संसद में गूंजी Gen-Z की भाषा!कुचू-पुचू, Delulu, FOMO, Clock It और The System Is Cooked... आखिर क्या है इन वायरल शब्दों का मतलब?

लोकसभा में 28 जुलाई 2026 को सार्वजनिक परीक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 यानी एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा हुई। यह बहस सिर्फ परीक्षा सुधार और पेपर लीक रोकने के कानून तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस दौरान संसद में पहली बार Gen-Z (जेनरेशन Z) की भाषा भी सुनाई दी। बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जो अब तक केवल इंस्टाग्राम रील्स, मीम्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और सोशल मीडिया पर देखने को मिलते थे। इनमें 'कुचू-पुचू', 'वास्तेगुना हुइंया', 'डेलूलू', 'FOMO', 'MIA' और 'Clock It' जैसे शब्द शामिल रहे।
इन शब्दों के इस्तेमाल ने संसद की बहस को अलग रंग दे दिया। कई सांसदों ने एक-दूसरे पर तंज कसने के लिए इन इंटरनेट स्लैंग्स का सहारा लिया, जबकि कई लोगों के लिए ये शब्द बिल्कुल नए थे।
आखिर संसद में Gen-Z की भाषा क्यों पहुंची?
पिछले कुछ महीनों में देशभर में पेपर लीक के खिलाफ छात्रों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों में पारंपरिक नारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर वायरल मीम्स और इंटरनेट स्लैंग्स का भी खूब इस्तेमाल हुआ। राजनीतिक दलों ने महसूस किया कि देश की युवा आबादी आज सोशल मीडिया की भाषा को ज्यादा समझती है। यही वजह रही कि एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान नेताओं ने भी युवाओं की भाषा बोलने की कोशिश की।
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'कुचू-पुचू' क्या है? क्यों अचानक संसद में गूंजा?
बहस के दौरान कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सबसे पहले 'कुचू-पुचू' शब्द का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र शिक्षा मंत्री से मजाकिया लेकिन तीखे अंदाज में इस्तीफा मांग रहे थे। छात्र नारे लगा रहे थे- कुचू-पुचू इस्तीफा दे दो, आज हमारा जन्मदिन है।
आसान भाषा में समझें
'कुचू-पुचू' कोई राजनीतिक शब्द नहीं है। यह सोशल मीडिया पर इस्तेमाल होने वाला क्यूट (Cute) और लाड़-प्यार वाला एक्सप्रेशन है। आमतौर पर इसका इस्तेमाल छोटे बच्चों को पुचकारने में, प्यार जताने में और मजाकिया अंदाज में बात करने में किया जाता है। लेकिन छात्रों ने इसी शब्द को विरोध का नया तरीका बना दिया। यानी गुस्सा भी दिखाया और व्यंग्य भी किया। दीपेंद्र हुड्डा ने इसी उदाहरण के जरिए सरकार पर निशाना साधा कि आज का युवा विरोध भी नए अंदाज में करता है।
'वास्तेगुना हुइंया' आखिर है क्या?
संसद में सबसे ज्यादा चर्चा जिस दूसरे शब्द की हुई, वह था वास्तेगुना हुइंया यह शब्द किसी डिक्शनरी का हिस्सा नहीं है। दरअसल यह सोशल मीडिया, खासकर Instagram Reels पर वायरल हुए एक फनी ऑडियो और उससे जुड़े एक्सप्रेशन से लोकप्रिय हुआ। आज इंटरनेट पर लोग इसका इस्तेमाल- किसी को मजाक में चिढ़ाने, किसी दावे का मजाक उड़ाने, ड्रामेटिक रिएक्शन देने, किसी बात को हल्के अंदाज में खारिज करने के लिए करते हैं। दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने संसद में कहा कि आज के युवा जहां इंकलाब जिंदाबाद जैसे नारे लगाते हैं, वहीं सरकार के दावों पर चुटकी लेने के लिए वास्तेगुना हुइंया भी बोलते हैं।
'वास्तेगुना हुइंया' की शुरुआत कैसे हुई?
'वास्तेगुना हुइंया' कोई आधिकारिक शब्द नहीं है, बल्कि यह सोशल मीडिया से निकला एक वायरल इंटरनेट एक्सप्रेशन है। इसकी जड़ें साल 2015 के लोकप्रिय शॉर्ट वीडियो ऐप Vine से जुड़ी मानी जाती हैं। उस समय एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें एक लड़का जोर से Can I get a Hoya? बोलता है। उसके बोलने का अंदाज इतना अलग और मजेदार था कि कई लोगों को यह सुनने में वास्तेगुना हुइंया जैसा लगा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में सत्ता पक्ष के नेताओं से कहा अगर इसका मतलब नहीं समझ आता तो घर जाकर गूगल कर लीजिए। इस टिप्पणी पर सदन में हंसी भी देखने को मिली।
'डेलूलू' का मतलब क्या होता है?
एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए 'Delulu' शब्द का इस्तेमाल किया। आसान भाषा में Delulu- Delusional यानी भ्रम में रहना या हकीकत से दूर अपनी कल्पना में जीना। तेजस्वी सूर्या ने कहा कि विपक्ष यह सोच रहा है कि पूरा युवा वर्ग उसके साथ है, जबकि यह सबसे बड़ा डलूलू है।
FOMO क्या है?
यह शब्द भी संसद में सुनाई दिया। FOMO का पूरा मतलब है- Fear Of Missing Out यानी किसी चीज में पीछे छूट जाने का डर। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने की होड़ इसलिए लगी क्योंकि विपक्ष को FOMO हो गया था। मतलब उन्हें डर था कि अगर वे प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए तो राजनीतिक रूप से पीछे रह जाएंगे।
MIA का मतलब क्या है?
MIA- Missing In Action इसका सीधा मतलब होता है गायब हो जाना या किसी जगह मौजूद न होना। बहस के दौरान विपक्ष के कुछ दिनों तक छात्र आंदोलनों से दूर रहने पर इस शब्द का इस्तेमाल किया गया।
Clock It क्या होता है?
यह शब्द सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय है। Gen-Z भाषा में Clock It का मतलब होता है आपने बिल्कुल सही बात पकड़ ली। आपने सटीक जवाब दिया। आपने कमाल कर दिया। आपने बिल्कुल सही पहचान लिया। बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने परीक्षा सुधारों का जिक्र करते हुए कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे Clock It किया। यानी उन्होंने सही समय पर सही कदम उठाया।
फ्लेक्स (Flex) का भी हुआ इस्तेमाल
बहस के दौरान एक और शब्द सुनाई दिया Flex Gen-Z भाषा में इसका मतलब होता है- अपनी उपलब्धियों का खूब बखान करना या अपनी सफलता दिखाना। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा सुधारों पर जितने कदम गिना रही है, वह केवल फ्लेक्स कर रही है।
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दोनों क्यों बोल रहे थे Gen-Z की भाषा?
इस बहस में एक बात साफ दिखाई दी। सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष भी लगातार सोशल मीडिया की भाषा बोल रहा था। दोनों पक्षों की कोशिश थी कि वे यह संदेश दें कि- वे युवाओं की सोच समझते हैं। वे इंटरनेट कल्चर से जुड़े हुए हैं। वे नई पीढ़ी की भाषा बोल सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत में करोड़ों पहली बार वोट डालने वाले युवा हैं। इसलिए अब नेताओं की भाषा भी बदल रही है।
प्रियंका गांधी ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि केवल सोशल मीडिया के वीडियो बनाकर या नए-नए कैमरा एंगल दिखाकर युवाओं का भरोसा नहीं जीता जा सकता। उन्होंने कहा- अगर जेन Z का भरोसा जीतना है तो कैमरे का एंगल नहीं, दिल का एंगल बदलना पड़ेगा। प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी जागरूक है और झूठ को पहचानने की क्षमता रखती है।
संसद की भाषा बदल रही है
कुछ साल पहले तक संसद में बहस के दौरान केवल राजनीतिक और कानूनी शब्द सुनाई देते थे। लेकिन अब सोशल मीडिया, इंटरनेट मीम्स और वायरल स्लैंग्स भी संसद की चर्चा का हिस्सा बनने लगे हैं।
'The System Is Cooked' कैसे बने युवाओं की आवाज?
हाल के छात्र आंदोलनों में इस शब्द के साथ एक और Gen-Z स्लैंग The System Is Cooked भी खूब चर्चा में रहा। Gen-Z की भाषा में Cooked का मतलब होता है कि कोई सिस्टम, स्थिति या व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है, फेल हो गई है या अब उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे कई छात्रों ने यह स्लैंग इस्तेमाल करते हुए परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि The System Is Cooked, यानी पूरी व्यवस्था फेल हो चुकी है।
Gen-Z की भाषा राजनीति का नया हथियार
सोशल मीडिया आज राजनीति का बड़ा मंच बन चुका है। नेताओं के भाषण अब सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहते, बल्कि कुछ ही मिनटों में इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), यूट्यूब और फेसबुक पर वायरल हो जाते हैं। ऐसे में छोटे, मजेदार और याद रहने वाले शब्द तेजी से लोगों तक पहुंचते हैं। यही कारण है कि राजनीतिक दल अब युवाओं से जुड़ने के लिए उनकी भाषा और इंटरनेट कल्चर का सहारा ले रहे हैं।











