उरदौन: नशे के खिलाफ गांव का संकल्प, शराब बनाने और बेचने पर प्रतिबंध

सोहागपुर। इस प्रस्ताव को प्रभावी रूप से लागू कराने के लिए ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सोहागपुर डॉ. बबीता राठौर को ज्ञापन सौंपकर प्रशासनिक सहयोग और कार्रवाई की मांग की है।
शराब के खिलाफ ग्रामीणों का सामूहिक संकल्प
गांव में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने अवैध शराब की बिक्री से परिवारों और सामाजिक वातावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभावों पर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि शराब के कारण पारिवारिक विवाद, आर्थिक नुकसान और अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। इसी को देखते हुए ग्राम सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गांव में किसी भी व्यक्ति द्वारा महुआ की कच्ची शराब बनाते, बेचते या उसका सेवन करते पाए जाने पर प्रशासन को सूचना देकर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी।
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ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
ग्रामीणों ने ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव की प्रति संलग्न करते हुए एसडीएम डॉ. बबीता राठौर को ज्ञापन सौंपा और गांव को नशामुक्त बनाने के अभियान में प्रशासन से सहयोग की मांग की। प्रस्ताव की प्रतियां संबंधित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई हैं, ताकि गांव में अवैध शराब बनाने और बिक्री पर रोक लगाई जा सके।
आदिवासी महिलाओं की पहल बन रही मिसाल
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र की आदिवासी महिलाएं गांव-गांव में कच्ची शराब के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठा रही हैं। महिलाओं द्वारा नशे के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करने और अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का असर अब दूसरे गांवों में भी दिखाई देने लगा है। उरदौन में ग्राम सभा के माध्यम से लिया गया यह सामूहिक निर्णय इसी सामाजिक जागरूकता की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। ग्रामीणों और आदिवासी महिलाओं की इस पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है। उनका स्पष्ट संदेश है कि सामाजिक जागरूकता, ग्रामीणों की एकजुटता और प्रशासन के सहयोग से गांव को नशामुक्त और अपराधमुक्त बनाया जा सकता है।





















