30 लाख दीयों की चमक, लेजर शो का जादू और रामायण की झलक... दिवाली पर कुछ ऐसी सजी रामनगरी

उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या में दसवें दीपोत्सव का आयोजन बेहद भव्य अंदाज में किया गया। इस खास मौके पर पूरी अयोध्या को पारंपरिक दीयों और आधुनिक रोशनी से सजाया गया। सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों पर 30 लाख दीये जलाए गए। वहीं, राम की पैड़ी पर दीयों की रोशनी ने ऐसा नजारा पेश किया कि पूरी रामनगरी जगमगा उठी। इस बार दीपोत्सव में सिर्फ दीयों की चमक ही नहीं, बल्कि लेजर शो और डिजिटल तकनीक का भी शानदार मेल देखने को मिला।
30 लाख दीयों से रोशन हुई राम की पैड़ी
दीपोत्सव के मौके पर राम की पैड़ी और सरयू नदी के आसपास के घाटों पर लाखों दीये जलाए गए। 30 लाख दीयों की रोशनी से अयोध्या का नजारा बेहद खास हो गया। इस आयोजन में दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मुंबई, गुजरात और बिहार समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से आए पर्यटकों और श्रद्धालुओं ने दीपोत्सव की रौनक का आनंद लिया।

दीपों से सजे घाटों को देखने के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया। हर तरफ रोशनी और उत्सव का माहौल नजर आया। इस बार 56 घाटों पर 30 लाख दीये जलाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी भी की गई।
लेजर शो ने बांधा समां, डिजिटल स्तंभों पर दिखी रामायण
इस बार अयोध्या के दीपोत्सव में आधुनिक तकनीक का भी खास इस्तेमाल किया गया। धर्मपथ पर 50 डिजिटल स्तंभ लगाए गए, जिनके जरिए रामायण के अलग-अलग प्रसंग दिखाए जा रहे हैं। इन स्तंभों ने अयोध्या आने वाले लोगों को भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ी घटनाओं को नए अंदाज में देखने का मौका दिया।

इसके अलावा शहर में भव्य लेजर शो का आयोजन भी किया गया। रंग-बिरंगी रोशनी और शानदार दृश्य देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो गए। नेशनल हाईवे से प्रवेश द्वार तक दोनों ओर करीब 12-12 फीट ऊंचे डिजिटल स्तंभों के जरिए भी रोशनी का खास इंतजाम किया गया। पारंपरिक दीपों के साथ आधुनिक लाइट शो ने पूरे आयोजन को और आकर्षक बना दिया।
21 झांकियों में दिखाई गई भगवान श्रीराम की जीवन यात्रा
दीपोत्सव के अवसर पर उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की ओर से भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई। इस यात्रा की शुरुआत साकेत महाविद्यालय से हुई और इसका समापन राम कथा पार्क में किया गया। शोभायात्रा में कुल 21 झांकियां शामिल की गईं।

इन झांकियों के जरिए रामचरितमानस के अलग-अलग प्रसंगों को दिखाया गया। इनमें भगवान श्रीराम के जीवन, उनके वनवास और आदर्शों से जुड़ी घटनाओं को खास अंदाज में पेश किया गया। झांकियों को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। शोभायात्रा ने दीपोत्सव के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को और खास बना दिया।
श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है दीपोत्सव
अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन भगवान श्रीराम के 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी की याद में किया जाता है। मान्यता है कि श्रीराम के वापस आने पर अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हर साल रामनगरी में भव्य दीपोत्सव मनाया जाता है।

इस बार दसवें दीपोत्सव को लेकर लोगों में पहले से ही काफी उत्साह था। आयोजन को देखने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से पर्यटक अयोध्या पहुंचे। शहर के होटलों में भी अच्छी खासी भीड़ रही और कई होटल पूरी तरह बुक हो चुके थे।
परंपरा और आधुनिकता का दिखा शानदार मेल
इस बार का दीपोत्सव पारंपरिक संस्कृति और आधुनिक तकनीक के अनोखे मेल के लिए भी खास रहा। एक तरफ लाखों दीयों ने रामनगरी को रोशन किया, तो दूसरी तरफ डिजिटल स्तंभों और लेजर शो ने लोगों का ध्यान खींचा। 21 झांकियों के जरिए रामायण की झलक दिखाई गई।

दसवें दीपोत्सव में अयोध्या की हर गली और घाट उत्सव के रंग में रंगा नजर आया। दीपों की रोशनी, सांस्कृतिक झांकियों और आधुनिक लाइट शो ने रामनगरी के इस आयोजन को यादगार बना दिया।




















