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रूस। बुधवार को रूस के कामचटका प्रायद्वीप में आए 8.8 तीव्रता के भीषण भूकंप ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया। यह भूकंप भारतीय समयानुसार सुबह 4:54 बजे आया और इसका केंद्र जमीन से 19.3 किलोमीटर नीचे था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, यह अब तक दर्ज किए गए छह सबसे शक्तिशाली भूकंपों में शामिल हो गया है। इस आपदा से न सिर्फ रूस, बल्कि जापान, पेरू, इक्वाडोर और चीन जैसे देशों पर भी असर पड़ा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कामचटका में भूकंप के कुछ ही मिनटों बाद 4 मीटर (करीब 13 फीट) तक ऊंची सुनामी लहरें तट से टकराईं, जिससे कई इमारतों को नुकसान हुआ है। स्थानीय गवर्नर व्लादिमीर सोलोदोव ने इसे दशकों में आया सबसे शक्तिशाली भूकंप बताया है। उन्होंने जानकारी दी कि एक किंडरगार्टन स्कूल भी क्षतिग्रस्त हुआ है।
जापान के सरकारी चैनल NHK के मुताबिक, देश के पूर्वी तट पर सुनामी की पहली लहरें टकरा चुकी हैं। हालांकि उनकी ऊंचाई फिलहाल 30–50 सेंटीमीटर रही, लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि स्थिति कभी भी बदल सकती है। जापान की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने 21 प्रान्तों में हाई अलर्ट जारी किया है, और करीब 20 लाख लोगों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की अपील की गई है। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में होक्काइडो, कानागावा और वाकायामा शामिल हैं।
सावधानी के तौर पर टोक्यो के उत्तर में स्थित सेंडाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया है, वहीं फेरी सेवाएं भी अस्थायी रूप से रोकी गई हैं।
रूस में आए भूकंप के बाद पेरू और इक्वाडोर के गैलापागोस द्वीपों में भी सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। ये क्षेत्र भूकंप के केंद्र से करीब 13,000 किलोमीटर दूर हैं, लेकिन संभावित खतरे को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
पूर्वी चीन के तटीय इलाकों में भी सुनामी की आशंका जताई गई है। वहां के अधिकारियों को तटीय गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने का आदेश दिया गया है।
USGS के मुताबिक, यह भूकंप अब तक के सबसे बड़े छह भूकंपों में से एक है। इससे पहले इसी तीव्रता के दो बड़े भूकंप हो चुके हैं- एक 2010 में चिली के बायोबियो क्षेत्र में, जिसमें 523 लोगों की मौत हुई थी और 3.7 लाख से अधिक घर तबाह हो गए थे। दूसरा 1906 में इक्वाडोर के एस्मेराल्डास में, जिसमें 1,500 लोगों की जान चली गई थी और लहरें अमेरिका तक पहुंची थीं।
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