घंसौर में रेलवे भूमि अधिग्रहण विवाद: ग्रामीणों के बीच पहुंचे जिला प्रशासन, सांसद और विधायक, मकान टूटने पर जताई नाराजगी

जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर घंसौर में रेलवे दोहरीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण का मामला गरमा गया है। वर्षों पुराने मकानों को तोड़े जाने की आशंका को लेकर ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराते हुए प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर अंजू अरुण कुमार, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और कांग्रेस विधायक ठाकुर रजनीश सिंह घंसौर पहुंचे।
सांसद ने रेलवे अधिकारियों से ली जानकारी
इस दौरान जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन ने रेलवे ट्रैक के आसपास के क्षेत्र का भ्रमण किया तथा रेलवे अधिकारियों से चर्चा कर भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों की जानकारी ली। सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि बैठक में रेलवे से संबंधित विषयों पर चर्चा की गई है।
ग्रामीणों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए
जिला कलेक्टर अंजू अरुण कुमार ने कहा कि पूरा मामला उनके संज्ञान में है। प्रशासन की ओर से जो भी संभव प्रयास होंगे, किए जाएंगे दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक ठाकुर रजनीश सिंह ने वर्षों पुराने मकानों को विकास के नाम पर तोड़े जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर कांग्रेस ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी।
अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन और रेलवे के बीच चर्चा से उनकी समस्याओं का उचित समाधान निकल सकेगा।
इससे पहले रेलवे दोहरीकरण के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर घंसौर क्षेत्र के करीब 300 ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा था। ग्रामीणों ने मांग की कि रेलवे निर्माण के लिए खाली जमीन का उपयोग किया जाए, ताकि आबादी क्षेत्र की भूमि और वहां रहने वाले परिवारों पर असर कम हो सके।
घंसौर में रेलवे दोहरीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध, 300 ग्रामीणों ने SDM को सौंपा ज्ञापन
करीब 500 परिवारों के प्रभावित होने की आशंका
ग्रामीणों के अनुसार, रेलवे दोहरीकरण परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण होने से क्षेत्र के करीब 500 परिवार प्रभावित हो सकते हैं। इसी आशंका को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट हुए और प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखीं।
ग्रामीणों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से रिहायशी क्षेत्र की जमीन प्रभावित होने पर कई परिवारों के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है। इसी वजह से उन्होंने प्रस्तावित अधिग्रहण पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
खाली जमीन के उपयोग की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि रेलवे दोहरीकरण क्षेत्र के विकास और रेल सुविधाओं के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि निर्माण कार्य की योजना बनाते समय आबादी वाले क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि रेलवे लाइन के निर्माण के लिए उपलब्ध खाली भूमि के उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया जाए, जिससे रिहायशी जमीन का अधिग्रहण कम से कम करना पड़े।
प्रशासन से उचित समाधान निकालने की अपील
ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने प्रशासन से भूमि अधिग्रहण से जुड़े प्रस्ताव पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने और प्रभावित परिवारों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने का आग्रह किया।




















