नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड गुजरात में 35,000 करोड़ रुपए के निवेश से गुजरात के खोराज में अपनी एक नई उत्पादन इकाई लगाई है। इस प्लांट में हर साल लगभग 10 लाख कारों का उत्पादन किया जाएगा, जिससे भारत में वाहन निर्माण क्षमता को बड़ी मजबूती मिलेगी। इस नए प्लांट के लिए गुजरात औद्योगिक विकास निगम (GIDC) ने कंपनी को करीब 1,750 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है। इतना बड़ा क्षेत्र इस बात का संकेत है कि यह संयंत्र केवल एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि एक संपूर्ण ऑटोमोबाइल इकोसिस्टम के रूप में विकसित होगा। यहां उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और सहायक उद्योगों से जुड़ी गतिविधियां एक साथ संचालित होंगी। इससे गुजरात को एक मजबूत ऑटो मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में और अधिक पहचान मिलेगी।
इस परियोजना का एक बड़ा पहलू रोजगार सृजन है। अनुमान है कि इस नए प्लांट से सीधे तौर पर करीब 12,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, ऑटो पार्ट्स बनाने वाली सहायक इकाइयों, एमएसएमई सेक्टर, ट्रांसपोर्ट और सर्विस इंडस्ट्री में अप्रत्यक्ष रूप से हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में काम के बेहतर मौके मिलेंगे और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। गांधीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक श्रीयुत हिताची ताकेउची ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को निवेश पत्र सौंपा। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस निवेश को गुजरात की उद्योग-हितैषी नीतियों और मजबूत बुनियादी ढांचे पर वैश्विक भरोसे का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा गुजरात अब भारत के प्रमुख ऑटोमोबाइल केंद्रों में से एक बन चुका है और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए पसंदीदा गंतव्य के रूप में उभर रहा है। यह परियोजना भारत और जापान के बीच औद्योगिक सहयोग को भी मजबूत करेगी, क्योंकि मारुति सुजुकी भारत-जापान साझेदारी का एक सफल उदाहरण है। कंपनी की यह पहल मेक इन इंडिया अभियान के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य देश में विनिर्माण को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक उत्पादन केंद्र बनाना है। जब देश में बड़े पैमाने पर वाहन निर्माण होगा, तो इससे निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी और भारत की वैश्विक बाजार में स्थिति मजबूत होगी। कुल मिलाकर, मारुति सुजुकी का यह 35,000 करोड़ रुपए का निवेश सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना नहीं है, बल्कि यह रोजगार, आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और भारत के विनिर्माण भविष्य से जुड़ा एक बड़ा कदम है। इससे गुजरात ही नहीं, बल्कि पूरे देश को लंबे समय में व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।