Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

अचानक लड़खड़ाने लगे कदम या टेढ़ा हो जाए चेहरा? भूलकर भी न करें नजरअंदाज, जानें स्ट्रोक के 6 संकेत

World Stroke Day 2026: हर साल 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। अचानक चेहरा टेढ़ा होना, हाथ-पैर सुन्न पड़ना, बोलने में परेशानी और संतुलन बिगड़ना ब्रेन स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। जानिए स्ट्रोक की पहचान करने वाला BE FAST फॉर्मूला, शुरुआती लक्षण, इलाज के जरूरी तरीके और इससे बचाव के लिए डॉक्टर की महत्वपूर्ण सलाह।
अचानक लड़खड़ाने लगे कदम या टेढ़ा हो जाए चेहरा? भूलकर भी न करें नजरअंदाज, जानें स्ट्रोक के 6 संकेत
स्ट्रोक के ये 6 संकेत जानना है जरूरी! समय पर इलाज नहीं मिला तो बढ़ सकता है खतरा

World Stroke Day 2026: सोचिए, कोई व्यक्ति बिल्कुल ठीक है, लेकिन अचानक उसकी जुबान लड़खड़ाने लगे, हाथ-पैर कमजोर पड़ जाएं या चेहरा एक तरफ झुक जाए। कई लोग इसे थकान या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन ये ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें इलाज में थोड़ी-सी देरी भी खतरनाक साबित हो सकती है। हर साल 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है, ताकि लोगों को इसके लक्षण, इलाज और बचाव के बारे में जागरूक किया जा सके।

आखिर क्या होता है ब्रेन स्ट्रोक?

ब्रेन स्ट्रोक तब होता है, जब दिमाग तक खून पहुंचाने वाली किसी नस में रुकावट आ जाती है या कोई रक्त वाहिका फट जाती है। इससे दिमाग के एक हिस्से को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वहां की कोशिकाएं तेजी से खराब होने लगती हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीज को लकवा, बोलने और समझने में परेशानी या चलने-फिरने में कठिनाई हो सकती है। गंभीर मामलों में जान जाने का भी खतरा रहता है।

स्ट्रोक के 6 संकेत, याद रखें BE FAST फॉर्मूला

स्ट्रोक की पहचान करने के लिए डॉक्टर BE FAST फॉर्मूला अपनाने की सलाह देते हैं।

B – Balance (संतुलन): अचानक शरीर का संतुलन बिगड़ना, चलते समय लड़खड़ाना या खड़े होने में परेशानी होना।

E – Eyes (आंखें): अचानक धुंधला दिखाई देना, दो चीजें दिखना या एक या दोनों आंखों की नजर प्रभावित होना।

F – Face (चेहरा): चेहरे का एक हिस्सा अचानक लटक जाना या मुस्कुराने पर चेहरा एक तरफ झुकना।

A – Arms (हाथ): एक हाथ या पैर में अचानक कमजोरी आना, सुन्नपन महसूस होना या हाथ ऊपर उठाने में परेशानी होना।

S – Speech (बोलना): अचानक बोलने में दिक्कत होना, आवाज साफ न निकलना या दूसरों की बात समझने में परेशानी होना।

T – Time (समय): इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत एंबुलेंस बुलाएं। हर मिनट महत्वपूर्ण है।

कुछ मिनट में ठीक हो जाएं लक्षण, तब भी खतरा!

कई बार स्ट्रोक जैसे लक्षण कुछ मिनटों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। लोग समझते हैं कि अब सब सामान्य है, लेकिन ऐसा मानना खतरनाक हो सकता है। यह ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) हो सकता है, जिसे मिनी स्ट्रोक भी कहा जाता है।  TIA भविष्य में बड़े स्ट्रोक की चेतावनी हो सकता है। इसलिए लक्षण ठीक होने के बाद भी तुरंत मेडिकल जांच कराना जरूरी है।

स्ट्रोक आने पर सबसे पहले क्या करें?

स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही मरीज को तुरंत ऐसे अस्पताल पहुंचाएं, जहां स्ट्रोक के इलाज की सुविधा मौजूद हो। लक्षण कब शुरू हुए या मरीज आखिरी बार कब सामान्य था, इसका समय नोट कर लें। मरीज को खाना, पानी या कोई दवा न दें, क्योंकि उसकी निगलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन भी न दें। स्ट्रोक नस में खून का थक्का बनने या दिमाग में रक्तस्राव होने, दोनों कारणों से हो सकता है। इनका इलाज अलग-अलग होता है।

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट के सवाल के बाद 397 दवाएं सस्ती: कैंसर का 80 हजार का इंजेक्शन अब 7 हजार रुपए में, नई कीमत 9 नवंबर से लागू

स्ट्रोक का इलाज कैसे किया जाता है?

आज मेडिकल तकनीक की मदद से कई मरीजों में स्ट्रोक से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। क्लॉट घोलने वाली दवाएं: खून का थक्का बनने से हुए स्ट्रोक में कुछ मरीजों को एल्टेप्लेस या टेनेक्टेप्लेस जैसी दवाएं दी जा सकती हैं। आमतौर पर योग्य मरीजों में यह इलाज लक्षण शुरू होने के साढ़े चार घंटे के भीतर किया जाता है।

मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी: दिमाग की बड़ी नस में थक्का फंसने पर डॉक्टर विशेष उपकरण की मदद से उसे निकाल सकते हैं। चुने हुए मरीजों में जांच के आधार पर यह उपचार बाद में भी संभव हो सकता है।

ब्रेन इमेजिंग: सीटी स्कैन, सीटी एंजियोग्राफी और एमआरआई जैसी जांचों से डॉक्टर स्ट्रोक का प्रकार और दिमाग को हुए नुकसान का पता लगाते हैं।

हर स्ट्रोक में खून का थक्का नहीं बनता

कुछ मामलों में दिमाग की रक्त वाहिका फटने से भी स्ट्रोक होता है। इसे हेमरेजिक स्ट्रोक कहते हैं। ऐसे मरीजों में ब्लड प्रेशर नियंत्रित करना और जरूरत के अनुसार सर्जरी या दूसरी चिकित्सा प्रक्रिया करना जरूरी हो सकता है। इसीलिए बिना जांच के कोई दवा देना खतरनाक हो सकता है।

स्ट्रोक से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें

स्ट्रोक का खतरा कम करने के लिए ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखना जरूरी है। धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें। नियमित शारीरिक गतिविधि करें और संतुलित भोजन लें। दिल से जुड़ी बीमारियों का समय पर इलाज कराएं और नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं। याद रखें, स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर इंतजार नहीं, तुरंत इलाज जरूरी है। सही समय पर उठाया गया कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...

Latest Posts