अरुणाचल में फिर हिली धरती! बिचोम में 2.9 तीव्रता का भूकंप, फिलहाल कोई नुकसान नहीं

ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के बिचोम इलाके में मंगलवार सुबह धरती हल्के झटकों से हिली। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के आंकड़ों के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.9 दर्ज की गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार भूकंप से किसी व्यक्ति के घायल होने या किसी इमारत को नुकसान पहुंचने की खबर नहीं है। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। बिचोम और आसपास का इलाका भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। इससे पहले भी अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में छोटे और मध्यम स्तर के भूकंप दर्ज होते रहे हैं। ऐसे में मंगलवार के झटकों ने एक बार फिर क्षेत्र की संवेदनशीलता सामने ला दी है।
सुबह महसूस हुए हल्के झटके
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार बिचोम में आए भूकंप की तीव्रता 2.9 रही। इतनी कम तीव्रता के झटकों का असर आमतौर पर सीमित रहता है। कई बार ऐसे भूकंप सिर्फ उपकरणों में दर्ज होते हैं, जबकि भूकंप के केंद्र के नजदीक रहने वाले कुछ लोगों को हल्का कंपन महसूस हो सकता है। फिलहाल अधिकारियों की ओर से किसी बड़े नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय स्तर पर भी किसी इमारत, सड़क या दूसरी संपत्ति के क्षतिग्रस्त होने की सूचना नहीं है।
10 दिन के भीतर दूसरी बार हिली धरती
अरुणाचल प्रदेश में हाल के दिनों में भी भूकंप के झटके दर्ज किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 28 अगस्त को भी राज्य के एक हिस्से में भूकंप महसूस किया गया था। ऐसे में 8 सितंबर को बिचोम में आए झटकों को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि, लगातार छोटे झटके आने का मतलब यह नहीं है कि तुरंत किसी बड़े भूकंप का खतरा है। भूकंप कब और कितनी तीव्रता से आएगा, इसकी सटीक भविष्यवाणी फिलहाल संभव नहीं है।
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2.9 तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक?
2.9 तीव्रता का भूकंप आमतौर पर बहुत हल्का माना जाता है। इस स्तर के झटकों से सामान्य परिस्थितियों में मजबूत इमारतों को नुकसान होने की संभावना बेहद कम रहती है। असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंप कितनी गहराई पर आया और उसका केंद्र आबादी से कितनी दूरी पर था। इसलिए मौजूदा जानकारी के आधार पर बिचोम में आए इस भूकंप को लेकर बड़े नुकसान की आशंका नहीं दिखती। फिर भी किसी भी भूकंप के दौरान लोगों को घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी जाती है।
अरुणाचल क्यों है भूकंप के लिहाज से संवेदनशील?
अरुणाचल प्रदेश देश के उन इलाकों में शामिल है जहां भूकंपीय गतिविधियां ज्यादा होती हैं। राज्य का बड़ा हिस्सा उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्र में आता है। इसकी एक बड़ी वजह हिमालयी क्षेत्र में भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार होने वाली हलचल है। इसी वजह से पूर्वोत्तर भारत में समय-समय पर छोटे और बड़े भूकंप दर्ज किए जाते हैं। पहाड़ी इलाकों में भूकंप के दौरान भूस्खलन जैसी दूसरी समस्याएं भी चिंता का कारण बन सकती हैं।
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फिलहाल नुकसान नहीं, प्रशासन की नजर
बिचोम में आए 2.9 तीव्रता के भूकंप के बाद अभी तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है। अधिकारियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। विशेषज्ञों के अनुसार हल्के झटकों से घबराने की जरूरत नहीं होती लेकिन भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को हमेशा बुनियादी सुरक्षा उपायों की जानकारी रखनी चाहिए। किसी तेज झटके की स्थिति में घर के अंदर हों तो मजबूत मेज के नीचे सुरक्षित जगह लेना और खिड़कियों तथा भारी सामान से दूरी बनाना जरूरी है। खुले स्थान पर हों तो इमारतों और बिजली के खंभों से दूर रहना बेहतर होता है।



















