लंदन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा की फीस को 6 लाख रुपए से बढ़ाकर 88 लाख रुपए कर दिया है। इस कदम के बाद कई भारतीय और अन्य विदेशी स्किल्ड वर्कर्स के लिए अमेरिका में काम करना मुश्किल हो गया है। वहीं, कनाडा इस स्थिति का फायदा उठाने के लिए अपनी नई योजनाओं को तैयार कर रहा है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने स्पष्ट किया कि, कनाडा हाई-स्किल्ड प्रोफेशनल्स को आकर्षित करने के लिए वर्क परमिट और स्थायी निवास के विकल्प पर काम कर रहा है।
H-1B वीजा विज्ञान, इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों के विशेषज्ञों के लिए होता है। नए नियमों के तहत वीजा की फीस 1,00,000 डॉलर (लगभग 88 लाख रुपए) कर दी गई है। इस फैसले से 2 लाख से अधिक भारतीय प्रभावित होंगे, क्योंकि 2024 में H-1B वीजा धारकों में 71% भारतीय हैं।
मुख्य प्रभाव:
कनाडाई पीएम मार्क कार्नी ने कहा कि, अमेरिका में H-1B वीजा शुल्क में बढ़ोतरी कनाडा के लिए अवसर है। उनकी योजना हाई-स्किल्ड टेक प्रोफेशनल्स को कनाडा लाने पर केंद्रित होगी।
कनाडा की रणनीति:
कनाडा के एक्सपर्ट्स मानते हैं कि, अमेरिका के इस फैसले से स्किल्ड पेशेवर कनाडा की ओर रुख करेंगे। इससे देश की टैलेंट पूल और तकनीकी क्षेत्र में मजबूती आएगी।
जर्मनी: भारतीय प्रोफेशनल्स को आकर्षित करने के लिए अपनी इमिग्रेशन पॉलिसी में सुधार। जर्मनी में भारतीय पेशेवर औसतन सबसे अधिक कमाई करते हैं।
ब्रिटेन: हाई-स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए वीजा फीस खत्म करने पर विचार। ग्लोबल टैलेंट वीजा में शीर्ष 5 यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट्स और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं की फीस माफ करने की योजना।
सिलिकॉन वैली में कंपनियों ने चेतावनी दी है कि, H-1B वीजा शुल्क में वृद्धि से विदेशी तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित होगी। लंबे समय से अमेरिकी कंपनियां इन वीजा धारकों पर निर्भर हैं।