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वाशिंगटन। व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), खासकर चैटजीपीटी, को लेकर एक विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने सवाल किया कि जब चैटजीपीटी जैसे एआई प्लेटफॉर्म अमेरिका की धरती पर चल रहे हैं और अमेरिकी बिजली का उपयोग कर रहे हैं, तो उनकी सेवाओं का लाभ भारत, चीन और अन्य देशों के लोग क्यों उठा रहे हैं। नवारो ने कहा इसका आर्थिक बोझ अमेरिकी नागरिकों पर पड़ रहा है, जबकि लाभ दूसरे देशों के लोग उठा रहे हैं। नवारो ने तर्क दिया कि एआई डेटा सेंटर्स बहुत अधिक बिजली खपत करते हैं और इससे अमेरिका में बिजली की लागत बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इन डेटा सेंटर्स द्वारा उपयोग की जा रही ऊर्जा का बड़ा हिस्सा भारत और चीन जैसे देशों में बैठे उपयोगकर्ताओं को सेवाएं देने में खर्च हो रहा है।
पीटर नवारो ने कहा ट्रंप प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में एआई डेटा सेंटर्स और उनकी ऊर्जा खपत को लेकर सख्त नीतिगत कदम उठाए जा सकते हैं। यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों में तनाव चल रहा है। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारत पर ऊंचे टैरिफ लगाए हैं, जिसका कारण भारत द्वारा रूस से तेल खरीदना और व्यापार वार्ताओं में प्रगति न होना बताया जा रहा है। नवारो पहले भी भारत की व्यापार नीतियों की आलोचना करते रहे हैं और भारत पर रूस-यूक्रेन युद्ध में अप्रत्यक्ष रूप से रूस का समर्थन करने का आरोप लगाते रहे हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय ने उनके बयानों को अस्वीकार्य और अज्ञानपूर्ण बताया है। इस पूरे विवाद का एक बड़ा पहलू यह भी है कि चैटजीपीटी जैसे एआई प्लेटफॉर्म अब वैश्विक स्तर पर तेजी से फैल रहे हैं। भारत और चीन जैसे देशों में इनका उपयोग बहुत तेजी से बढ़ा है, जिससे अमेरिका में स्थित सर्वरों और ऊर्जा ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है। नवारो का बयान तकनीक के वैश्वीकरण और उसके खर्च को लेकर अमेरिका में बढ़ती चिंता को दर्शाता है। कुल मिलाकर, यह मामला केवल एआई या बिजली का नहीं, बल्कि वैश्विक तकनीकी प्रभुत्व, ऊर्जा संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार राजनीति से जुड़ा हुआ है।