किडनी मरीजों के लिए राहत, भोपाल के हमीदिया अस्पताल में छह महीने बाद फिर शुरू होंगे ट्रांसप्लांट

भोपाल। किडनी ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे मरीजों के लिए हमीदिया अस्पताल से राहत की खबर है। यहां करीब 6 माह बाद फिर से किडनी ट्रांसप्लांट शुरू हो जाएंगे। दरअसल ट्रांसप्लांट के लिए सबसे जरूरी जांच एचएलए टाइपिंग और क्रॉस-मैचिंग के लिए नई कंपनी से एमओयू हो चुका है, जल्द ही कागजी कार्रवाई पूरी हो जाएगी । इसके बाद ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया एक बार फिर शुरू हो जाएगी। मालूम हो कि अब तक यह जांच लाल पैथ लैब के द्वारा किया जाता था, लेकिन करार अवधि पूरी होने के बाद कंपनी ने करार आगे बढ़ाने से मना कर दिया था। इसके बाद नई कंपनी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी। अब न्यूबर्ग कंपनी एचएलए मैचिंग का काम करेगी। अगर सबकुछ ठीक रहा तो अगले सप्ताह ट्रांसप्लांट हो सकता है।
इंदौर में 150 से ज्यादा बोनमैरो ट्रांसप्लांट
यही नहीं इस कंपनी के आने के बाद किडनी के साथ बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी जल्द शुरू हो सकता है। दोनों ट्रांसप्लांट में एचएलए मैचिंग सबसे महत्वपूर्ण होता है। मालूम हो कि प्रदेश में सिर्फ इंदौर में ही सरकारी बोनमैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा है। वहां अब तक 150 से ज्यादा बोनमैरो ट्रांसप्लांट हो चुके हैं।
तैयार हो रहे दो विशेष ट्रांसप्लांट यूनिट
ट्रांसप्लांट के लिए हमीदिया अस्पताल में विशेष ट्रांसप्लांट यूनिट तैयार की जा रही हैं। बोनमैरो ट्रांसप्लांट के लिए एच-1 ब्लाक की चौथी मंजिल पर 12 कमरों की स्वीकृति भी मिल गई है। जिसमें मरीजों के लिए 24 बिस्तर का वार्ड तैयार हो चुका है। इस यूनिट को जमाने के लिए प्रबंधन को करीब 16 करोड़ खर्च करने होंगे। निजी अस्पतालों में बोनमैरो प्रत्यारापेण पर करीब 24 लाख तक खर्च आता है। यहां करीब पांच लाख तक आएगा। वहीं पुरानी ट्रॉमा बिल्डिंग के तीसरे और चौथे माले पर ट्रांसप्लांट यूनिट तैयार की जा रही है, जिसमें किडनी ट्रांसप्लांट के साथ अन्य ट्रांसप्लांट किए जाएंगे।
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तीन मरीज वेटिंग में, अगले सप्ताह किडनी ट्रांसप्लांट
हमीदिया अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक किडनी ट्रांसप्लांट के लिए अभी तीन मरीज वेटिंग में है। डॉक्टरों के मुताबिक एक मरीज ट्रांसप्लांट के लिए तैयार था, लेकिन डोनर को बुखार आने के बाद ट्रांसप्लांट को पोस्टपोन कर दिया गया था। अब तीन अन्य मरीजों की जांच की जा रही है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो एम सप्ताह में ट्रासप्लांट हो जाएगा।
HLA टाइपिंग और क्रॉस-मैचिंग क्यों जरूरी
किडनी ट्रांसप्लांट से पहले डोनर और मरीज के बीच अनुकूलता जांचने के लिए एचएलए टाइपिंग और क्रॉस-मैचिंग की जाती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि मरीज का शरीर प्रत्यारोपित किडनी को स्वीकार करने की कितनी संभावना रखता है। यह जांच ट्रांसप्लांट की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बोनमैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा जल्द शुरु होगी
गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल की डीन डॉ. कविता एन. सिंह का कहना है कि ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी जांच के लिए कंपनी से करार का प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही बोनमैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी शुरू होगी।




















