शराब छोड़ने की जल्दबाजी पड़ सकती है भारी, जानिए डॉक्टर की चेतावनी!

शराब पीने की आदत से छुटकारा पाना आसान नहीं होता। कई बार परिवार के लोग किसी अपने को शराब से दूर करने के लिए घर में रखी सभी बोतलें हटा देते हैं और अचानक शराब बंद करवा देते हैं। लेकिन ऐसा करना हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं है। लंबे समय से शराब पी रहे लोगों का शरीर इसकी आदत डाल लेता है। ऐसे में अचानक शराब बंद करने से शरीर और दिमाग पर बुरा असर पड़ सकता है। मनोचिकित्सक और एथेना बिहेवियरल हेल्थ की संस्थापक डॉ. श्रद्धा मलिक ने इस बारे में जरूरी जानकारी साझा की है।
अचानक शराब छोड़ना क्यों हो सकता है खतरनाक?
डॉ. श्रद्धा मलिक के अनुसार, जो लोग लंबे समय से ज्यादा मात्रा में शराब पीते हैं, उनके शरीर को इसकी आदत हो जाती है। ऐसे में अचानक शराब बंद करने पर शरीर में कई बदलाव होने लगते हैं। इसका असर दिमाग और नसों पर भी पड़ता है। शुरुआत में हाथ कांपना, पसीना आना, घबराहट, उल्टी, सिरदर्द और नींद न आने जैसी परेशानी हो सकती है। कुछ लोगों में यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है।
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दौरे और भ्रम जैसी परेशानी का रहता है खतरा
शराब छोड़ने के बाद कुछ लोगों को गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। डॉक्टर के मुताबिक, आखिरी बार शराब पीने के 8 से 48 घंटे के अंदर कुछ लोगों को दौरे पड़ सकते हैं। वहीं, 48 से 96 घंटे के बीच डिलीरियम ट्रेमेन्स नाम की गंभीर स्थिति सामने आ सकती है। इसमें मरीज को तेज बुखार, बहुत ज्यादा घबराहट, भ्रम और ऐसी चीजें दिखाई या सुनाई दे सकती हैं, जो असल में मौजूद नहीं होतीं। दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर भी बिगड़ सकता है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
अगर शराब छोड़ने के बाद किसी व्यक्ति को दौरे पड़ें, तेज बुखार आए, बहुत ज्यादा उलझन हो या वह ऐसी चीजें देखने लगे जो वहां मौजूद नहीं हैं, तो तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। दिल की धड़कन तेज होना, लगातार उल्टी और बेहोशी जैसी परेशानी भी खतरे का संकेत हो सकती है। परिवार को यह नहीं सोचना चाहिए कि कुछ समय बाद सब ठीक हो जाएगा। ऐसी हालत में घरेलू नुस्खों या अपनी मर्जी से दवा देने के बजाय डॉक्टर की मदद लेना जरूरी है।
डॉक्टर की देखरेख में इलाज क्यों जरूरी?
शराब की लत से जूझ रहे हर व्यक्ति का इलाज एक जैसा नहीं होता। डॉक्टर पहले मरीज की हालत, शराब पीने की मात्रा और पुरानी बीमारियों के बारे में जानकारी लेते हैं। जरूरत पड़ने पर अस्पताल में दवाओं के साथ इलाज किया जाता है। मरीज को शरीर में पानी और जरूरी पोषक तत्वों की कमी से बचाने के लिए भी इलाज दिया जाता है। इससे शराब छोड़ने के दौरान होने वाली गंभीर परेशानियों का खतरा कम करने में मदद मिलती है।
सिर्फ शराब छोड़ना काफी नहीं, इलाज भी जरूरी
डॉ. श्रद्धा मलिक का कहना है कि शराब छोड़ने के बाद भी मरीज को लगातार मदद की जरूरत होती है। इसके लिए काउंसलिंग, परिवार का साथ और सही इलाज जरूरी है। एथेना बिहेवियरल हेल्थ में इलाज के दौरान मरीज को पहले मेडिकल देखरेख में शराब छोड़ने में मदद दी जाती है। इसके बाद जरूरत के अनुसार रहने की सुविधा के साथ इलाज, थेरेपी और नियमित डॉक्टर की सलाह दी जाती है। धीरे-धीरे मरीज को सामान्य जिंदगी में लौटने के लिए तैयार किया जाता है।
परिवार का साथ बना सकता है बड़ी ताकत
शराब की लत को सिर्फ बुरी आदत या इच्छाशक्ति की कमी समझना सही नहीं है। परिवार को मरीज को डांटने या शर्मिंदा करने के बजाय उसका साथ देना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति शराब छोड़ना चाहता है, तो सबसे पहले उसे डॉक्टर या नशे की लत के इलाज के जानकार से मिलवाना चाहिए। सही इलाज और परिवार के सहयोग से इस लत से बाहर निकलना संभव है। सबसे जरूरी बात यह है कि शराब छोड़ने का फैसला सुरक्षित तरीके से लिया जाए।




















