PU Special :संबंधों मेें बाद में न आए खटास इसलिए प्यार या अरेंज मैरिज से पहले युवा जांच रहे रिश्ते की ‘कम्पैटिबिलिटी’

पल्लवी वाघेला, भोपाल। शादी से पहले सिर्फ कुंडली मिलाने का चलन ही नहीं, अब रिश्ते में समानता, सोच और अपेक्षाओं की पड़ताल भी युवा जरूरी मानने लगे हैं। यही कारण है कि राष्ट्रीय महिला आयोग के ‘तेरे मेरे सपने’ प्री काउंसलिंग सेंटर में पहुंचने वाले युवा कपल्स की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। बात भोपाल की करें तो यहां 28 जनवरी 2026 से शुरू हुए सेंटर में अब तक 390 के करीब भावी कपल काउंसलिंग के लिए संपर्क कर चुके हैं। वहीं, मप्र में यह संख्या 900 के करीब है। इनमें लव और अरेंज मैरिज दोनों शामिल हैं। दिलचस्प यह कि काउंसलिंग की पहल करने में युवतियों की संख्या युवाओं से थोड़ी अधिक है। काउंसलिंग में भावी दंपती से करियर, आर्थिक जिम्मेदारियों, परिवार, बच्चों, घरेलू कामकाज और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर बात की जा रही है। यानी युवा ‘समानता की कुंडली’ मिलाकर रिश्ते की मजबूत नींव रखने की कोशिश कर रहे हैं।
ब्रांड एंबेसडर बने सहायक
काउंसलिंग सेंटर के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से प्रदेश में विभिन्न ब्रांड एंबेसडर भी नियुक्त किए गए हैं। मसलन ब्यूटीशियन, मंदिर समिति, पंडित-काजी आदि। ये शादी की सूचना लेकर पहुंचने वाले जोड़ों को सेंटर पहुंचने के लिए प्रेरित कर रहे हैं और यह तरीका कारगर रहा है।
केस-1 : युवती ने कहा-पति बराबरी से काम करे
काउंसलिंग के लिए पहुंचे अरेंज मैरिज के मामले में युवती ने पहल की। शुरुआत में सब ठीक लगा, लेकिन लगातार बात होने पर सामने आया कि लड़की चाहती थी कि पति भी घर के काम और जिम्मेदारियों में बराबर हिस्सेदारी करे। उसके घर में पिता और भाई ऐसा ही करते थे। हालांकि, लड़के ने कहा कि यह अजीब है। हमारे यहां तो इसका जिक्र भी करूंगा तो जोरू का गुलाम कहा जाएगा। इसके बाद परिवारों को भी काउंसलिंग में शामिल किया गया और रिश्ता टिका रहा। नवंबर में कपल की शादी है।
केस- 2 : आठ साल से रिश्ता फिर भी कम्युनिकेशन गैप
लव मैरिज से जुड़े मामले में युवक पहले काउंसलिंग में पहुंचा। दोनों एक दूसरे को आठ साल से जानते हैं। इसके बाद भी काउंसलिंग के दौरान भारी कम्युनिकेशन गैप नजर आया। जब लड़की ने कहा कि वह परिवार में अकेली कमाने वाली है और भाई की नौकरी लगने तक परिवार को आर्थिक मदद करेगी तो लड़का अवाक रह गया। लड़के ने कहा कि वह तो चाहता था कि पत्नी शादी के बाद जॉब न करे और उसके माता-पिता की जिम्मेदारी निभाए। कपल की एक माह बाद फिर काउंसलिंग होगी।
ऐसे होती है काउंसलिंग
काउंसलिंग के दौरान ‘ड्रीम वर्सेस रियलिटी’ एक्टिविटी कराई जाती है। शादी के प्रति कपल की सोच, फाइनेंस, कॅरियर, बच्चों की जिम्मेदारी, वर्क-लाइफ बैलेंस और जॉइंट फैमिली जैसे मुद्दों पर अलग-अलग सेशन में बात होती है। एक प्रश्नावली के जरिए उनके बीच कम्पैटिबिलिटी को टेस्ट किया जाता है। सेंटर में कपल्स को सबसे पहले यह समझाया जाता है कि शादी सिर्फ रोमांस नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों और एडजस्टमेंट का रिश्ता है। एक तरीके से काउंसलिंग उन्हें भविष्य के लिए मानसिक रूप से तैयार करने का जरिया है।
समर खान, काउंसलर
फैक्ट फाइल
- 35 फीसदी अरेंज और 65 फीसद लव मैरिज वाले कपल्स शामिल हैं।
- काउंसलिंग की पहल करने में युवतियों का प्रतिशत 53 के करीब है। वहीं लड़कों का प्रतिशत 47 है।
- काउंसलिंग में पहुंचने वाले ज्यादातर कपल की उम्र 25 से 31 वर्ष है, जबकि 2 प्रतिशत मामलों में सेकंड मैरिज या लेट मैरिज वाले कपल ने संपर्क किया है।
आम चिंताएं
- पत्नी और परिवार के बीच संतुलन कैसे बनेगा
- आर्थिक जिम्मेदारी और घर के अन्य काम में बंटवारा
- शादी के बाद ससुराल करियर को प्राथमिकता देने देगा या नहीं
- लव मैरिज में परिवार को कैसे तैयार करें
- जॉइंट फैमिली में एडजस्टमेंट
- ससुराल जाकर लाइफस्टाइल और पहनावे को लेकर कितनी आजादी रहेगी
- इंटरकास्ट मैरिज का सामाजिक दबाव
- पति, पत्नी के माता-पिता की जिम्मेदारियों में कितना सपोर्ट करेगा





















