PM मोदी से मिले रिजिजू, फिर स्पीकर से चर्चा, FCRA बिल पर JPC का विकल्प आया सामने

नई दिल्ली। विदेशी फंडिंग और NGO से जुड़े नियमों में बदलाव वाले FCRA संशोधन बिल को लेकर संसद में सियासी हलचल तेज हो गई है। सरकार इस विधेयक को सदन में लाने से पहले इसकी विस्तृत जांच कराने के लिए JPC के पास भेजने पर विचार कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष से भी बातचीत की। बताया जा रहा है कि सरकार संसद में बने गतिरोध को कम करने और विपक्ष को चर्चा के लिए साथ लाने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर विपक्ष बिल के मौजूदा स्वरूप पर लगातार सवाल उठा रहा है।
FCRA बिल पर सरकार बदल सकती है रणनीति?
FCRA यानी विदेशी अंशदान विनियमन कानून में प्रस्तावित बदलावों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच काफी समय से मतभेद हैं। विपक्षी दलों की आपत्तियों को देखते हुए सरकार अब विधेयक पर ज्यादा चर्चा का रास्ता अपना सकती है। JPC में भेजे जाने से बिल के प्रावधानों, उनके संभावित असर और कानूनी पहलुओं की विस्तार से जांच हो सकेगी। इससे सरकार को विपक्ष की चिंताओं पर चर्चा करने का मौका भी मिल सकता है।
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PM से मुलाकात के बाद रिजिजू की स्पीकर से चर्चा
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू संसद का काम सुचारू रूप से चलाने के लिए विपक्षी नेताओं से लगातार बातचीत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद लोकसभा अध्यक्ष से उनकी चर्चा को इसी कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार के सामने चुनौती यह है कि मॉनसून सत्र के बचे हुए समय में महत्वपूर्ण विधेयकों पर आगे की रणनीति तय की जाए।
BAC की बैठक में नहीं आया FCRA बिल
सोमवार को हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी यानी BAC की बैठक में FCRA संशोधन बिल और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को एजेंडे में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद दोनों विधेयकों को लेकर संसद में सरकार की रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है। अब यह साफ नहीं है कि सरकार इन्हें इसी सत्र में आगे बढ़ाएगी या पहले विपक्ष के साथ सहमति बनाने की कोशिश करेगी।
विपक्ष बोला- JPC से आगे बढ़कर सोचें
विपक्ष FCRA बिल को केवल JPC के पास भेजे जाने से संतुष्ट नहीं है। कई दलों की मांग है कि सरकार मौजूदा विधेयक को वापस ले और विदेशी फंडिंग से जुड़े कानून की नए सिरे से समीक्षा करे। विपक्ष का कहना है कि विदेशी चंदे से जुड़े सभी संगठनों को शक की नजर से देखना सही नहीं है।
सुप्रिया सुले ने उठाए सवाल
NCP-SP की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने FCRA बिल के मौजूदा स्वरूप का विरोध किया है। उन्होंने सरकार से विधेयक वापस लेने या इसे JPC को सौंपने की मांग की है। उनका कहना है कि विदेशी फंडिंग को लेकर नियम जरूरी हो सकते हैं लेकिन कानून बनाते समय सामाजिक संगठनों और दूसरे संबंधित पक्षों की चिंताओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।
DMK ने अमित शाह से की मुलाकात
DMK भी इस विधेयक के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा चुकी है। पार्टी सांसद पी. विल्सन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने बिल वापस लेने और FCRA की धारा 15 से जुड़े प्रावधानों को हटाने की मांग रखी। पार्टी ने यह भी कहा कि अगर सरकार बदलाव चाहती है तो पहले पूरे कानून की समीक्षा होनी चाहिए।
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कांग्रेस समेत कई दलों का विरोध
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वाम दलों सहित कई विपक्षी पार्टियां FCRA संशोधन के खिलाफ हैं। ऐसे में सरकार के सामने संसद में राजनीतिक सहमति बनाने की चुनौती बनी हुई है। अब असली सवाल यही है कि सरकार बिल को JPC के पास भेजकर रास्ता निकालती है या फिर इसे मौजूदा स्वरूप में सदन के सामने लाने की कोशिश करती है।











