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Google का बड़ा अंतरिक्ष प्रयोग सफल, सैटेलाइट पर AI मॉडल चलाकर पृथ्वी पर मिला पहला रिस्पॉन्स

Google के Project Suncatcher ने अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग की दिशा में अहम उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने सैटेलाइट पर TPU के जरिए AI मॉडल चलाकर पहला पूरा जवाब प्राप्त किया। अब 2027 में दो आपस में जुड़े सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी है।
Google का बड़ा अंतरिक्ष प्रयोग सफल, सैटेलाइट पर AI मॉडल चलाकर पृथ्वी पर मिला पहला रिस्पॉन्स
फाइल फोटो।

न्यूयॉर्क। टेक्नोलॉजी की दुनिया में Google ने एक नई उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल सफलतापूर्वक चलाया है और उससे पृथ्वी पर पहला पूरा जवाब भी प्राप्त किया है। यह सफलता Google के महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट सनकैचर' (Project Suncatcher) का अहम हिस्सा है। इस परियोजना के जरिए कंपनी अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की संभावनाओं पर काम कर रही है।

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Project Suncatcher का 'हेलो वर्ल्ड' माइलस्टोन बताया

Google के CEO सुंदर पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस उपलब्धि की जानकारी शेयर की। उन्होंने इसे Project Suncatcher का 'हेलो वर्ल्ड' माइलस्टोन बताया। पिचाई के मुताबिक, टीम ने अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट को कमांड भेजा, उसके टेन्सर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) को सक्रिय किया और एक AI प्रॉम्प्ट चलाया। इसके बाद सैटेलाइट से पृथ्वी पर पहला पूरा रिस्पॉन्स प्राप्त हुआ। सुंदर पिचाई ने अपनी पोस्ट में लिखा, "कुछ हफ्ते पहले अपना प्रोटोटाइप सैटेलाइट लॉन्च करने के बाद, अब हमने सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट को कमांड भेजा, TPU को चालू किया, प्रॉम्प्ट रन किया और पृथ्वी पर अपना पहला पूरा रिस्पॉन्स प्राप्त किया - जो कि एक 'हाइकु' (Haiku) है!"

1 अक्टूबर को लॉन्च हुआ था Google का प्रोटोटाइप सैटेलाइट

Google के आधिकारिक ब्लॉग के अनुसार इस प्रयोग के लिए प्रोटोटाइप सैटेलाइट को 1 अक्टूबर को लॉन्च किया गया था। यह कंपनी के लंबे समय से चल रहे रिसर्च प्रोग्राम का हिस्सा है। इसके तहत वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या अंतरिक्ष में बड़े स्तर पर मशीन लर्निंग (Machine Learning) से जुडे कंप्यूटिंग सिस्टम संचालित किए जा सकते हैं। लॉन्च के बाद शुरुआती कुछ हफ्तों में सैटेलाइट की कमीशनिंग प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान इसके होस्ट सिस्टम और TPU ट्रे को सक्रिय किया गया। साथ ही, शुरुआती मशीन लर्निंग परीक्षण भी किए गए, ताकि अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग की कार्यक्षमता का आकलन किया जा सके।

अंतरिक्ष में AI मॉडल ने लिखी हाइकु कविता

इस प्रयोग के दौरान Google की टीम ने सैटेलाइट के ऑनबोर्ड Gemma 4 ओपन AI मॉडल का इस्तेमाल किया। ग्राउंड स्टेशन के संपर्क क्षेत्र से गुजरते समय मॉडल को अंतरिक्ष के विषय पर एक हाइकु कविता लिखने का निर्देश दिया गया। सैटेलाइट ने इस निर्देश का जवाब तैयार किया और पृथ्वी पर भेजा। खास बात यह रही कि यह जवाब उस समय प्राप्त हुआ, जब सैटेलाइट नॉर्वे के स्वालबार्ड क्षेत्र के ऊपर से गुजर रहा था।

