ने लिया अंगदान का फैसला, 6 अंगों से कई लोगों को मिलेगी नई जिंदगी

जबलपुर। पति को खोने का दुख किसी भी परिवार के लिए असहनीय होता है, लेकिन इसी मुश्किल घड़ी में पत्नी पूजा रजक ने साहसिक फैसला लेकर मानवता की मिसाल पेश की। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 40 वर्षीय नरेंद्र रजक को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद पत्नी और परिजनों ने उनके अंगदान की सहमति दी। नरेंद्र के अंगदान से कई जरूरतमंद लोगों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद जगी है। उनकी दो किडनी, दोनों आंखें, लिवर और त्वचा दान की गई। पूजा रजक ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी अंगदान का फैसला लेकर दूसरों को नया जीवन दिया जा सकता है। परिवार के इस निर्णय के बाद मंगलवार को नरेंद्र का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और परिवार के फैसले की सराहना की।
गार्ड ऑफ ऑनर देकर दी गई अंतिम विदाई, बनाई नरेंद्र वाटिका
अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बड़ेरिया मेट्रो प्राइम स्पेशलिटी हॉस्पिटल में नरेंद्र रजक को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान एडीएम रविशंकर राय, एसडीएम मदन रघुवंशी, गोहलपुर थाना प्रभारी रितेश पांडेय, अस्पताल प्रशासन, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने श्रद्धांजलि दी। हॉस्पिटल के डायरेक्टर सौरभ बड़ेरिया ने बताया कि नरेंद्र की स्मृति में अस्पताल परिसर में पौधरोपण कर 'नरेंद्र वाटिका' बनाई गई है।
2022 से डायलिसिस करा रहे मरीज को मिली नई जिंदगी
नरेंद्र की एक किडनी का नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में मंगलवार सुबह करीब 7 बजे सफल प्रत्यारोपण किया गया। शहडोल निवासी 40 वर्षीय नारायण (बदला हुआ नाम) वर्ष 2022 से डायलिसिस पर थे और मेडिकल कॉलेज में ही उपचार करा रहे थे। मेडिकल कॉलेज के डीन प्रो. डॉ. नवनीत सक्सेना ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट सफल रहा है और मरीज की हालत फिलहाल ठीक है। वहीं, दूसरी किडनी का प्रत्यारोपण मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल में एक महिला मरीज में किया गया।
ग्रीन कॉरिडोर बनाकर लिवर अहमदाबाद भेजा
जानकारी के अनुसार, 31 अक्टूबर को निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर नरेंद्र रजक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनका इलाज मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल में चल रहा था। चिकित्सकीय जांच के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया। इसके बाद परिजनों की सहमति से अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई। नरेंद्र की दोनों किडनी, आंखें, लिवर और त्वचा दान की गई। लिवर को रात में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अहमदाबाद के सीआईएमएस हॉस्पिटल भेजा गया, जबकि दोनों किडनी का प्रत्यारोपण जबलपुर में किया गया। आंखों और त्वचा का दान भी निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत किया गया। अस्पताल डायरेक्टर राजीव बड़ेरिया ने कहा कि अंगदान महादान है। एक व्यक्ति मृत्यु के बाद भी कई लोगों को नया जीवन देने का माध्यम बन सकता है। नरेंद्र के परिवार ने दुख की घड़ी में अंगदान का फैसला लेकर समाज के सामने मानवता की मिसाल पेश की है।




















