नई दिल्ली/दावोस-क्लॉस्टर्स। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की 56वीं वार्षिक बैठक सोमवार 19 जनवरी से शुरू हो रही है। स्विट्जरलैंड के दावोस-क्लॉस्टर्स शहर में आयोजित होने वाली यह बैठक 23 जनवरी 2026 तक चलेगी। यह दुनिया भर से राजनेताओं, उद्योगपतियों, नीति नियंताओं और अन्य वैश्विक नेताओं को एक मंच पर लाने वाला प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आयोजन है। बैठक की थीम ए स्प्रिरिट आफ डायलॉग यानी संवाद की भावना रखी गई है। ताकि विभाजित वैश्विक परिदृश्य में देशों और संस्थाओं के बीच बातचीत और सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके। सम्मेलन में दुनिया के 130 से अधिक देशों के 3,000 से अधिक नेता और प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। बैठक में हिस्सा लेने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, शिवराज सिंह चौहान,
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के लिए दुनिया भर के दिग्गज यहां जुटना शुरू हो गए हैं। सुरक्षा के लिए 5,000 से अधिक सशस्त्र बलों के जवान, रणनीतिक स्थानों पर तैनात स्नाइपर, एआई संचालित ड्रोन और विशेष उपकरण शहर की सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं। बैठक में दुनिया भर के 400 से अधिक राजनेता भाग ले रहे हैं, जिनमें 64 राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष हैं। एक हजार से अधिक सीईओ, नागरिक समाज के सदस्य, श्रम प्रतिनिधि, उद्यमी और थिंक टैंक भी बैठक में भाग लेंगे। बैठक में भाग लेने वाले प्रमुख नेताओं में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, कनाडा के पीएम मार्क कार्नी, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उसुर्ला वॉन डेर लेयेन, चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग, स्विस राष्ट्रपति गाइ पारमेलिन, पाक पीएम शहबाज शरीफ, फिलिस्तीनी राष्ट्रीय प्राधिकरण के पीएम मोहम्मद मुस्तफा, इजरायली राष्ट्रपति इसाक हर्जोग और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की शामिल हैं। बैठक में संयुक्त राष्ट्र, डब्ल्यूटीओ, विश्व बैंक, आईएमएफ, नाटो, डब्ल्यूएचओ, यूएनडीपी, ओईसीडी, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त और खाड़ी सहयोग परिषद के प्रमुख भी भाग लेंगे।
इस अहम बैठक से पहले एक बातचीत में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के ऊर्जा और सामग्री केंद्र के प्रमुख रॉबर्टो बोच्चा ने कहा कि भारत ऊर्जा परिवर्तन (एनर्जी ट्रांजिशन) योजना में उम्मीद से कहीं बेहतर गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा भारत की योजना बेहद महत्वाकांक्षी है और देश कई अहम लक्ष्यों को तय समय से पहले ही हासिल कर रहा है। खास तौर पर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और बिजली ढांचे के विस्तार में भारत की प्रगति उल्लेखनीय है। बोच्चा के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत ने करीब 50 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ी, जिसमें से लगभग 44.5 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा से आई। यह पिछले वर्ष के मुकाबले काफी अधिक है और दिखाता है कि भारत स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता हासिल करना है, लेकिन इस रास्ते में कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और ट्रांसमिशन नेटवर्क की सीमाएं ऐसे बड़े मुद्दे हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है।
बोच्चा ने कहा भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते देश के लिए यह संतुलन और भी ज्यादा अहम है। ऊर्जा सुरक्षा की परिभाषा भी अब बदल रही है। पहले यह मुख्य रूप से तेल, गैस और अन्य जीवाश्म ईंधनों की उपलब्धता तक सीमित थी, लेकिन अब इसमें बिजली ग्रिड, बुनियादी ढांचा, साइबर सुरक्षा और कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला जैसे पहलू भी शामिल हो गए हैं। बढ़ते विद्युतीकरण और डिजिटल सिस्टम के कारण ग्रिड की मजबूती और साइबर लचीलापन राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बन चुके हैं। भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी बिजली की मांग है। बोच्चा ने कहा कि एआई आधारित कंप्यूटिंग बिजली की मांग को तेजी से बढ़ाएगी और देशों को इसके लिए पहले से योजना बनानी होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एआई सिर्फ समस्या नहीं है, बल्कि समाधान का हिस्सा भी हो सकता है। एआई ऊर्जा प्रणालियों को अधिक कुशल बनाने, मांग और आपूर्ति को बेहतर ढंग से संतुलित करने और सिस्टम को अनुकूलित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।