कई परीक्षणों से गुजरा सिस्टम

इसके बाद Google ने AI सिस्टम की क्षमताओं को परखने के लिए कुछ और परीक्षण किए। इनमें अंतरिक्ष से जुडी छोटी लिमरिक कविताएं लिखवाना और सैटेलाइट के तकनीकी सिस्टम की स्थिति की जानकारी देने वाले प्रॉम्प्ट शामिल थे। इन प्रयोगों का उद्देश्य केवल AI मॉडल से जवाब प्राप्त करना नहीं था, बल्कि यह जांचना भी था कि अंतरिक्ष में मौजूद कंप्यूटिंग हार्डवेयर किस तरह अलग-अलग निर्देशों को प्रोसेस कर सकता है।

अब अंतरिक्ष में TPU की मजबूती और कार्यक्षमता की होगी जांच

Google के Project Suncatcher का अगला चरण हार्डवेयर की विश्वसनीयता से जुडा है। कंपनी अब यह जांच करेगी कि अंतरिक्ष में मौजूद TPU चिप्स अत्यधिक तापमान में बदलाव और विकिरण (Radiation) के संपर्क में आने पर किस तरह काम करते हैं। अंतरिक्ष में कंप्यूटिंग उपकरणों को पृथ्वी की तुलना में अलग और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पडता है। ऐसे में यह परीक्षण महत्वपूर्ण होगा कि क्या Google के TPU लंबे समय तक इन परिस्थितियों में AI से जुडे काम भरोसेमंद तरीके से कर सकते हैं। कंपनी के अनुसार, मौजूदा परीक्षण सफल रहने पर अगली बड़ी उपलब्धि की दिशा में काम आगे बढेगा। इसके तहत 2027 में दो आपस में जुडे सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना है।

Project Suncatcher के जरिए अंतरिक्ष में बनेगा AI कंप्यूटिंग नेटवर्क

Google का दीर्घकालिक लक्ष्य यह पता लगाना है कि क्या कई सैटेलाइट को एक नेटवर्क या तारामंडल (Satellite Constellation) के रूप में जोडकर बडे AI वर्कलोड को प्रोसेस किया जा सकता है। कंपनी का मानना है कि पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में मौजूद सैटेलाइट को लगभग लगातार सूर्य की रोशनी मिल सकती है। Google के मुताबिक, ऐसे सैटेलाइट पृथ्वी पर उपलब्ध परिस्थितियों की तुलना में आठ गुना अधिक सौर ऊर्जा उत्पन्न करने में सक्षम हो सकते हैं। इस ऊर्जा का इस्तेमाल भविष्य में अंतरिक्ष आधारित AI कंप्यूटिंग सिस्टम को संचालित करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए सैटेलाइट के बीच बेहतर कनेक्टिविटी, भरोसेमंद हार्डवेयर और कठिन अंतरिक्ष परिस्थितियों में लगातार काम करने की क्षमता जरूरी होगी।

अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर की दिशा में Google की पहल

Google ने Project Suncatcher की घोषणा के समय ही स्पष्ट किया था कि शुरुआती सैटेलाइट मिशन का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि कंपनी के TPU अंतरिक्ष के वातावरण में सुरक्षित रहकर काम कर सकते हैं या नहीं। अब सैटेलाइट पर AI मॉडल चलाकर पृथ्वी पर पूरा जवाब प्राप्त करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले परीक्षण यह तय करने में मदद करेंगे कि क्या भविष्य में अंतरिक्ष में बडे स्तर पर AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना व्यावहारिक होगा। यदि यह तकनीक सफल होती है तो भविष्य में सैटेलाइट के नेटवर्क के जरिए अंतरिक्ष में ही AI से जुडे कई कंप्यूटिंग कार्य किए जा सकेंगे। फिलहाल Google का ध्यान इस तकनीक की विश्वसनीयता और इसकी व्यावहारिक संभावनाओं को साबित करने पर है।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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