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बिटुमेन के फर्जी बिल लगाने वाले ठेकेदार को मप्र हाईकोर्ट से राहत नहीं, 10 साल में लगाए थे 12 करोड़ के फर्जी बिल

जबलपुर में बिटुमेन के फर्जी बिलों के जरिए करीब 12.07 करोड़ रुपए का भुगतान हासिल करने के आरोपी ठेकेदार को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने EOW की FIR रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। वहीं, मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि नोटरी अधिवक्ताओं को विवाह या तलाक से जुड़े डीड निष्पादित करने का अधिकार नहीं है।
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बिटुमेन के फर्जी बिल लगाने वाले ठेकेदार को मप्र हाईकोर्ट से राहत नहीं, 10 साल में लगाए थे 12 करोड़ के फर्जी बिल
फाइल फोटो

जबलपुर। मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास निगम में बिटुमेन (डामर) के फर्जी बिल लगाकर करीब 12 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा करने वाले एक ठेकेदार को राहत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस हिमान्शु जोशी की सिंगल बेंच ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) जबलपुर द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।

शासन को वित्तीय हानि पहुंचाई

मे. विश्वकुसुम इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड जबलपुर के प्रोपराइटर अखिलेश मेहता की ओर से यह याचिका दायर की गई थी। ईओडब्ल्यू ने शिकायत और प्राथमिक सत्यापन के आधार पर याचिकाकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत अपराध दर्ज किया था। याचिकाकर्ता पर आरोप है कि वर्ष 2012 से 2022 के बीच जबलपुर जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विभिन्न पैकेजों में ठेकेदार द्वारा आईओसीएल, एचपीसीएल, बीपीसीएल जैसी प्रमुख तेल कंपनियों के नाम पर 45 फर्जी बिटुमेन इनवॉइस लगाए गए। इन फर्जी बिलों के जरिए विभाग से करीब 12 करोड़ 7 लाख 13 हजार रुपए से अधिक का भुगतान हासिल कर शासन को वित्तीय क्षति पहुंचाई।

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‘यह केस सेवा शर्तों का उल्लंघन नहीं’

सुनवाई के दौरान ईओडब्ल्यू की ओर से अधिवक्ता ए. राजेश्वर राव ने अदालत को बताया कि यह मामला सेवा शर्तों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि फर्जी बिलों के जरिए लिए गए करोड़ों रुपए के भुगतान का है। याचिकाकर्ता पर जो भी आरोप लगे हैं, उनका निराकरण इस पुनरीक्षण याचिका में नहीं किया जा सकता है।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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