जयपुर। राजस्थान में अरावली पर्वत श्रंखला में खनन को मंजूरी दिए जाने के फैसले के खिलाफ सोमवार को राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। इस फैसले से नाराज लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपना आक्रोश जताया। उदयपुर में कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उनकी पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई।
इस दौरान जमकर नारेबाजी की गई और हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। विरोध का असर सीकर में भी दिखा, जहां 945 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हर्ष पर्वत पर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने अरावली क्षेत्र में खनन को पर्यावरण के लिए घातक बताते हुए इसे तुरंत रोकने की मांग की।
20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली भू-आकृति को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा। इस मानक के लागू होने से अरावली की 90 प्रतिशत से अधिक पहाड़ियां संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएंगी। इस फैसले के बाद अरावली को बचाने की मांग को लेकर विरोध की आवाजें तेज हो गई हैं।

उदयपुर में अरावली संरक्षण को लेकर कई संगठन कलेक्ट्रेट पर एकजुट हुए और प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं, करणी सेना, फाइनेंस ग्रुप और विभिन्न समाजों के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान चेतावनी दी गई कि मांगें नहीं मानी गईं तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस बीच कलेक्ट्रेट परिसर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
अलवर में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि अरावली राजस्थान का फेफड़ा है और सरकार इसे खत्म करना चाहती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि चाहे जो हो जाए, अरावली को खत्म नहीं होने दिया जाएगा।
सीकर में पर्यावरण प्रेमी पवन ढाका ने अरावली में खनन के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि अगर किसी इंसान को उसके घर से निकाल दिया जाए तो वह कहीं न कहीं झोपड़ी बना सकता है, लेकिन जंगल उजड़ने पर जीव-जंतु कहां जाएंगे। उन्होंने कहा कि अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि हजारों जीव-जंतुओं का घर है।
