भारत की तारीफ में चीन का बयान:12 चीनी नाविकों की जान बचाने का एहसान कभी नहीं भूलेंगे

भारत में चीन के नए सैन्य राजनयिक (मिलिट्री डिप्लोमैट) यू जियान ने भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) की खुलकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि केरल तट के पास आग की चपेट में आए मालवाहक जहाज से 12 चीनी नागरिकों की जान बचाने के लिए चीन भारत का हमेशा आभारी रहेगा। उन्होंने कहा कि चीन इस मदद को कभी नहीं भूलेगा। यू जियान ने यह बयान मंगलवार को नई दिल्ली में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की 99वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के प्रयासों से भारत और चीन के संबंध धीरे-धीरे फिर से सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
केरल तट पर हुआ था बड़ा हादसा
यह घटना 9 जून 2025 की है जब सिंगापुर के झंडे वाला कंटेनर जहाज एमवी वान हाई 503 (MV Wan Hai 503) केरल के अझिक्कल तट से करीब 44 समुद्री मील दूर हादसे का शिकार हो गया था। जहाज कोलंबो से मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह जा रहा था। सफर के दौरान एक कंटेनर में विस्फोट हुआ, जिसके बाद जहाज में भीषण आग लग गई। उस समय जहाज पर कुल 22 चालक दल के सदस्य सवार थे। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने तत्काल संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 18 लोगों को सुरक्षित बचा लिया, जबकि 4 लोग लापता हो गए जिन्हें बाद में मृत मान लिया गया।
चीन और ताइवान के नागरिक भी थे सवार
जहाज पर चीन और ताइवान के कुल 14 नागरिक मौजूद थे, जिनमें 8 चीन और 6 ताइवान के थे। बचाव अभियान के लिए भारतीय तटरक्षक बल ने 5 जहाज, 2 विमान और एक हेलिकॉप्टर तैनात किए थे। बचाए गए लोगों में कई घायल भी थे जिनमें दो गंभीर रूप से झुलस गए थे।
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भारतीय एजेंसियों ने कई दिन तक चलाया ऑपरेशन
रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल और वायुसेना ने कई दिनों तक जहाज में लगी आग बुझाने और उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का अभियान जारी रखा। 13 जून 2025 को भारतीय नौसेना ने हेलिकॉप्टर के जरिए विशेषज्ञों को जहाज पर उतारा ताकि आग पर काबू पाया जा सके और जहाज केरल तट की ओर बहकर न पहुंचे।
चीन पहले भी जता चुका है आभार
हादसे के तुरंत बाद भारत स्थित चीनी दूतावास ने भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल का सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया था। सिंगापुर के उच्चायुक्त ने भी भारतीय एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई और पेशेवर बचाव अभियान की सराहना की थी।
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गलवान के बाद बिगड़े थे रिश्ते, अब सुधार की कोशिश
भारत और चीन के रिश्तों में 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद गंभीर तनाव आ गया था। उस संघर्ष में 20 भारतीय और 4 चीनी सैनिकों की मौत हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के संबंध लंबे समय तक प्रभावित रहे। हालांकि अक्टूबर 2024 में पूर्वी लद्दाख के देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में गश्त को लेकर समझौते के बाद हालात में सुधार शुरू हुआ। इसके बाद ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकातों ने द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा दी। इसी क्रम में दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें दोबारा शुरू हुईं जबकि कैलाश मानसरोवर यात्रा भी फिर से बहाल कर दी गई जिसे भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।












