अक्सर लोग किडनी बीमारी को थकान, पैरों की सूजन या यूरिन में बदलाव से जोड़ते हैं, लेकिन कई बार शुरुआत आंखों से होती है। किडनी और आंखें दोनों ही बेहद नाजुक ब्लड वेसल्स और फ्लूइड बैलेंस पर निर्भर रहती हैं। जब किडनी अपना काम ठीक से नहीं कर पाती, तो इसका असर सीधा आंखों की नसों और विज़न पर पड़ता है।
नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, किडनी की खराबी से आंखों में सूजन, धुंधलापन और यहां तक कि रंग पहचानने में बदलाव भी आ सकता है। कई बार ये लक्षण सामान्य आंखों की बीमारी जैसे लगते हैं, जिससे असली समस्या पकड़ में नहीं आती।
अगर सुबह-सुबह या देर रात जागने से सूजन आती है तो सामान्य है, लेकिन अगर सूजन पूरे दिन बनी रहे, तो यह किडनी में प्रोटीन लीक होने का संकेत हो सकता है। किडनी जब प्रोटीन को ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती, तो यह यूरिन में निकलने लगता है और आंखों के आसपास सूजन की शक्ल में दिखता है। यदि सूजन के साथ यूरिन झागदार दिखे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
अचानक विज़न का बदलना—धुंधलापन, दोहरी नजर—रेटिना की नसों के खराब होने का संकेत हो सकता है। हाई BP और डायबिटीज, जो किडनी खराब होने के बड़े कारण हैं, वे आंखों की छोटी नसों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इससे रेटिना में सूजन, आंख में फ्लूइड जमा और गंभीर मामलों में विज़न लॉस हो सकता है। डायबिटिक या BP मरीजों को विज़न में बदलाव दिखे तो किडनी फंक्शन टेस्ट जरूर कराएं।
ड्राई आई सिर्फ मौसम या स्क्रीन टाइम की वजह से नहीं होती। किडनी बीमारी बढ़ने पर, खासकर डायलिसिस लेने वाले मरीजों में, सूखी और जलन वाली आंखें बहुत आम हैं। कैल्शियम-फॉस्फोरस का असंतुलन और शरीर में टॉक्सिन बढ़ने से आंसू कम बनने लगते हैं। अगर आंखें अक्सर लाल, सूखी या चुभन वाली महसूस हों तो किडनी की जांच कराना जरूरी है।