Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

ममता के SIR प्रक्रिया पर सवाल!बोलीं- प्रोसेस में गंभीर गलतियां, EC बिना सरकार को बताएं ऑब्जर्वर नियुक्त कर रहा

चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदाता मैपिंग के दौरान सीमा से सटे जिलों पर खास मॉनिटरिंग की जा रही है। दादा-दादी या परदादा-परदादी के नाम पर की गई संदिग्ध मैपिंग के सबसे ज्यादा मामले मुर्शिदाबाद जिले में सामने आए हैं,
बोलीं- प्रोसेस में गंभीर गलतियां, EC बिना सरकार को बताएं ऑब्जर्वर नियुक्त कर रहा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में करवाई जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट के इस विशेष पुनरीक्षण में कई बड़ी खामियां सामने आई हैं और वोटरों की मैपिंग में भारी त्रुटियां भी निकली हैं।

    ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग राज्य सरकार को जानकारी दिए बिना ही ऑब्जर्वरों की नियुक्ति कर रहा है और यह पूरी प्रक्रिया भाजपा के हित में की जा रही है।

    कई अधिकारियों को बांग्ला का ज्ञान नहीं- ममता

    सोमवार को कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बूथ लेवल एजेंटों की बैठक को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि SIR की सुनवाई के लिए माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में नियुक्त किए गए कई केंद्रीय अधिकारियों को स्थानीय भाषा बांग्ला का पर्याप्त ज्ञान नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे अधिकारी संशोधन प्रक्रिया के दूसरे चरण में वेरिफिकेशन कैसे सही तरीके से कर पाएंगे।

    जल्द शुरू होगी सुनवाई प्रक्रिया

    • नई मतदाता सूची जारी होने के बाद अब सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। पहले चरण में लगभग 30 लाख ऐसे मतदाताओं को नोटिस भेजे जा सकते हैं, जिनके एन्यूमरेशन फॉर्म में प्रोजेनी मैपिंग (वंशावली मिलान) दर्ज नहीं पाई गई है।
    • इसके साथ ही विभिन्न जिलों की ‘संदिग्ध’ श्रेणी में शामिल मतदाताओं को भी सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।
    • चुनाव आयोग की जांच में कई मामलों में मतदाताओं और उनके माता-पिता या दादा-दादी के बीच उम्र का अंतर असामान्य रूप से कम पाया गया है, जबकि कुछ इलाकों पर एक ही व्यक्ति को कई मतदाताओं का पिता या दादा दिखाया गया है।

    • आयोग ने इन्हें ‘संदिग्ध प्रोजेनी मैपिंग’ मानते हुए विशेष जांच शुरू की है। ऐसे मामलों की संख्या पहले करीब 1 करोड़ 67 लाख थी, जो प्राथमिक जांच के बाद घटकर 1 करोड़ 36 लाख रह गई है, और इसी सूची से चरणबद्ध तरीके से नोटिस जारी किए जाएंगे।

    मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा संदिग्ध मैपिंग

    • चुनाव आयोग के अनुसार मतदाता मैपिंग के दौरान सीमा से सटे जिलों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। दादा-दादी या परदादा-परदादी के नाम पर की गई संदिग्ध मैपिंग के सबसे ज्यादा मामले मुर्शिदाबाद जिले में सामने आए हैं, जहां ऐसे मतदाताओं की संख्या 4,07,065 है।

    • संदिग्ध मैपिंग के मामलों में दूसरे स्थान पर दक्षिण 24 परगना है, जहां 3,77,910 मतदाता चिह्नित किए गए हैं, जबकि तीसरे स्थान पर उत्तर 24 परगना है, जहां यह संख्या 2 लाख से अधिक बताई जा रही है।

    • ड्राफ्ट सूची से नाम हटाने के मामलों में भी दक्षिण 24 परगना शीर्ष पर है, जहां 8,18,432 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। वहीं उत्तर 24 परगना में 7,92,133 नाम हटाए जाने की पुष्टि हुई है।

    • आयोग के सूत्रों के मुताबिक, केवल इन दो जिलों में ही अब तक 6 लाख से अधिक मृत मतदाताओं की पहचान की गई है, जबकि करीब साढ़े 4 लाख लोगों को ‘लापता’ श्रेणी में रखा गया है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

    Latest Posts