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Manisha Dhanwani
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Shivani Gupta
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तेहरान। ईरान में हाल के हिंसक प्रदर्शनों के बीच सड़कों पर उतरे कई लोगों को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बड़ी उम्मीदें थीं। प्रदर्शनकारियों का मानना था कि वे उनके पक्ष में ठोस कदम उठाएंगे, लेकिन अब उनके रुख में आए बदलाव को लेकर कई ईरानी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इससे आहत हुए लोगों का कहना है कि ट्रंप ने जो कहा और बाद में जो किया, उसके बीच गहरा अंतर रहा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश छोड़ चुके एक ईरानी ने बताया कि जब ट्रंप ने यह बयान दिया कि अब और हत्याएं नहीं होंगी, तो लोग सन्न रह गए। प्रदर्शनकारियों में भारी गुस्सा था और वे कह रहे थे कि उन्हें तोप का चारा बना दिया गया। उनका मानना है कि ट्रम्प ने उन्हें झूठी उम्मीदें दिखाईं और मुश्किल वक्त में अकेला छोड़ दिया।
कई लोगों का कहना है कि ट्रम्प के बयानों से उन्हें साहस मिला और उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर प्रदर्शन किए। लेकिन जब हालात सबसे ज्यादा गंभीर हुए, तब अमेरिका का समर्थन पूरी तरह खत्म हो गया, जिससे लोगों में निराशा और आक्रोश और बढ़ गया।
इस बीच, ईरान में 28 दिसंबर से जारी हिंसक प्रदर्शनों में अब तक करीब 5,000 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें लगभग 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। एक ईरानी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर रॉयटर्स को यह जानकारी दी है। अधिकारी के मुताबिक, सबसे ज्यादा हिंसक झड़पें उत्तर-पश्चिमी ईरान के कुर्द बहुल इलाकों में हुईं, जहां हालात सबसे ज्यादा खराब बने हुए हैं।
ईरान में जारी हिंसा की एक दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है। फैशन की पढ़ाई कर रही 23 साल की कॉलेज छात्रा रूबिना अमिनियन को 8 जनवरी को ईरानी सुरक्षा बलों ने गोली मार दी थी। इस घटना का खुलासा अब हुआ है। न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, रूबिना की मां को अपनी बेटी का शव लाशों के ढेर के बीच तलाशना पड़ा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि रूबिना अमिनियन को सुरक्षा बलों की गोली सीधे सिर के पीछे लगी थी, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। बेटी की मौत के बाद परिवार पर इतना दबाव और डर था कि वे एक हफ्ते तक उसका अंतिम संस्कार भी नहीं कर सके।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई से बचने के लिए परिवार ने मजबूरी में रूबिना के शव को चोरी-छिपे सड़क किनारे एक गड्ढे में ही दफना दिया। न तो धार्मिक रीति-रिवाज निभाए जा सके और न ही बेटी को सम्मानजनक विदाई मिल सकी। यह घटना ईरान में हालात की भयावहता और आम लोगों, खासकर युवाओं पर हो रहे दमन की कहानी बयान करती है।