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अंतरिक्ष से भी डाल दिया अमेरिका चुनाव का वोट, जानिए कैसे काम करता है वहां का वोटिंग सिस्टम

अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने ISS से मिडटर्म चुनाव के लिए वोट डाला। जानिए सैटेलाइट के जरिए अंतरिक्ष से वोट अमेरिका के चुनाव अधिकारियों तक कैसे पहुंचता है।
अंतरिक्ष से भी डाल दिया अमेरिका चुनाव का वोट, जानिए कैसे काम करता है वहां का वोटिंग सिस्टम

धरती से करीब 400 किलोमीटर ऊपर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने मिडटर्म चुनाव के लिए वोट डाला। इसके लिए उन्हें किसी मतदान केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने अपने कमरे में रखे कंप्यूटर से इलेक्ट्रॉनिक बैलेट भरा और वोट टेक्सास के हैरिस काउंटी के चुनाव अधिकारियों तक पहुंच गया। जानिए, अंतरिक्ष से वोट डालने की यह पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है।

अमेरिका में चुनाव के दौरान एक ऐसी वोटिंग भी चर्चा में है, जो किसी मतदान केंद्र पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में हुई। अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में रहते हुए अपना वोट डाला। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर इसकी जानकारी दी। सवाल यह है कि जब कोई व्यक्ति अंतरिक्ष में हो, तो उसका वोट जमीन पर मौजूद चुनाव अधिकारियों तक कैसे पहुंचता है? क्या अंतरिक्ष में भी वोटिंग बूथ बनाया जाता है? दरअसल, अमेरिका में ऐसे नागरिकों के लिए पहले से एक व्यवस्था है, जो चुनाव के दिन अपने मतदान क्षेत्र से दूर होते हैं। अंतरिक्ष यात्री भी इसी व्यवस्था के तहत वोट डाल सकते हैं।

अंतरिक्ष यात्री का कमरा ही बना वोटिंग बूथ

अनिल मेनन इस समय इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर तैनात हैं। वह जुलाई में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान से अंतरिक्ष पहुंचे थे। उन्होंने अपने वीडियो में बताया कि ISS पर उनके कमरे में मौजूद कंप्यूटर की मदद से उन्होंने वोट डाला। इसके लिए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म भरा और अपना वोट अमेरिका के टेक्सास राज्य की हैरिस काउंटी के चुनाव अधिकारियों को भेज दिया। मेनन के साथ ISS पर मौजूद अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जेसिका वाटकिंस और ल्यूक डेलाने ने भी मतदान किया। ये दोनों पिछले महीने स्पेसएक्स के रॉकेट से अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे थे।

कैसे डाला जाता है अंतरिक्ष से वोट?

अमेरिका में जो नागरिक चुनाव के दिन अपने घर या मतदान क्षेत्र से दूर होते हैं, उनके लिए एबसेंटी बैलेट यानी अनुपस्थित मतदाता के रूप में वोट डालने की सुविधा है। इसका इस्तेमाल विदेश में रहने वाले अमेरिकी नागरिक और अंतरिक्ष यात्री भी कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले फेडरल पोस्ट कार्ड एप्लिकेशन (FPCA) भरना होता है। इसके जरिए मतदाता चुनाव अधिकारियों से एबसेंटी बैलेट की मांग करता है। इसके बाद उसे इलेक्ट्रॉनिक बैलेट दिया जाता है, जिसे भरकर वोट किया जा सकता है। अंतरिक्ष यात्री भी ISS पर मौजूद कंप्यूटर के जरिए यही प्रक्रिया अपनाते हैं। वे अपना इलेक्ट्रॉनिक बैलेट भरते हैं और फिर उसे धरती पर भेज दिया जाता है।

सैटेलाइट के जरिए चुनाव अधिकारियों तक पहुंचता है वोट

अब सवाल है कि अंतरिक्ष से भेजा गया वोट धरती तक कैसे पहुंचता है? नासा के मुताबिक, इसके लिए ट्रैकिंग एंड डाटा रिले सैटेलाइट सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है।

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इसकी प्रक्रिया कुछ इस तरह है...
1. सबसे पहले अंतरिक्ष यात्री ISS पर मौजूद कंप्यूटर से अपना इलेक्ट्रॉनिक बैलेट भरता है।
2. इसके बाद बैलेट नासा के सैटेलाइट सिस्टम के जरिए धरती पर मौजूद ग्राउंड एंटीना तक पहुंचता है।
3. ग्राउंड एंटीना से इसे टेक्सास के ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर भेजा जाता है।
4. मिशन कंट्रोल सेंटर से बैलेट संबंधित काउंटी के चुनाव अधिकारी यानी काउंटी क्लर्क तक पहुंचाया जाता है।
5. इसके बाद चुनाव अधिकारी उस वोट को चुनाव प्रक्रिया में शामिल करते हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में वोट की गोपनीयता का भी ध्यान रखा जाता है। इलेक्ट्रॉनिक बैलेट को एन्क्रिप्ट किया जाता है। आसान भाषा में समझें तो इसे डिजिटल सुरक्षा के जरिए सुरक्षित रखा जाता है, ताकि इसे केवल संबंधित अंतरिक्ष यात्री और काउंटी क्लर्क ही एक्सेस कर सकें।

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1997 से अंतरिक्ष में वोट डाल रहे अमेरिकी एस्ट्रोनॉट

अंतरिक्ष से वोट डालने की व्यवस्था नई नहीं है। अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री साल 1997 से अंतरिक्ष में रहते हुए मतदान कर रहे हैं। दरअसल, 1997 में टेक्सास की विधायिका ने एक कानून पास किया था। इसके बाद नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा में रहते हुए भी अमेरिकी चुनावों में वोट डालने की अनुमति मिल गई। अंतरिक्ष से वोट डालने वाले पहले अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री डेविड वुल्फ थे। उन्होंने रूस के मीर स्पेस स्टेशन पर रहते हुए मतदान किया था। साल 2016 में द अटलांटिक को दिए एक इंटरव्यू में वुल्फ ने अपना अनुभव साझा किया था। उन्होंने बताया था कि अंतरिक्ष में वह अकेले वोट डाल रहे थे। उनके आसपास अंग्रेजी बोलने वाला कोई दूसरा व्यक्ति भी नहीं था। ऐसे में चुनाव का बैलेट मिलना और वोट डालना उन्हें अपने देश से जुड़ाव महसूस कराने वाला अनुभव था। इस तरह अमेरिका में मतदान के लिए किसी नागरिक का चुनाव के दिन अपने शहर या देश में मौजूद होना जरूरी नहीं है। यहां तक कि अगर कोई अमेरिकी नागरिक अंतरिक्ष में भी है, तो उसके लिए वोट डालने की व्यवस्था मौजूद है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

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