PU Special :इमरजेंसी में भी नहीं खुलते गेट, मौत का सफर बन रहीं लांग रूट और स्लीपर बसें

विजय एस. गौर, भोपाल। आग लगने या बस पलटने की स्थिति में पीछे बैठे यात्रियों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। कई बसों में यात्रियों की निकासी के लिए आगे ड्राइवर के पास मौजूद एक ही कॉमन दरवाजे पर निर्भरता रहती है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट भी बसों में सुरक्षा मानकों के इस पहलू पर सख्त रुख अपना चुका है। लगातार हो रहे हादसे बसों की वास्तविक सुरक्षा जांच की जरूरत को रेखांकित कर रहे हैं।
सिर्फ एक दरवाजे पर निर्भरता
प्रदेश की लांग रूट और स्लीपर बसों में कई जगह आपातकालीन निकास के रास्ते में सीटें लगाए जाने या रास्ता बाधित होने की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे में आग लगने या बस पलटने की स्थिति में पीछे बैठे यात्रियों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। खास बात यह है कि कई बसों में यात्रियों की निकासी के लिए आगे ड्राइवर के पास मौजूद एक ही कॉमन दरवाजे पर निर्भरता रहती है। आपातकालीन स्थिति में यही व्यवस्था यात्रियों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
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हाई कोर्ट ने अलग निकास की व्यवस्था पर दिया जोर
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट भी बसों में सुरक्षा मानकों के इस पहलू पर सख्त रुख अपना चुका है। कोर्ट ने मोटर वाहन नियमों के नियम 164 का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बसों में अलग प्रवेश-निकास दरवाजे और अतिरिक्त आपातकालीन निकास की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। आपातकालीन निकास का रास्ता किसी सीट या दूसरी वस्तु से बाधित नहीं होना चाहिए।
रीवा हादसे में 5 लोगों की हुई थी मौत
2 सितंबर 2026 को रीवा में बस और बल्कर की टक्कर में पांच लोगों की मौत और करीब 30 लोग घायल हुए। दिसंबर 2023 में गुना में बस और डंपर की टक्कर के बाद बस में आग लगने से 13 लोगों की मौत हुई थी। मई 2026 में शाजापुर में भी बस में आग लगने से एक बच्चे की मौत हुई। लगातार हो रही घटनाएं बसों की वास्तविक सुरक्षा जांच की जरूरत को रेखांकित करती हैं।
फिटनेस जांच पर भी उठ रहे सवाल
मप्र बस ऑनर्स एसोसिएशन के सचिव सुरेंद्र तनवानी का कहना है कि इमरजेंसी एग्जिट में सीट लगाने और निकासी का रास्ता बाधित करने की शिकायतें कई बार परिवहन विभाग तक पहुंचाई गई हैं। लांग रूट और स्लीपर बसों की औचक जांच की जाती है। उनका कहना है कि कई बार फिटनेस के समय बस की स्थिति सही होती है, लेकिन बाद में उसमें बदलाव कर दिए जाते हैं।
नियम टूटने पर जुर्माना और फिटनेस निरस्त
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी भोपाल जितेंद्र शर्मा के अनुसार, इमरजेंसी एग्जिट बाधित मिलने पर जुर्माना और फिटनेस निरस्त करने की कार्रवाई की जाती है। गलत पाए जाने पर 5 हजार रुपए सामान्य जुर्माना और फिटनेस निरस्त किया जा सकता है, जबकि अधिकतम 56 हजार रुपए जुर्माना और फिटनेस निरस्त करने की कार्रवाई होती है। प्रदेशभर में फिटनेस की औचक जांच जारी है और आरटीओ को बसों की सख्ती से जांच के निर्देश दिए गए हैं।
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फिटनेस के बाद बदलाव हुआ तो जिम्मेदारी किसकी?
परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने कहा कि प्रदेशभर में फिटनेस की औचक जांच जारी है। आरटीओ को फिर निर्देश दिए गए हैं कि बसों की सख्ती से जांच करें और इमरजेंसी एग्जिट में गड़बड़ी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करें। बड़ा सवाल यह है कि फिटनेस के बाद बस में बदलाव हो जाए और इमरजेंसी एग्जिट के रास्ते में सीट लगा दी जाए, तो यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी? जरूरत अब सिर्फ कागजों में फिटनेस जांच की नहीं, बल्कि बस के अंदर वास्तविक निकासी व्यवस्था के नियमित निरीक्षण की है।




















