मप्र हाईकोर्ट ने कहा- ‘न्यायपालिका को सरकारी विभाग न समझे सरकार’, बजट के लिए ठोस समाधान निकालने के दिए निर्देश

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायिक बुनियादी ढांचे (जुडिशियल इन्फ्रास्ट्रक्चर) की बदहाली और बजट की कमी का रोना रोने पर राज्य सरकार को तीखी फटकार लगाई है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने दो टूक कहा है कि न्यायपालिका लोकतंत्र का एक मुख्य स्तंभ है, इसे कोई आम सरकारी विभाग न समझा जाए। बेंच ने राज्य के महाधिवक्ता से कहा है कि मुख्यमंत्री से बजट आवंटन के संबंध में चर्चा करके ठोस समाधान पेश करें। मामले पर अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।
किराए के भवन में कोर्ट बिल्डिंग पर सवाल
हाईकोर्ट ने ये निर्देश अनूपपुर के अधिवक्ता बासुदेव चटर्जी की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिए। यह मामला अनूपपुर जिले में वर्ष 2009 से किराए के भवन में कोर्ट बिल्डिंग के संचालित होने पर सवाल उठाए गए हैं। 3 फरवरी 2021 से नई कोर्ट बिल्डिंग के निर्माण का मुद्दा लंबित रहने को चुनौती देकर यह याचिका वर्ष 2025 में दाखिल की गई थी। बीते 28 जुलाई को इस मामले पर सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने कड़ा रुख अपनाते हुए वित्त सचिव और लॉ सेक्रेटरी को तलब किया था। मामले पर आगे हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनुभव सिंघल, दीपक कुमार पाण्डेय, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली, अदालत मित्र के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल, अधिवक्ता अंशुमान सिंह के अलावा वित्त विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनीष रस्तोगी और लॉ सेक्रेटरी मुकेश कुमार हाजिर हुए।
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कोर्ट रूम्स नहीं होने के कारण बढ़ रही पेंडेंसी
अपने आदेश में डिवीजन बेंच ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि भोपाल, इंदौर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में सिर्फ कोर्ट रूम्स की कमी के कारण मुकदमों की पेंडेंसी बढ़ रही है। भोपाल जिला कोर्ट में मामलों की संख्या के मुकाबले कोर्ट रूम्स कम हैं और परिसर में विस्तार के लिए जमीन भी उपलब्ध नहीं है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि मौजूदा कोर्ट बिल्डिंग के पास अतिरिक्त जमीन के आवंटन पर तुरंत विचार किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जजों की संख्या बढ़ाने के बावजूद पर्याप्त जगह न होने के कारण मामलों की सुनवाई नहीं हो पाती, जिससे आम जनता पिस रही है।
वित्तीय बाधाओं के कारण जारी नहीं हुआ फंड
महाधिवक्ता श्री सिंह ने डिवीजन बेंच को बताया कि नए शेड्यूल आॅफ रेट्स (एसओआर) के तहत मूल्यांकन समिति ने 17 जुलाई 2026 की बैठक में 45 करोड़ 87 लाख 72 हजार 36 रुपये के बजट की स्वीकृति दी है, लेकिन वित्तीय बाधाओं के चलते फंड जारी होने में देरी हो रही है। हालांकि उन्होंने बेंच को आश्वस्त किया कि वे व्यक्तिगत रूप से देखेंगे कि कैसे इस मामले का जल्द से जल्द समाधान निकल सकता है।
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