Raipur News: स्वतंत्रता दिवस 2026: राष्ट्रपति भवन के निमंत्रण में चमकी बस्तर की संस्कृति, 'झिटकू-मिटकी' लोकगाथा को मिला राष्ट्रीय सम्मान

रायपुर: छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की खबर सामने आई है। स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति भवन के 'एट होम' निमंत्रण पत्र में इस बार बस्तर की ऐतिहासिक लोकगाथा 'झिटकू-मिटकी' और पारंपरिक ढोकरा शिल्प को विशेष स्थान दिया गया है। यह पहली बार है जब बस्तर की सांस्कृतिक पहचान देश के सर्वोच्च संवैधानिक आयोजन के निमंत्रण का हिस्सा बनी है।
ये भी पढ़ें: Raipur News: साय कैबिनेट की बड़ी बैठक आज: किसानों, युवाओं और उद्योगों के लिए हो सकते हैं बड़े फैसले
राष्ट्रपति भवन के निमंत्रण में चमकी बस्तर की पहचान
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन की ओर से भेजे जाने वाले प्रतिष्ठित 'एट होम' निमंत्रण पत्र में इस वर्ष छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति को विशेष सम्मान मिला है। निमंत्रण पत्र में बस्तर की पारंपरिक पिटवा कला और ढोकरा शिल्प से निर्मित ऐतिहासिक लोकगाथा 'झिटकू-मिटकी' की प्रतीकात्मक आकृति को शामिल किया गया है। यह सम्मान बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान मिलने का प्रतीक माना जा रहा है।
300 साल पुरानी प्रेमगाथा बनी राष्ट्रीय पहचान
झिटकू-मिटकी केवल एक प्रेम कहानी नहीं,बल्कि बस्तर के आदिवासी समाज की सामाजिक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और लोकआस्था की जीवंत पहचान है। लगभग 300 वर्ष पुरानी इस लोकगाथा को आज भी बस्तर में सम्मान और गर्व के साथ याद किया जाता है। यही वजह है कि ढोकरा कला में झिटकू-मिटकी की प्रतिमाएं विशेष महत्व रखती हैं और सम्मान-चिह्न के रूप में भेंट की जाती रही हैं।
ढोकरा कला को मिला देशभर में सम्मान
बस्तर की प्रसिद्ध ढोकरा (बेल मेटल) कला देश और विदेश में अपनी अलग पहचान रखती है। राष्ट्रपति भवन के निमंत्रण पत्र में इस कला को स्थान मिलने से बस्तर के पारंपरिक शिल्पकारों और जनजातीय कलाकारों के वर्षों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।
ये भी पढ़ें: Raipur News: 45 करोड़ निवेश का झांसा देकर 1.13 करोड़ की ठगी, 'ब्लैक मनी वॉश' गैंग की दो महिला आरोपी गिरफ्तार
राष्ट्रपति को भी भेंट की गई थी झिटकू-मिटकी कलाकृति
हाल ही में राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ की ओर से राष्ट्रपति को झिटकू-मिटकी की पारंपरिक ढोकरा कलाकृति भेंट की गई थी। अब उसी प्रतीक को स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक निमंत्रण पत्र में शामिल किया जाना इस सांस्कृतिक विरासत की बढ़ती राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को मिला स्थान
इस वर्ष राष्ट्रपति भवन के निमंत्रण पत्र में केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश की अन्य पारंपरिक कलाओं को भी सम्मान दिया गया है।
गोवा की प्रसिद्ध अजुलेलो टाइल कला
मध्यप्रदेश की जनजातीय भील चित्रकला
महाराष्ट्र की प्रसिद्ध वारली कला
इन सभी के साथ बस्तर की झिटकू-मिटकी कला को शामिल करना भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की पहल माना जा रहा है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने जताया गर्व
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर आज राष्ट्रीय पहचान प्राप्त कर रही है। झिटकू-मिटकी की लोकगाथा सदियों से बस्तर के जनजीवन, लोकआस्था और सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न हिस्सा रही है। राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस निमंत्रण में इस प्रतीक का स्थान मिलना प्रत्येक बस्तरवासी और छत्तीसगढ़वासी के लिए गर्व का क्षण है।












