मेरठ में 16,726 निर्माणों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सील के बाद टूटेगा अवैध निर्माण?

नई दिल्ली। मेरठ में अनधिकृत निर्माणों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत के सामने पेश की गई स्थिति रिपोर्ट में जोन-ए के भीतर 16,726 ऐसे निर्माण सामने आए, जिन्हें अवैध या अनधिकृत बताया गया है। इनमें बड़ी संख्या आवासीय इमारतों की है, जबकि कुछ निर्माण आवासीय और व्यावसायिक दोनों इस्तेमाल में हैं। कोर्ट ने कहा कि सबसे पहले इन परिसरों को खाली कराया जाए और फिर सील करने की कार्रवाई की जाए। साथ ही अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में होगी।
16 हजार से ज्यादा निर्माणों पर कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के 21 सितंबर के आदेश के मुताबिक, मेरठ को चार जोन में बांटकर सर्वे कराया गया। जोन-ए में 16 टीमों ने जांच की, जिसमें 16,726 निर्माण अवैध या अनधिकृत पाए गए। इनमें 12,907 आवासीय, 874 आवासीय-सह-गैर आवासीय और 2,945 गैर आवासीय निर्माण शामिल हैं। कोर्ट ने इन सभी के खिलाफ जल्द कार्रवाई का निर्देश दिया है।
पहले खाली होंगे परिसर, फिर लगेगी सील
अदालत ने कार्रवाई का पहला चरण स्पष्ट करते हुए कहा है कि संबंधित परिसरों को खाली कराया जाए और इसके बाद उन्हें सील किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि कुछ निर्माण कमजोर या जर्जर हालत में हो सकते हैं। ऐसे भवनों के गिरने से लोगों की जान को खतरा हो सकता है, इसलिए अधिकारियों को देरी नहीं करनी चाहिए।
बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी
जोन-ए में जिन निर्माणों की पहचान हो चुकी है, उन्हें हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का भी निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को इस काम में तेजी लाने को कहा है। साथ ही जोन-बी, सी और डी में मौजूद अनधिकृत निर्माणों की संख्या और स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करने को कहा गया है।
उल्देपुर की कॉलोनियों की होगी जांच
मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर में बड़ी संख्या में अवैध आवासीय कॉलोनियां विकसित होने का मामला भी सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी विस्तृत जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग बनाया है। आयोग यह देखेगा कि ये कॉलोनियां कैसे बनीं और मेरठ विकास प्राधिकरण की भूमिका क्या रही।
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44 संपत्तियों का मामला भी सामने
अदालत को बताया गया कि पहले सील की गई 44 संपत्तियों में से 20 को गिराया जा चुका है और वहां चल रहा अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल बंद कराया गया है। अब बची 24 संपत्तियों पर भी जल्द कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई संपत्तियों में मंजूर नक्शे के बाद अतिरिक्त निर्माण किया गया था।
अधिकारियों से मांगी गई जवाबदेही
सुप्रीम कोर्ट ने निर्माणों की स्थिति को गंभीर बताते हुए अधिकारियों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि यदि जर्जर या अवैध निर्माण से कोई गंभीर हादसा होता है और लोगों की जान जाती है, तो जिम्मेदार अधिकारी की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है। अब अगली सुनवाई में कार्रवाई की प्रगति पर रिपोर्ट पेश होगी।




















