नवनीत राणा के खिलाफ बगावत : निगम चुनाव के बाद भाजपा में बवाल, अमरावती बना सियासी अखाड़ा

मुंबई। अमरावती नगर निगम चुनाव के नतीजों ने भाजपा के भीतर ही भूचाल ला दिया है। हार का सामना करने वाले पार्टी उम्मीदवार अब खुलकर बगावती तेवर में नजर आ रहे हैं। पूर्व सांसद नवनीत राणा को लेकर पार्टी के अंदर उठी नाराज़गी अब मुख्यमंत्री तक पहुंच गई है।
पहले जानिए अमरावती के नतीजे
87 पार्षदों वाले अमरावती नगर निगम में भाजपा को 25 सीटें मिलीं। नवनीत राणा के पति की पार्टी युवा स्वाभिमान पार्टी और कांग्रेस ने 15-15 सीटों पर जीत दर्ज की। AIMIM को 12, एनसीपी को 11 सीटें मिलीं। पिछली बार भाजपा ने 45 सीटों पर कब्जा जमाया था, जबकि युवा स्वाभिमान पार्टी सिर्फ 3 सीटों पर सिमटी थी।
22 नेताओं ने खोला मोर्चा
भाजपा के 22 उम्मीदवारों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर नवनीत राणा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन नेताओं में 20 हारे हुए और 2 जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवार शामिल हैं। सभी का दावा है कि चुनावी हार जनता की नाराजगी नहीं, बल्कि अंदरूनी नुकसान का नतीजा है।
विपक्ष नहीं, अपनों ने हराया
पत्र में नेताओं ने साफ कहा है कि उन्होंने पूरे समर्पण के साथ चुनाव लड़ा, लेकिन पार्टी की पूर्व सांसद ने ही उनकी राह मुश्किल कर दी। उनका आरोप है कि नवनीत राणा ने चुनाव के दौरान भाजपा के खिलाफ माहौल बनाया, जिससे मतदाताओं में भ्रम फैला।
गठबंधन टूटने का असर या सोची-समझी रणनीति?
उम्मीदवारों का आरोप है कि नवनीत राणा ने भाजपा प्रत्याशियों को दरकिनार करते हुए अपने पति रवि राणा की युवा स्वाभिमान पार्टी के उम्मीदवारों को असली भाजपा उम्मीदवार बताकर प्रचार किया। गौरतलब है कि चुनाव से पहले भाजपा और युवा स्वाभिमान पार्टी का गठबंधन टूट चुका था।
निष्कासन की मांग, चेतावनी भी साथ
शिकायतकर्ताओं ने पार्टी नेतृत्व से नवनीत राणा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो अमरावती शहर में भाजपा की राजनीतिक जड़ें और कमजोर हो सकती हैं।
नवनीत की चुप्पी ने बढ़ाया सस्पेंस
इतने गंभीर आरोपों के बावजूद पूर्व सांसद नवनीत राणा की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनकी चुप्पी ने इस सियासी विवाद को और हवा दे दी है।












