गाजा शांति समझौते के हस्ताक्षर कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेगा हमास, निरस्त्रीकरण की शर्त हमें स्वीकार नहीं : हुसाम बद्रान

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गाजा शांति समझौते के हस्ताक्षर कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेगा हमास, निरस्त्रीकरण की शर्त हमें स्वीकार नहीं : हुसाम बद्रान
हुसाम बद्रान, हमास के राजनीतिक ब्यूरो सदस्य

गाजा। हमास ने घोषणा की है कि वह मिस्र में होने वाले गाजा शांति समझौते के औपचारिक हस्ताक्षर कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेगा। इस घोषणा के साथ ही हमास ने खुद को उस औपचारिक हस्ताक्षर समारोह से अलग कर लिया है, जिसे गाजा युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा था। दो साल से जारी इस संघर्ष के बाद जब युद्धविराम लागू हुआ और कैदियों की अदला-बदली की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी, तभी अचानक हमास की इस घोषणा ने सब कुछ बदल दिया है। हमास के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य हुसाम बद्रान ने बताया कि हम औपचारिक हस्ताक्षर कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा हथियार छोड़ने की शर्त हमें मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर एकतरफा तरीके से निर्णय नहीं लिया जा सकता। अब हमास ने इस मुद्दे पर इजराइली प्रतिनिधियों से सीधे तौर पर बात नहीं की है।

हमास अपनी सशस्त्र पहचान छोड़ने को राजी नहीं

उन्होंने कहा संगठन ने अब तक शांति वार्ताओं में केवल कतर और मिस्र के माध्यम से परोक्ष रूप से भाग लिया है। हमास ने खुद को सीधे कूटनीतिक मंच पर लाने से परहेज किया है। यह कदम बताता है कि संगठन शांति प्रक्रिया में तो भागीदार रहना चाहता है, लेकिन किसी ऐसे समझौते की औपचारिक मान्यता देने से बच रहा है जिसमें उसके हथियार छोड़ने या निरस्त्रीकरण की बात शामिल हो। हमास का औपचारिक हस्ताक्षर से पीछे हटना एक प्रतीकात्मक कदम है, जो यह दिखाता है कि संगठन शांति की ओर झुकाव तो दिखा रहा है, लेकिन अपनी सशस्त्र पहचान को छोड़ने के लिए तैयार नहीं। यह रुख आने वाले समय में गाजा समझौते की स्थिरता को तय करेगा, और यह भी स्पष्ट करेगा कि क्या मौजूदा संघर्ष विराम वास्तव में स्थायी शांति में बदल सकेगा या फिर एक अस्थायी राहत भर रहेगा।

वार्ता में सबसे विवादित बिंदु हमास का निरस्त्रीकरण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित गाजा रोडमैप में सबसे विवादित बिंदु यही है-हमास के लड़ाकों का निरस्त्रीकरण। ट्रंप की योजना में कहा गया है कि अगर हमास के सदस्य अपने हथियार डालते हैं तो उन्हें आम माफी दी जाएगी और वे गाजा छोड़ने का विकल्प चुन सकते हैं। यह प्रस्ताव हमास के लिए अस्वीकार्य है। संगठन के एक वरिष्ठ नेता ने कहा हथियार सौंपना असंभव है, यह वार्ता का विषय नहीं है। इस बयान से स्पष्ट है कि हमास अपनी सशस्त्र क्षमता को अपनी पहचान और अस्तित्व का मूल मानता है, जिसे वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव में छोड़ने को तैयार नहीं है। ट्रंप की योजना कुल 20 बिंदुओं पर आधारित है, जिसका पहला चरण युद्धविराम और कैदियों की अदला-बदली से जुड़ा है।

कल से शुरू होनी है बंधकों की रिहाई

सोमवार से हमास द्वारा इजरायली बंधकों की रिहाई शुरू होनी है, जिसके बदले लगभग 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ा जाएगा। हमास के एक अन्य अधिकारी उसामा हमदान ने पुष्टि की कि समझौते के अनुसार सोमवार सुबह कैदी अदला-बदली शुरू होगी। यह प्रक्रिया आगामी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से पहले एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है। यह सम्मेलन मिस्र के शर्म अल-शेख में आयोजित होगा, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रपति ट्रंप और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी करेंगे। इसमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर समेत 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

स्थाई शांति की राह अब भी काफी कठिन

यह वैश्विक मंच गाजा में स्थायी शांति की दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है। हालांकि युद्धविराम अब तक प्रभावी बना हुआ है। दो बिन्दुओं पर अससहमतियां सामने आई हैं-हमास का निरस्त्रीकरण और इजरायली सेना की पूर्ण वापसी-अभी भी अनसुलझी हैं। हमास का कहना है कि ये मुद्दे समझौते के दूसरे चरण में चर्चा के लिए रखे गए हैं, जो कि बहुत जटिल और कठिन होंगे। इसका मतलब यह है कि भले ही फिलहाल संघर्षविराम कायम हो, पर स्थायी शांति का मार्ग अभी लंबा और चुनौतीपूर्ण है। 

Aniruddh Singh
By Aniruddh Singh

अनिरुद्ध प्रताप सिंह। नवंबर 2024 से पीपुल्स समाचार में मुख्य उप संपादक के रूप में कार्यरत। दैनिक जाग...Read More

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