PU Special :माता-पिता के विवाद के बीच बच्चों को मिली राहत, भोपाल फैमिली कोर्ट में दो मामलों में हुआ समझौता

माता-पिता के विवाद का खामियाजा अक्सर बच्चों को भुगतना पड़ता है, लेकिन भोपाल फैमिली कोर्ट से इस बार एक सुखद खबर सामने आई है। काउंसलिंग के बाद दो मामलों में अभिभावकों के बीच बच्चों की कस्टडी को लेकर सुलह हुई और दोनों मामलों में बच्चों को माता-पिता के साथ बराबर समय बिताने का मौका मिला है।
माता-पिता के विवाद के बीच बच्चों को मिली राहत, भोपाल फैमिली कोर्ट में दो मामलों में हुआ समझौता
माता-पिता के विवाद के बीच बच्चों को मिली राहत

पल्लवी वाघेला, भोपाल। भोपाल फैमिली कोर्ट में हर माह बच्चों की कस्टडी से जुड़े करीब 15 मामले पहुंचते हैं। ज्यादातर मामलों में बच्चे माता-पिता में से किसी एक से दूर हो जाते हैं और कस्टडी पाने वाला अभिभावक बच्चों को दूसरे पैरेंट से दूर कर देता है। लेकिन इस हफ्ते काउंसलिंग के बाद दो मामलों में अभिभावकों के बीच आपसी सहमति बनी है। दोनों मामलों में बच्चों को माता-पिता दोनों के साथ समय बिताने पर सहमति बनी।

दो बेटियों को मां के साथ रहने का मौका

मीडिएशन सेंटर की समझाइश के बाद अब दो टीनएजर बेटियों को माता-पिता दोनों के साथ रहने का मौका मिल पाएगा। 46 वर्षीय महिला ने बेटियों से मिलने की गुजारिश की थी। महिला ने बताया कि पति की प्रताड़ना से तंग आकर वह अपनी मां के यहां रह रही है और कोर्ट में भरण-पोषण का केस भी चल रहा है। उसकी 16 और 13 साल की दोनों बेटियां पिता के साथ रह रही हैं और महिला को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा था। महिला के मुताबिक, दो साल से विवाद जारी है और इस दौरान वह एक बार भी बेटियों से नहीं मिली। सिर्फ तीन-चार बार बेटियों ने छिपकर उससे बात की है।

ये भी पढ़ें: इंदौर मेट्रो अब चलेगी 17 किमी-सीएम डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री खट्टर ने हरी झंडी दिखाई, सफर भी किया

काउंसलिंग के बाद हुआ समझौता

मामले में दोनों बेटियों को भी काउंसलिंग के लिए बुलाया गया और पिता को समझाया गया कि भले ही मां आर्थिक रूप से बेटियों को नहीं संभाल सकती, लेकिन इस उम्र में बेटियों को मां की भी जरूरत है। इसके बाद दंपति में समझौता हुआ। तय किया गया कि चार दिन बच्चियां पिता के पास और तीन दिन मां के साथ रहेंगी। साथ ही पति ने पत्नी को भरण-पोषण देने पर भी हामी भरी है।

Breaking News

बेटे से मिलने को लेकर था विवाद

दूसरे मामले में दंपति के बीच तलाक का केस जारी है। पिता की शिकायत थी कि पत्नी उसे आठ साल के बेटे से नहीं मिलने देती। वहीं, पत्नी का कहना था कि पति उसके बच्चे को उसके खिलाफ भड़काता है। पति ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा कि पत्नी को डर है कि कहीं बेटे की कस्टडी उसे न मिल जाए, इसलिए वह बहाने बना रही है। उसका कहना था कि उसे बेटे से फोन पर भी बात नहीं करने दी जाती। पिता ने यह भी शिकायत की कि बेटे के स्कूल में हिदायत दी गई है कि उसे बच्चे से मिलने नहीं दिया जाए।

ये भी पढ़ें: सिवनी में 1.08 करोड़ की लूट का 24 घंटे में खुलासा, 7 आरोपी गिरफ्तार

हर वीकेंड बेटे से मिल सकेंगे पिता

मामले में काउंसलिंग के बाद दोनों के बीच रजामंदी बनी। इसके तहत पिता, मां की जानकारी में बेटे से हर वीकेंड मिल सकता है और उसे अपने साथ आउटिंग पर भी ले जा सकता है। इस समझौते से बच्चे को माता-पिता दोनों के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। काउंसलिंग का उद्देश्य भी यही रहा कि माता-पिता के विवाद में बच्चों को दूर न किया जाए। फैमिली कोर्ट की काउंसलर शैल अवस्थी ने कहा कि दंपति के झगड़ों में बच्चों को मोहरा बनाना बेहद गलत है। हमारी कोशिश होती है कि बच्चे का संबंध माता-पिता दोनों से बना रहे।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

Latest Posts