केरवा में पानी बहता रहा, एफटीएल की सीमा नहीं मिल पाई, NGT ने 15 दिन में बहाव रोकने के उपाय करने को कहा

भोपाल। केरवा और कलियासोत डैम की वास्तविक सीमा पता करने के लिए ड्रोन उड़ाया गया, मौके पर सर्वे किया गया, लेकिन केरवा में पानी का बहाव ही सर्वे के आड़े आ गया। एफटीएल यानी फुल टैंक लेवल तक पानी नहीं होने से टीम मौके पर नक्शे में दर्ज सीमा का वास्तविक स्थिति से मिलान नहीं कर सकी। मंगलवार को एनजीटी में पेश मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सर्वे रिपोर्ट में यह स्थिति सामने आई। इस पर एनजीटी ने केरवा में पानी के बहाव को रोकने के उपाय 15 दिन में करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच में सुनवाई के दौरान पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे ने केरवा में सर्वे पूरा नहीं होने और डैम का पानी बहाए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने पीठ के सामने फोटो और वीडियो भी पेश किए।
पानी एफटीएल तक पहुंचे, तभी पता चलेगी असली सीमा
सुनवाई में यह बात सामने आई कि केरवा में पानी एफटीएल तक नहीं पहुंचने के कारण ग्राउंड ट्रुथिंग नहीं हो सकी। पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद नए पुल का निर्माण चल रहा है। निर्माण के दौरान पानी रोकने की स्थिति प्रभावित होने से डैम का जलस्तर एफटीएल तक नहीं पहुंच पाया। ऐसे में मौके पर मौजूद वास्तविक सीमा और नक्शे में दर्ज एफटीएल का वैज्ञानिक मिलान नहीं हो सका। एनजीटी ने संकेत दिए कि केरवा की वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए बिना आगे की कार्रवाई में जल्दबाजी नहीं की जाएगी।
सवाल- पानी बहता रहा तो डैम भरेगा कैसे
डॉ. सुभाष सी. पांडे ने सुनवाई में कहा कि एक तरफ डैम में एफटीएल तक पानी नहीं पहुंचने की बात कही जा रही है और दूसरी तरफ पानी बहाया जा रहा है। ऐसे में डैम कैसे भरेगा। उन्होंने आशंका जताई कि पानी का बहाव नहीं रोका गया तो केरवा में पर्याप्त जलभराव नहीं हो पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि केरवा डैम का पानी भोपाल के पेयजल के लिए आरक्षित है। एफटीएल तक पानी नहीं पहुंचने की स्थिति बनी रही तो भविष्य में शहर के कुछ हिस्सों में पेयजल संकट की स्थिति बन सकती है।
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15 दिन में बहाव रोकने के उपाय
मामले में डॉ. सुभाष सी. पांडे और राशिदनूर खान ने बताया कि एनजीटी ने 15 दिन में केरवा में पानी के बहाव को रोकने के उपाय करने के निर्देश दिए हैं। अब पानी रोकने के बाद डैम की स्थिति और जलस्तर के आधार पर वास्तविक एफटीएल सीमा का मिलान किया जा सकेगा।
कलियासोत में एफटीएल के करीब कारोबार
केरवा के उलट कलियासोत में ड्रोन सर्वे और ग्राउंड ट्रुथिंग के दौरान एफटीएल क्षेत्र के आसपास कई तरह की गतिविधियां सामने आई हैं। एफटीएल के 50 मीटर दायरे में पक्के निर्माण, डेरी, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां दर्ज की गई हैं। फिश फार्म क्षेत्र में एफटीएल से करीब 10 फीट की दूरी पर पक्का निर्माण और उसके पास डेरी मिली। जलभराव क्षेत्र के भीतर सड़क निर्माण और प्लाटिंग के लिए मुनारें लगाए जाने की स्थिति भी सर्वे में दर्ज की गई।
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खुदागंज में एफटीएल से आगे मिला पानी
सर्वे के दौरान खुदागंज गांव के कई हिस्सों में पानी एफटीएल की सीमा से आगे तक पहुंचा मिला। जलभराव क्षेत्र से लगे हिस्सों में रेस्टोरेंट और अन्य निर्माण भी टीम ने दर्ज किए हैं। अब एनजीटी की नजर दो रिपोर्ट और एक स्थिति पर रहेगी। पीसीबी की सर्वे रिपोर्ट, केरवा में पानी का बहाव रोकने के बाद की स्थिति और वास्तविक एफटीएल सीमा। इन्हीं के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है।




















