कैमोर में 10 लाख टन एस्बेस्टस युक्त कचरे से फैले प्रदूषण को चुनौती, हाईकोर्ट ने केंद्र-राज्य सरकार से मांगा जवाब

जबलपुर। ब्रिटिश कंपनी टर्नर एंड न्यूऑल पीएलसी ने वर्ष 1934 में कैमोर में एस्बेस्टस फैक्ट्री स्थापित की थी। फैक्ट्री से निकले खतरनाक अपशिष्ट के कारण फैल रहे प्रदूषण को जनहित याचिका में चुनौती दी गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिए। अदालत ने जवाब पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 दिसंबर को होगी।
10 लाख टन दूषित मिट्टी होने का अनुमान
नई बस्ती कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित और नगर पालिका परिषद कैमोर के पूर्व अध्यक्ष गणेश राव ने याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि एस्बेस्टस फैक्ट्री से निकले खतरनाक अपशिष्ट का वर्षों तक खुले में निस्तारण किया गया।
इसके कारण कैमोर के आवासीय इलाकों और सार्वजनिक स्थानों पर एस्बेस्टस युक्त कचरा मौजूद होने की गंभीर आशंका है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कैमोर के आसपास लगभग 10 लाख टन एस्बेस्टस से दूषित मिट्टी है। साथ ही, लगभग 5.65 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में एस्बेस्टस प्रदूषण फैला हुआ है। इससे हजारों लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है।
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फैक्ट्री के स्वामित्व से जुड़ी कंपनियों का उल्लेख
याचिका में टर्नर एंड न्यूऑल पीएलसी और बेल्जियम की कंपनी ईटेक्स से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है। इसमें वर्तमान में फैक्ट्री का स्वामित्व एवरेस्ट इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पास होने की बात भी कही गई है।
याचिका के अनुसार, एस्बेस्टस के अत्यंत सूक्ष्म रेशे हवा के जरिए मानव शरीर में प्रवेश करते हैं। ये रेशे फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनके संपर्क में आने से एस्बेस्टोसिस, फेफड़ों का कैंसर और मेसोथेलियोमा जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं।
सैकड़ों प्रभावित लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड पेश
याचिका में सैकड़ों प्रभावित व्यक्तियों के मेडिकल रिकॉर्ड और मुआवजे से जुड़े दस्तावेज शामिल किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने इन सभी रिकॉर्डों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कैमोर में एस्बेस्टस प्रदूषण से जुड़े मामलों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। इसके लिए प्रस्तुत मेडिकल रिकॉर्ड और मुआवजे से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच जरूरी है।
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हाईकोर्ट ने अनावेदकों को जारी किए नोटिस
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आर्यन उरमलिया ने दलीलें रखीं। उन्होंने अदालत के सामने याचिका में उठाए गए मुद्दे प्रस्तुत किए।
सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने अनावेदकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को जवाब पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 दिसंबर को होगी।




















