अलास्का एयर ग्रुप में 200 कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान, CEO बोले- इस साल 700 मिलियन डॉलर तक का नुकसान संभव

बढ़ते खर्चों और मुनाफे पर दबाव के बीच अमेरिकी एयरलाइन कंपनी अलास्का एयर ग्रुप ने करीब 200 कर्मचारियों की छंटनी करने का ऐलान किया है। कंपनी के CEO बेन मिनिकुची के मुताबिक, मौजूदा वित्तीय परिस्थितियां बनी रहीं तो एयरलाइन को इस साल 700 मिलियन डॉलर तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि छंटनी नॉन-कॉन्ट्रैक्ट स्तर के पदों पर होगी और इससे फ्रंटलाइन या नॉन-मैनेजमेंट कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित नहीं होंगी। मिनिकुची ने कर्मचारियों को भेजे गए एक मेमो में कहा कि अगर मौजूदा हालात जारी रहे तो महामारी के दौर को छोड़कर वर्ष 2003 के बाद यह कंपनी का पहला एडजस्टेड प्री-टैक्स घाटा होगा।
कुल 32,500 कर्मचारियों में से 1% से भी कम होंगे प्रभावित
कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार इस फैसले से अलास्का एयर ग्रुप के कुल 32,500 कर्मचारियों में से 1% से भी कम प्रभावित होंगे। छंटनी के दायरे में आने वाले पदों में वॉशिंगटन राज्य के 125 और हवाई के 48 पद शामिल हैं। कंपनी ने साफ किया है कि किसी भी फ्रंटलाइन कर्मचारी या नॉन-मैनेजमेंट स्टाफ की नौकरी नहीं जाएगी। प्रभावित कर्मचारियों के लिए 13 नवंबर आखिरी कार्यदिवस होगा। हालांकि कंपनी 31 दिसंबर तक उन्हें नियमित वेतन देती रहेगी। इसके अलावा कर्मचारियों को सेवरेंस पे यानी नौकरी समाप्त होने पर मिलने वाला भुगतान और अन्य वित्तीय सहायता के साथ करियर सपोर्ट भी उपलब्ध कराया जाएगा।
बढ़ते फ्यूल खर्च और वैश्विक तनाव से दबाव
एविएशन सेक्टर में ईंधन की बढ़ती कीमतें और दुनियाभर में जारी तनाव एयरलाइंस की लागत बढ़ा रहे हैं। इसका असर अलास्का एयर ग्रुप की वित्तीय स्थिति पर भी पड़ रहा है। कंपनी प्रीमियम और इंटरनेशनल ट्रैवल सेगमेंट में अपना कारोबार बढ़ा रही है लेकिन रेवेन्यू में वृद्धि के बावजूद क्रूड ऑयल और एविएशन फ्यूल की ऊंची कीमतों से कमाई पर दबाव बना हुआ है। कंपनी के सामने एक ओर कारोबार के विस्तार की चुनौती है, तो दूसरी ओर बढ़ते परिचालन खर्चों को नियंत्रित करने की जरूरत है।
एअर इंडिया की सऊदी अरब जाने वाली उड़ानें रद्द, यात्रियों को टिकट की तारीख बदलने का विकल्प
रेवेन्यू के मुकाबले तेजी से बढ़े ओवरहेड खर्च
CEO बेन मिनिकुची ने कर्मचारियों से कहा कि कंपनी को फिर से उसी वित्तीय अनुशासन की ओर लौटना होगा, जो लंबे समय से उसकी ताकत रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कंपनी के ओवरहेड खर्च रेवेन्यू की तुलना में कहीं तेजी से बढ़े हैं। उनके मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों में लागत पर नियंत्रण और खर्चों की समीक्षा जरूरी हो गई है। कंपनी का लक्ष्य वित्तीय अनुशासन मजबूत करना और कारोबार को टिकाऊ स्थिति में लाना है।




















