इंदौर में पुराने पेड़ों की सुध लेगा निगम, किया जाएगा सर्वे, विशेषज्ञ समिति मजबूती का करेंगी आकलन

समिति में ये होंगे शामिल
हाल में बारिश के दौरान सेंट्रल डिवाइडर पर लगा एक पुराना पेड़ कार पर गिरने से वृद्ध महिला की मौत के बाद नगर निगम ने पुराने और कमजोर पेड़ों की सुध लेने का फैसला किया है। निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने उद्यान विभाग को विशेषज्ञ समिति बनाने के निर्देश दिए हैं। समिति में पर्यावरणविद्, वन विभाग के अधिकारी, उद्यान अधिकारी और वनस्पति विज्ञान के विशेषज्ञ शामिल होंगे। समिति पुराने पेड़ों की उम्र, मजबूती और उनकी जड़ों व तनों की स्थिति का आकलन करेगी।
पेड़ की उम्र से नहीं, सीमेंट से खतरा
निगम शहर की कॉलोनियों, मुख्य मार्गों, फुटपाथ, सेंट्रल डिवाइडर और बगीचों में लगे पुराने पेड़ों का सर्वे करेगा। लेकिन पर्यावरणविदों का कहना है कि सर्वे में केवल पेड़ की उम्र और शाखाओं की स्थिति देखना पर्याप्त नहीं होगा। पेड़ के आसपास कितना सीमेंटीकरण हुआ है, जड़ों के लिए कितनी मिट्टी खुली है और सड़क निर्माण के दौरान जड़ों को कितना नुकसान पहुंचा है, इसकी भी जांच जरूरी है।
जड़ों के ऊपर बना दी सड़क-पक्की सतह
पर्यावरणविद् डॉ. ओपी जोशी ने कहा कि पुराने पेड़ों को कमजोर करने में सीमेंटीकरण बड़ी वजह है। सड़क निर्माण और फुटपाथ बनाते समय कई जगह पेड़ों के तनों तक सीमेंट डाल दिया जाता है। इससे जड़ों के आसपास पानी और हवा का प्राकृतिक आवागमन प्रभावित होता है। उनका कहना है कि निगम को पेड़ों के तनों के आसपास सीमेंट हटाकर मिट्टी खुली करनी चाहिए। जोशी के अनुसार डीआरपी लाइन में गिरा पेड़ भी सड़क निर्माण से पहले का था। बाद में उसके आसपास सड़क बना दी गई। डीआरपी लाइन में आज भी करीब 100 साल पुराने इमली के पेड़ मौजूद हैं। उनके अनुसार 1960 के दशक तक इस क्षेत्र में सघन वन हुआ करता था।
शाखाएं काटने में भी संतुलन जरूरी
पर्यावरणविद् डॉ. दिलीप वाघेला के अनुसार पुराने पेड़ों की छंटाई जरूरत के अनुसार और वैज्ञानिक तरीके से होनी चाहिए। कई बार पेड़ की एक तरफ की शाखाएं ज्यादा काट दी जाती हैं, जबकि दूसरी ओर का भार बना रहता है। इससे पेड़ का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है। सड़क चौड़ीकरण के दौरान बचाए गए पुराने पेड़ों की भी जांच जरूरी है।
ये भी पढ़ें: NGT का आदेश-भोपाल में कलियासोत और भोज वेटलैंड क्षेत्र में 700 पेड़ काटे, अब लगाने होंगे 7000 पौधे
250 से 300 साल पुराने करीब 50 पेड़
पर्यावरणविदों और शहर के इतिहासकारों के अनुसार इंदौर में करीब 50 ऐसे पेड़ हैं, जिनकी उम्र 250 से 300 वर्ष तक बताई जाती है। संवाद नगर में विशाल वट वृक्ष को शहर के प्राचीन जीवित पेड़ों में माना जाता है। कमिश्नर कार्यालय, गांधी हॉल और पोद्दार प्लाजा के पास करीब 210 साल पुराने सरकारी बरगद के पेड़ बताए जाते हैं। महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय के सामने केईएच कंपाउंड में ऐतिहासिक नीम का पेड़ भी मौजूद है।
पेड़ों के लिए दो बड़ी चुनौतियां
1. सड़कों का सीमेंटकरण
तनों और जड़ों तक सीमेंट-पेवर पहुंचने से मिट्टी बंद होती है। पानी और हवा का जड़ों तक पहुंचना प्रभावित होता है।
2. असंतुलित कटाई
बिना वैज्ञानिक तरीके से शाखाएं काटने पर पेड़ का भार और संतुलन बिगड़ सकता है। तेज हवा-बारिश में गिरने का खतरा बढ़ता है।
विशेषज्ञों का सुझाव
- सीमेंट हटाएं
- जड़ों को खुली मिट्टी दें
- पानी की जगह बनाएं
- वैज्ञानिक छंटाई करें
- पुराने पेड़ों का रिकॉर्ड तैयार करें
- ऐतिहासिक पेड़ों को हेरिटेज दर्जा दें
इनका कहना है…
पुराने और खतरनाक पेड़ों का सर्वे होगा। आबादी वाले क्षेत्रों, मुख्य मार्गों, फुटपाथ, डिवाइडर और बगीचों में विशेष ध्यान रहेगा।
क्षितिज सिंघल, निगम आयुक्त
पेड़ों के आसपास सीमेंट हटाकर मिट्टी खुली रखें। असंतुलित कटाई रोकें, ताकि जड़ों को पानी और पेड़ को प्राकृतिक मजबूती मिले।
- डॉ. ओपी जोशी, पर्यावरणविद्द
- डॉ. दिलीप वाघेला, पर्यावरणविद्
ये भी पढ़ें: रैपर को बुलाने की जरूरत क्या है, राहुल गांधी खुद ही काफी हैं: कैलाश विजयवर्गीय




















