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Naresh Bhagoria
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बृजेंद्र वर्मा
भोपाल। हर मंगलवार को कलेक्ट्रेट में होने वाली जनसुनवाई में कुछ ऐसे लोग हैं, जो हर जनसुनवाई में आते है। ठीक 11 बजे पहुंच जाते हैं और पूरे 2 घंटे डटे रहते हैं। स्थिति यह है कि बार-बार आने से इन लोगों के चेहरे अधिकारी-कर्मचारियों के अलावा कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह तक पहचानने लगे हैं, लेकिन इनकी समस्याओं का निराकरण अब तक नहीं हो सका है, जिससे ये बार-बार आवेदन दे रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक समस्या नहीं सुलझेगी, वे इसी तरह आते रहेंगे।
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रासलखेड़ी भानपुर निवासी शिवचरण खंगार 30 से अधिक बार आ चुके हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मालीखेड़ी आवासीय प्रोजेक्ट में एक आवास उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए जमा होने वाले 1 लाख 75 हजार रुपए को किस्तों में कराने की मांग है, लेकिन प्रशासन के अधिकारी आश्वासन देने के अलावा कुछ नहीं कर रहे हैं। इन्होंने बताया नगर निगम में 8 हजार रुपए महीने की नौकरी है। गोताखोर होने के चलते कई लोगों की जान भी बचा चुके हैं। इसके लिए उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान इन्हें सम्मानित कर चुके हैं। लेकिन वह एक आवास के लिए भटक रहे हैं।
जितेंद्र अहिरवार निवासी विजय नगर, साईंराम कॉलोनी सेमरा 28 बार जनसुनवाई में आ चुके हैं। हर जनसुनवाई में एक ही मांग रहती है कि साईंराम कॉलोनी चांदबड़ की शराब की दुकान प्रशासन हटाए। शराब की दुकान का संचालन होने से आवाजाही करने वालीं महिलाएं व बेटियां बहुत परेशान हैं। जनसुनवाई में हर बार इनका आवेदन लिया जाता है, लेकिन अब तक शराब की दुकान नहीं हटाई गई।
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कोलार के सुरेश प्रजापति 24वीं बार जनसुनवाई में आए। वे हर बार जनसुनवाई में आकर भिक्षावृत्ति को रोकने और भिखारियों के आत्मनिर्भर बनाकर स्वरोजगार से जोड़ने की मांग करते हैं। उनको देखकर कलेक्टर भी बोल चुके हैं कि कितनी बार शिकायत लेकर आओगे। प्रजापति को उम्मीद है कि एक न एक दिन उनकी बात सुनी जाएगी।
जनसुनवाई में आने वाले 50 प्रतिशत मामले एकपक्षीय होते हैं। बिना जांच के कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। कई बार आवेदक एक ही होते हैं। संबंधित विभाग के अधिकारियों को जांच करने के बाद ही समस्याओं का निराकरण करने के लिए निर्देशित किया जाता है।
कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर